फोर्टिस को इलाज के पैसे लौटाने के आदेश:बुजुर्ग महिला कैशलेस स्कीम की लाभार्थी थी, फिर भी देने पड़े पौने 3 लाख, तब मिला ट्रीटमेंट

बृजेन्द्र गाैड़/चंडीगढ़5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

पंजाब सरकार की कैशलेस स्कीम की लाभार्थी होने के बावजूद एक 67 वर्षीय बुजुर्ग (अब 72 वर्ष) महिला को इलाज के दौरान और उसके बाद मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। मोहाली के जिला उपभोक्ता आयोग ने सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तथा इंडिया हेल्थ सर्विस, इंडस्ट्रियल एरिया, फेज 1, मोहाली के MD के खिलाफ आदेश जारी किए हैं।

महिला का आरोप है कि उन्हें कैशलेस स्कीम में लाभार्थी होने के बावजूद इलाज के बाद 2,76,747 रुपए अरेंज करके अस्पताल को देने पड़े। इसलिए फोर्टिस अस्पताल को आदेश दिए गए हैं कि शिकायतकर्ता से लिए 2,80,563 रुपए 9 प्रतिशत ब्याज (4 सितंबर, 2016 से) दर सहित चुकाए। इसके अलावा 10 हजार रुपए अदालती खर्च के रूप में भी भरे। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तथा इंडिया हेल्थ सर्विस 35 हजार रुपए हर्जाना भरे।

तीनों को सेवा में कोताही बरतने और गलत व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया है चंडीगढ़ सेक्टर-37सी निवासी कमलेश कौर ने फोर्टिस हॉस्पिटल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, इंडिया हेल्थ सर्विस के MD तथा मोहाली फेज-6 स्थित पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कोरपोरेशन (PHSC) (नोडल डिपार्टमेंट) के MD को पार्टी बनाते हुए शिकायत कंज्यूमर कमीशन में दायर की थी। PHSC के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया गया है।

फोर्टिस ने हेल्थ पैकेज के सही रेट की जानकारी नहीं दी

कमीशन ने कहा कि फोर्टिस अस्पताल ने शिकायतकर्ता को पंजाब सरकार द्वारा पैकेज के तय रेट्स की सही जानकारी नहीं दी। प्रि-ऑथराइजेशन के बारे में नहीं बताया। ऐसे में इसे सेवा में कोताही बरतने और गलत व्यापारिक गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया गया। इसी तरह ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तथा इंडिया हेल्थ सर्विस को भी दोषी पाया गया। इनकी पंजाब सरकार की पॉलिसी को लागू करने की जिम्मेदारी थी।

कमीशन ने कहा कि इन्हें सुनिश्चित करना था कि सही पैकेज कोड और सही स्कीम लाभार्थियों के मामले में लागू हों। तानाशाही ढंग से प्रि-ऑथोराइज्ड रकम को कम कर दिया गया। एक अन्य मामले में बिना कारण दिए इसे बढ़ा दिया गया। पैकेज रेट्स के मुताबिक, शिकायतकर्ता पैकेज रेट्स के मुताबिक 3 लाख रुपए तक के लाभ की हकदार थी, लेकिन सर्विस प्रोवाइडर्स का कृत्य और आचरण स्कीम के उद्देश्यों के विपरीत था।

सरकार ने यह स्कीम चलाई थी

शिकायतकर्ता ने कहा कि पंजाब सरकार ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लॉन्च की थी। इसे पंजाब गवर्नमेंट इंप्लाइज एंड पेंशनर्स हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम (PGEPHIS) के नाम से शुरू किया गया था। 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 के समय काल में यह स्कीम चलाई गई थी। यह स्कीम सभी सरकारी कर्मियों और पेंशन धारकों के लिए जरूरी थी। इस स्कीम के तहत सभी प्रकार की इंडोर मेडिकल ट्रीटमेंट, प्री एंड पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन में कैशलेस सुविधा का प्रावधान था। वहीं मुख्य सदस्य तथा उसके आश्रितों का प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा भरना था। राज्य सरकार ने अपने नोडल विभाग (PHSC) के जरिए योजना के तहत पैकेज रेट्स को लेकर दिशा निर्देश जारी किए थे।

पति सरकारी नौकरी से रिटायर थे

शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके पति अवतार सिंह परमार पेंशनर थे और वह उनकी आश्रित होने के नाते कैशलेस स्कीम की हकदार थी। उन्हें घुटने के जॉइंट में दर्द था। ऐसे में 29 अगस्त 2016 को फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली से टोटल नी रिप्लेसमेंट (बायलेटरल) हुआ था। यह इंपैनल्ड अस्पताल था। उन्होंने सभी प्रकार के प्रोसिजर पूरे कर लिए थे। इसमें प्री-इन्वेस्टिगेशन, टेस्ट तथा ऑथराइजेशन लेटर प्राप्त करना शामिल था।

