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पहल:एमसी बना रहा घास-फूस, पत्तों से एरोबिक प्लांट में खाद, 40 दिन में होगी तैयार

चंडीगढ़2 महीने पहले
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  • बड़े पार्क और ग्रीन बेल्ट में बनाए जा रहे हैं 1 करोड़ 66 लाख के 55 एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट, चार पहले से हो चुके तैयार

एमसी का हॉर्टिकल्चर विंगशहर के पार्को, ग्रीन बेल्ट से काटी गई घास, पेडों की टहनियों से झड़े पत्तों को इधर उधर नहीं फेंक रहा है। बल्कि इन्हें शहर के पार्कों में बनाए जा रहे एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट में डाल रहा है। उसमें साइंटिफिक तरीके से 40 दिन में कम्पोस्ट तैयार होगी। इस कम्पोस्ट में बदबू नहीं होगी। न ही इसमें कीड़े-मकौड़े दिखाई देंगे। इस लिए एरोबिक प्लांट से तैयार कम्पोस्ट को पार्कों में डाले जाने से बदबू नहीं आएगी।

नगर निगम के हॉर्टिकल्चर विंग शहर के बड़े पार्कों और ग्रीन बेल्ट में 55 एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट बनवा रहा है। जबकि पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत 4 एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट पहले बनाए जा चुके हैं। इन्हें बनाने का काम दो कंपनी कर रही हैं। उन्हें एमसी की ओर से 86 और 80 लाख के दो हॉर्टिकल्चर डिविजन में टेंडर अलॉट किए हुए हैं। दोनों ही डिविजन की ओर से शहर के पार्कों और ग्रीन बेल्ट में 55 एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट बनाए जा रहे हैं।

इन्हें दो साइज में बनाया जा रहा है, जहां पार्क या ग्रीन बेल्ट छोटी है वहां पर 6x8 फुट साइज के 8 कंपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं। जबकि बड़े पार्कों में 6x8 फुट के दोनों साइड 10-10 कंपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं। इनकी जमीन से हाइट चार फुट है इन सभी कंपार्टमेंट को हवादार बनाया गया है । इन एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट के नीचे फिल्टर पाइप बिछाई जा रही हैं। इसी पाइप को सीवर लाइन में कनेक्ट किया गया है। ताकि घास, फूंस और पत्ते के सड़ने पर निकलने वाला लीचेट फिल्ट्रेशन पाइप के जरिए सीवर लाइन में बह जाए। ऐसे में इन एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट से तैयार होने वाली कम्पोस्ट में बदबू नहीं हो सकेगी। क्योंकि इसमें ऑक्सीजन पहुंच रही है।

साइंटिफिक तरीके से तैयार होगी कम्पोस्ट

हॉर्टिकल्चर एवं इलेक्ट्रिकल विंग के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर केपी सिंह का कहना है कि एरोबिक कम्पोस्ट प्लांट बनाए जा रहे हैं। उनमें कम्पोस्ट साइंटिफिक तरीके से तैयार होगी और उसमें बदबू नहीं आएगी। क्योंकि हर कंपार्टमेंट में हवा के लिए स्पेस छोड़े गए हैं और नीचली स्तह पर फिल्टर पाइप बिछाकर सीवर लाइन से जोड़ी हैं। जिससे कि घास फूंस और पत्ते सड़ने से लीचेट बनेगा वह सीवर लाइन में चला जाएगा।

पिट से तैयार होने वाली कम्पोस्ट होती थी बदबूदार

निगम के हॉर्टिकल्चर विंग की ओर से पहले पार्कों में 6 से 7 फुट गहरे गड्‌ढे खोदकर पिट बनाई हुई थी। इन्हीं में घास, फूंस, पत्ते , सूखे एवं गीले डाले जा रहे थे। इसके सड़ने में छह महीने लगते थे। लीचेट भी उसी में रह जाता था। इसलिए कम्पोस्ट बदबूदार होती थी और इसमें कीड़े- मकोड़े आदि दिखाई देते रहते थे। यह तरीका साइंटिफिक नहीं था इसी लिए बगैर ऑक्सीजन की कम्पोस्ट बनाने पर रोक लगा दी।

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