मंजूरी लिए बिना प्लॉट बेचना पड़ा महंगा:मोहाली उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को 50 हजार जुर्माना लगाया; ब्याज सहित रकम भी लौटाएगा

चंडीगढ़5 महीने पहले
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बिना मंजूरी के रिहायशी प्लॉट का विज्ञापन देना और बेचना एक बिल्डर को महंगा पड़ा गया। जिला उपभोक्ता आयोग, मोहाली ने मामले में GGP बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, खरड़ (पंजाब) तथा इसके MD अजय गुप्ता को शिकायतकर्ता द्वारा जमा कराए 22,50,000 रुपए 12 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने के आदेश दिए हैं।

शिकायतकर्ता को आई मानसिक पीड़ा और शारीरिक प्रताड़ना के रूप में 50 हजार रुपए हर्जाना एवं अदालती खर्च के रूप में भी भरने को कहा गया है। आयोग के प्रेसिडेंट संजीव दत्त शर्मा ने आदेश जारी किए। आयोग ने कहा कि यह प्रतिवादी पक्ष कि ड्यूटी थी कि वह 15 जुलाई 2019 तक प्लॉट की सेल डीड या रजिस्ट्री करता।

ऐसा करने में वह नाकाम रहा। प्रतिवादी पक्ष ने PAPRA एक्ट के प्रावधानों की उल्लंघना की, क्योंकि यह एग्रीमेंट से पहले 25 प्रतिशत से ज्यादा रकम नहीं ले सकता था। बिना स्वीकृतियों के प्लॉट की सेल का विज्ञापन करना और रकम लेना गलत व्यापारिक गतिविधियों में आता है। इसलिए कोताही बरतने के दोषी हैं।

पंजाब के जिला मुक्तसर की जसदीप कौर ने पार्टी बनाते हुए शिकायत दायर की थी। वह ट्राईसिटी में रिहायशी प्लॉट ढूंढ रही थी। इसके लिए वह प्रतिवादी के संपर्क में आई, जिन्होंने बताया कि उनका लांडरा रोड, खरड़ स्थित प्राइम सिटी प्रोजेक्ट मंजूरशुदा है और कब्जा जल्द मिल जाएगा। कन्वेयन्स डीड 31 दिसंबर 2019 तक होगी।

ऐसे में शिकायतकर्ता ने 96 स्क्वेयर यार्ड का रिहायशी प्लॉट बुक करवा लिया। इसके लिए 22,50,000 रुपए अदा किए गए। ग्रांउड फ्लोर के प्लॉट के कार्नर में होने के चलते 1,64,000 रुपए PLC के लिए गए। 70 हजार रुपए प्लॉट की रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में लिए गए, लेकिन इन सभी पेमेंट की कोई रसीद नहीं दी गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, प्रतिवादी ने वादा किया था कि अगर सेल डीड करने में वह नाकाम रहते हैं तो पूरी रकम रिफंड कर देंगे। प्रतिवादी का प्रोजेक्ट सक्षम अथॉरिटी से मंजूरशुदा नहीं था। वहीं इसने PAPRA एक्ट के प्रावधानों को भी नजरअंदाज किया। बिना एग्रीमेंट के 25 प्रतिशत से ज्यादा रकम वसूलने का भी हक नहीं था।

इसलिए शिकायत दायर की गई। न प्लॉट मिला और न ही रकम रिफंड की गई। आयोग में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के पेश न होने के चलते इसे 7 दिसंबर 2020 को एक्स-पार्टी घोषित कर दिया गया। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने अपने आरोपों को लेकर साक्ष्य और बहस पेश की, जिसके बाद आयोग ने अपना फैसला दिया।