टोक्यो ओलिंपिक्स 2020:शुरुआती कोच नसीम अहमद बोले; जिस टेक्नीक पर सभी हंसे थे उसी की बदौलत सबसे आगे हैं नीरज,फियरलेस नीरज अपने बेस्ट के करीब

चंडीगढ़3 महीने पहले
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कोच मानते हैं कि वो हमेशा सोच से आगे की करता है। उसके अंदर कमाल का कॉन्फिडेंस है और वो बिना डरे कंपीटिशन करता है। उसका माइंड सेटअप बहुत अच्छा है। - Dainik Bhaskar
कोच मानते हैं कि वो हमेशा सोच से आगे की करता है। उसके अंदर कमाल का कॉन्फिडेंस है और वो बिना डरे कंपीटिशन करता है। उसका माइंड सेटअप बहुत अच्छा है।

सिटी स्टार नीरज चोपड़ा ने ओलिंपिक जेवेलिन थ्रो के फाइनल में जगह बना ली है। नीरज ने पहले ही थ्रो में 86.65 मीटर का थ्रो करते हुए फाइनल में जगह बना ली और फिर कोई थ्रो नहीं किया। नीरज आए, दौड़े, जंप लगाई और ओलिंपिक क्वालिफिकेशन को सबसे पहले पार कर लिया। नीरज के शुरुआती कोच नसीम अहमद उनकी इसी तकनीक को बेस्ट मानते हैं। उन्होंने कहा कि उसका दौड़कर आना और जंप लगाकर थ्रो करना ही उसकी ताकत है, इसी ने उसे एक सफल जेवेलिन थ्रोअर बनाया है।

टोक्यो ओलिंपिक 2020 में शनिवार शाम साढ़े 4 बजे भारतीय जैवलिन थ्रोअर और DAV कॉलेज चंडीगढ़ के स्टूडेंट रह चुके नीरज चोपड़ा मेडल के लिए थ्रो करेंगे। नसीम ने कहा कि वो हमेशा सबसे अलग रहा है। 2015 में वो पहली बार पटियाला में सीनियर फेडरेशन कप खेला था। मैं वहां मौजूद था लेकिन नीरज इस बात को नहीं जानता था। मैंने उसे थ्रो करते हुए देखा। उसने दौड़ लगाई और जंप के साथ थ्रो किया, वो गिर गया और उसके घुटने और बाजू छिल गए। उसका खून निकल रहा था, वहां मौजूद एथलीट्स हंस रहे थे लेकिन वो हटा नहीं।

मैंने भी उसे रोकने के लिए कहा लेकिन उसने अपने थ्रो पूरे किए। वहां उसे मेडल नहीं मिला लेकिन अगले साल उसी दौड़, उसी स्टाइल, उसी जंप और उसी तरह की थ्रो ने उसे चैंपियन बनाया। उस समय कोई हंसने वाला नहीं था। उसने इस तकनीक को अपना लिया और आज यही उसकी पहचान है। टेक्नीक और एक्शन ही उसे बड़ा एथलीट बनाते हैं, उसके सभी कंपीटीटर्स लंबे हैं।

अपने कोच नसीम अहमद के साथ नीरज चोपड़ा।
अपने कोच नसीम अहमद के साथ नीरज चोपड़ा।

फियरलेस नीरज अपने बेस्ट के करीब

कोच मानते हैं कि वो हमेशा सोच से आगे की करता है। उसके अंदर कमाल का कॉन्फिडेंस है और वो बिना डरे कंपीटिशन करता है। उसका माइंड सेटअप बहुत अच्छा है। उसने यहां 86.65 मीटर का थ्रो किया जो उसके पर्सनल बेस्ट के करीब है। डिस्कस थ्रो और शॉटपुट के प्लेयर्स ऐसा नहीं कर पाए। उनपर दबाव ज्यादा था और वे अपने पर्सनल बेस्ट से दूर रहे। नीरज को आप फाइनल में उसके पर्सनल बेस्ट 88.07 मीटर के स्कोर से भी ज्यादा करते देखेंगे। वो मेडल जरूर जीतेगा।

2011 में पानीपत से पंचकूला आए

कोच नसीम ने कहा कि उन्होंने एक मिनट भी गेम का मिस नहीं किया। वो 2011 में पंचकूला ताऊ देवी लाल स्टेडिसम स्थित एकेडमी आया था। उस समय पानीपत से मुझे फोन आया कि हम 2-3 लड़के पंचकूला आना चाहते हैं। तब के डायरेक्टर ओपी सिंह ने मुझे छूट दी थी कि कितने भी बच्चे एकेडमी में रखें, सिर्फ रिजल्ट मिलना चाहिए। वो 4-5 लड़के आए। उसमें नीरज भी था और पैरा एशियन गेम्स का चैंपियन नरेंद्र भी। नीरज के हाथ में दम था और हमने उसे एकेडमी में सिलेक्ट कर लिया।

शुरू से ऑलराउंडर रहे हैं नीरज

नसीम ने कहा कि नीरज हमेशा ही ऑलराउंडर रहे हैं। आम तौर पर जेवेलिन थ्रोअर सिर्फ थ्रो ही करते हैं लेकिन नीरज हफ्ते में 2 ही दिन थ्रो करता था। अन्य 5 दिन ये अपनी फिटनेस पर काम करता और दूसरे गेम्स खेलता। लॉन्ग जंप, हाई जंप के साथ साथ वॉलीबाल और बास्केटबॉल भी ये खेलता था। वॉलीबॉल में भी वो बहुत अच्छा प्लेयर है। वो अपने आप को कभी भी बड़ा खिलाड़ी नहीं मानता, वो सिर्फ अपने आप में सुधार करने के लिए मेहनत करता है। ऐसे ही खिलाड़ी इतिहास बनाते हैं।

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