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हैप्पी मदर्स डे:अभिनेता गुरप्रीत घुग्गी बोले- मां ने एक बार बेटे और दूसरी बार एक्टर के रूप में मुझे जन्म दिया

चंडीगढ़3 महीने पहले
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गुरप्रीत ने कहा- मां पहली गुरु होती है, जो आपको इंसान बनाती है। मेरी मां ने मुझे एक बार नहीं दो बार जन्म दिया है। एक जन्म तो जैसे हर किसी का होता है वैसे ही और दूसरा जन्म एक अभिनेता के रूप में। मां ने ही मुझे अभिनय के क्षेत्र में आने में मदद की। - Dainik Bhaskar
गुरप्रीत ने कहा- मां पहली गुरु होती है, जो आपको इंसान बनाती है। मेरी मां ने मुझे एक बार नहीं दो बार जन्म दिया है। एक जन्म तो जैसे हर किसी का होता है वैसे ही और दूसरा जन्म एक अभिनेता के रूप में। मां ने ही मुझे अभिनय के क्षेत्र में आने में मदद की।

मां पहली गुरु होती है, जो आपको इंसान बनाती है। मेरी मां ने मुझे एक बार नहीं दो बार जन्म दिया है। एक जन्म तो जैसे हर किसी का होता है वैसे ही और दूसरा जन्म एक अभिनेता के रूप में। मां ने ही मुझे अभिनय के क्षेत्र में आने में मदद की। ये बात अभिनेता गुरप्रीत घुग्गी ने अपनी मां से जुड़ी भावनाओं को साझा किया।

उन्होंने कहा कि परिवार के हालात कभी अच्छे नहीं थे। मसलन, पैसों की तंगी आम बात थी। साल 1989 में दसवीं जमात पास की, तो करतारपुर सब तहसील में डॉक्यूमेंट राइटर के रूप में काम करने लगा। उस दौरान, लोग अपने दस्तावेज लिखवाने आते थे। कंप्यूटर या टाइपराइटर तो होते नहीं थे, हम अपने हाथों से इन्हें लिखते थे। शाम होते मुझे 5-10 रुपए मिल जाते थे।

शाम को बस से एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में हॉबी क्लास में जाता था, जहां अभिनय सीखने को मिला। उन्हीं दिनों अपना ग्रुप रहनुमा बनाया था। एक दिन, तहसील के बाहर एक दोस्त, मिला तो उसने बताया कि उसका एक वन एक्ट प्ले है, ऑडिटोरियम में। मुझे ये बहुत बड़ी कामयाबी लगी। ऑडिटोरियम, वन एक्ट प्ले और यूथ फेस्टिवल ऐसे शब्द सुनकर मुझसे रहा नहीं गया।

गुरप्रीत घुग्गी की मां।
गुरप्रीत घुग्गी की मां।

बारहवींं मैंने प्राइवेट कर ली थी, मैं भी कॉलेज में जाकर यूथ फेस्टिवल में हिस्सा लेना चाहता था। मगर, घर में इसको लेकर ज्यादा प्रोत्साहन नहीं मिला था। ऐसे में मां ने मेरा हौसला बढ़ाया। भाई और मां ने अभिनय को लेकर प्यार को समझा तो तहसील से डॉक्यूटमेंट राइटर का काम छोड़ कॉलेज में लग गया। यहां से मेरे अभिनय के दम पर मेरी फीस भी माफ हो गई। उस दौरान यूथ फेस्टिवल में हम राष्ट्रीय स्तर पर विजेता रहे।

सब डन डना डन डन हो जाएगा….

बचपन से ही घर में गरीबी देखी थी, पिता का व्यापार डूबा तो सिर पर कर्ज था। इतना कर्ज की जो भी कमाते सब उसकी भरपाई में लग जाता। एक तो आतंकवाद और दूसरी आर्थिक तंगी। हम तीन भाई हैं, दोनों भाई नौकरी में लगे तो ट्रेनिंग करने घर से बाहर रहे। पिता भी काम में व्यस्त रहते थे। मैं केवल अपनी मां के साथ ही रहता था। इतनी तंगी में भी हम एक ही चीज बोलते थे, जिससे जीवन में खुशी बनी रहे, वो था, एवरीथिंग विल बी डन एंड डन डना डन डन। इस लाइन को आज भी याद करता हूं, तो जीवन की सभी तकलीफें छोटी लगने लगती है। मेरे लिए वो पल सबसे खुशी वाला रहा। जब हमने अपनी मेहनत से अपने सिर पर चढ़ा सारा कर्ज उतार लिया।

हम कमरे में रिहर्सल करते घरवाले बाहर सोते..

घुग्गी ने कहा कि कॉलेज में अभिनय को लेकर ऐसा प्यार रहता था कि दिनभर रिहर्सल में ही समय गुजरता। उन दिनों आतंकवाद का समय था, ऐसे में रातभर कहीं जाकर रिहर्सल करना मुश्किल होता। ऐसे में सभी दोस्त के घर एक एक कर रिहर्सल होती। हमारा घर बहुत छोटा था। ऐसे में घरवालों ने मेरा एक्टिंग को लेकर प्यार समझा और वो खुद बाहर सोते थे, ताकि हम रातभर कमरों में रिहर्सल कर सकें। मां रातभर हमारी खातिरदारी करती थी, वो दिन और प्यार मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा।

खुल गया लॉकडाउन का दूसरा पार्ट भी बनाऊंगा

पिछले साल लॉकडाउन में घुग्गी की शायरी खुल गया लॉकडाउन काफी वायरल हुई, घुग्गी बोले कि इसका दूसरा पार्ट भी बनाऊंगा। कहीं न कहीं हमारी ही वजह से फिर ऐसी स्थिति हुई कि कोरोना वायरस इतना फैल गया। हालांकि, ऑक्सीजन की कमी से किसी का गुजर जाना बेहद दुखद है। सरकार को ऐसे हालातों की पहले से ही तैयारी करनी चाहिए। हालांकि, ये सब इतनी जल्दी में हुआ कि सब इससे आहत हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि जल्द ही इससे हम उबरेंगे। कोरोना वायरस ने केवल एक ही नहीं हर क्षेत्र को प्रभावित किया है। उम्मीद है कि हम मास्क पहननने और नियमित दूरी रखने पर विश्वास करेंगे।