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स्पीकर के विस कमेटी की सदस्यता रद्द करने पर कंट्रोवर्सी:विधायक कुलदीप बिश्नोई बोले- स्पीकर कौन होते हैं कमेटी से हटाने वाले, वे माफी मांगे, उन्हें नियमों का ज्ञान नहीं

चंडीगढ़4 महीने पहले
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कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने यह भी कहा कि जूनियर विधायकों को बनाया चेयरमैन, यह राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने वाला कदम है। - Dainik Bhaskar
कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने यह भी कहा कि जूनियर विधायकों को बनाया चेयरमैन, यह राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने वाला कदम है।

हरियाणा विधानसभा कमेटियों की बैठक में न आने वाले विधायकों की कमेटियों से सदस्यता खत्म करने के स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता के बयान के बाद कंट्रोवर्सी शुरू हो गई है। मीडिया में खबरें छपने के बाद कांग्रेस की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य एवं चौथी बार के विधायक बने कुलदीप बिश्नोई ने सीधे सीधे स्पीकर को ही चैलेंज कर दिया है। उन्होंने कहा कि विधायकों को कमेटियों से हटाने वाले स्पीकर कौन होते हैं। स्पीकर को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

यह बयान अपरिपक्व और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। वे यहीं नहीं रुके और सीधे स्पीकर के ज्ञान पर भी सवाल उठा दिया। कहा, न तो उन्हें विधायकों की वरिष्ठता का ज्ञान है, न ही नियमों का और न ही राजनीतिक मर्यादा का ही पता है। विस कमेटियों में पहली या दूसरी बार चुनकर आए विधायकों को कमेटियों का चेयरमैन बनाया हुआ है और जो विधायक तीन-तीन, चार-चार बार विधानसभा में चुनकर आए हैं, उनको कमेटियों का सदस्य बना रखा है।

कुलदीप ने इसे राजनीतिक रूप से नीचा दिखाने वाला कदम बताया है। उन्हें भी उनसे जूनियर विधायकों की चेयरमैनशिप वाली कमेटी में सदस्य बनाया गया। कुलदीप ने कहा कि वे प्रोटोकॉल पर चलने वाले स्वाभिमानी व्यक्ति हैं और जूनियर विधायकों की चेयरमैनशिप वाली किसी कमेटी में वे सदस्य नहीं बन सकते।

यह है कमेटियों में चेयरमैन का गणित
विधानसभा में कार्य संचालन के लिए 13 कमेटियों का गठन किया हुआ, जिनकी हर सप्ताह विधानसभा में बैठक होती है। परंतु कई विधायक बैठकों में नहीं पहुंच रहें हैं। सभी कमेटियों के एक-एक चेयरमैन है। इनमें सिर्फ इंश्योरेंस कमेटी के चेयरमैन मोहम्मद इलियास ही चार बार से विधायक हैं। बाकी एक से दो बार से विधायक हैं। दस कमेटियों के चेयरमैन भाजपा विधायक हैं तो दो कमेटियों के चेयरमैन जजपा और एक कमेटी का चेयरमैन कांग्रेस से है।

कुलदीप का पत्र नहीं मिला, चेयरमैन पार्टियों के विधायकों की संख्या से तय होते हैं: स्पीकर
इस मामले में स्पीकर ने कहा कि जो भी कार्य होता है, वह नियमों के अनुसार होता है। कमेटियों की सदस्यता न चाहने वाले कुलदीप बिश्नोई का कोई पत्र उन्हें नहीं मिला है। रही बात चेयरमैन और सदस्यों की तो वह सदन में पार्टियों के सदस्यों की संख्या के आधार पर तय होता है।

‘दो बार लिख चुका हूं सदस्य न रहने का पत्र’
कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि उन्होंने पहले 2 दिसंबर, 2019 को ही पत्र लिखकर सूचित कर दिया था कि वे कमेटियों के सदस्य नहीं बनना चाहते हैं। उन्‍होंने दूसरा पत्र हाल ही में 3 अगस्त को स्पीकर के नाम लिखा। जिसमें कहा गया कि वे पहले से कमेटियों में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं। नवंबर, 2019 से वेतन-भत्ते से हर माह 10 हजार रुपए की कटौती की जा रही है। लिखा कि मै फिर सूचित कर रहा हूं मैं न तो पहले सदस्य था, न हूं और न आगे रहना चाहता हूं। जो पैसा काटा गया है, वह ब्याज समेत लौटाया जाए।

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