शिकायतकर्ता ने कहा कि वह 28 अगस्त 2016 से 4 सितंबर 2016 तक अस्पताल में भर्ती थी। शिकायतकर्ता पक्ष के मुताबिक, अस्पताल ने बताया था कि उन्हें इंश्योरर/TPA के जरिए 3 लाख रुपए आते हैं। हालांकि राज्य सरकार द्वारा तय किए गए पैकेज रेट्स की जानकारी नहीं दी। अस्पताल ने इंश्योरर/TPA के नाम पर इलाज का खर्च 4,42,395 रुपए बना दिया। इसमें टोटल नी रिप्लेसमेंट 2,61,855 रुपए का बताया गया।

अस्पताल ने पैकेज चार्जेस के रूप में 2,61,855 रुपए, कोस्ट ऑफ इंप्लांट 1,60,000 रुपए, कंज्यूमेबल्स 20,000, डॉक्टर चार्जेस तथा इंटरनल मेडिसिन के 540 रुपए बनाए गए थे। ऐसे में कुल बिल 4,42,395 रुपए बनाया गया था। अस्पताल ने 1,80,540 रुपए ओवरचार्ज किए गए थे।

रिश्तेदारों से रकम अरेंज करनी पड़ी

शिकायतकर्ता ने कहा कि अस्पताल की ओवरचार्जिंग के चलते शिकायतकर्ता पक्ष को 2,76,747 रुपए अलग से डिस्चार्ज होने के दौरान कैश देने पड़े। अपने जानकारों और रिश्तेदारों से इस रकम का प्रबंध करना पड़ा। उस दिन रविवार था। शिकायतकर्ता पक्ष को TCS चार्ज के रूप में 2712 रुपए (2 लाख से अधिक रकम कैश में देने का 1 प्रतिशत चार्ज) भी देना पड़ा। अस्पताल ने डिस्चार्ज करने के बाद 1 महीने की दवाई भी नहीं दी। ऐसे में लगभग 10 हजार रूपए की दवाई अलग से खरीदनी पड़ी। इस तरह अस्पताल ने कुल मिलाकर 1,93,252 रुपए ओवरचार्जिंग के रूप में वसूल लिए।

यह आरोप लगाया गया

सरकारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया कि इसके पैराग्राफ 11 में है कि सेवा में कोई भी कमी या कॉन्ट्रैक्ट, एग्रीमेंट, अनाचरण, जालसाज़ी करने पर इंपैनल्ड अस्पताल को सूची से बाहर किया जा सकता है। डिस्चार्ज होने के दौरान अस्पताल ने 4,42,395 रुपए का बिल बनाया। इंश्योरर/TPA ने 2,27,500 रुपए की रकम बिना कारण बताए घटा कर 1,65,648 रुपए कर दिया। शिकायतकर्ता पक्ष ने एक अन्य केस का हवाला देकर बताया कि TPA ने उनके साथ भेदभाव किया है। एक अन्य केस में रकम को बढ़ा दिया गया था, जबकि उनके केस में रकम को घटा दिया गया।

इन बीमारियों से पीड़ित शिकायतकर्ता

शिकायतकर्ता के मुताबिक, वह बुजुर्ग हैं और उन्हें कैंसर, हायपरटेंशन और शुगर भी है। उनका PGI के विभिन्न विभागों में इलाज भी चल रहा है। उनके 76 वर्षीय पति को शिकायतकर्ता के डिस्चार्ज के समय 2,76,747 रुपए का प्रबंध करने में मानसिक पीड़ा सहनी पड़ी। शिकायतकर्ता के पति ने राज्य स्तरीय शिकायत निवारण कमेटी के चेयरमैन को भी इसके MD के जरिए अपनी शिकायत दी थी, लेकिन कुछ नहीं बना।

प्रतिवादी पक्ष ने यह तर्क दिया

फोर्टिस अस्पताल ने कहा कि उनकी तरफ से कोई ओवरचार्जिंग नहीं की गई थी। मामले में पंजाब सरकार को पार्टी नहीं बनाया। बाकी आरोपों से भी इंकार करते हुए जवाब पेश किया गया था। वहीं कहा गया कि लाभार्थी मुफ्त इलाज का हकदार नहीं था। शिकायतकर्ता से पैकेज रेट के हिसाब से ही रकम ली गई थी।

वहीं ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तथा इंडिया हेल्थ सर्विस ने अपने संयुक्त जवाब में कहा था कि शिकायतकर्ता ने कई तथ्यों को छिपाया है, ताकि प्रतिवादी पक्ष से रकम हड़प सके। कमीशन में यह शिकायत मेंटेनेबल नहीं है। वहीं PHSC पॉलिसी को लागू करने वाली एक नोडल एजेंसी है। शिकायत का निवारण करने वाली एजेंसी नहीं है।

खबरें और भी हैं...