गैंगस्टर पर दर्ज NIA की FIR की कॉपी:टेरर फंडिंग से धमाके-टारगेट किलिंग की साजिश रच रहे; चंडीगढ़ की एडवोकेट पर इसी से कार्रवाई

बृजेन्द्र गौड़,चंडीगढ़3 महीने पहले
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देश में 26 जगहों पर NIA ने हाल ही में रेड की थी। इनमें वकीलों के घर-दफ्तर समेत गैंगस्टर्स के ठिकाने शामिल थे। - Dainik Bhaskar
देश में 26 जगहों पर NIA ने हाल ही में रेड की थी। इनमें वकीलों के घर-दफ्तर समेत गैंगस्टर्स के ठिकाने शामिल थे।

पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के गैंगस्टर्स पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की FIR में बड़ा खुलासा हुआ है। यह गैंगस्टर अपने गुर्गों और स्लीपर सेल की मदद से दिल्ली समेत कई जगहों पर आतंकी हमलों की प्लानिंग कर रहे हैं। यही नहीं इन्होंने टारगेट किलिंग की भी साजिश रची है। जिसमें घातक हथियारों और विस्फोटक इस्तेमाल किए जाने थे। गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया का केस लड़ रहीं चंडीगढ़ की महिला वकील डॉ. शैली शर्मा के घर भी इसी FIR के आधार पर रेड हुई थी।

बड़े स्तर पर लोगों में दहशत फैलाने के लिए यह टेरेरिस्ट गैंग साइबर स्पेस और सोशल मीडिया के जरिए क्राइम की जानकारी तक देते हैं। इनमें से कुछ गैंग जेल से ऑपरेट किए जा रहे हैं। कुछ गैंग मेंबर्स फरार होकर देश-विदेश में बैठकर नेटवर्क चला रहे हैं।

FIR के बाद NIA ने की थी ताबड़तोड़ रेड
चंडीगढ़ की महिला वकील डा. शैली शर्मा के घर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की रेड का आधार दिल्ली पुलिस की 7 अगस्त, 2022 को दर्ज एक FIR थी। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (MHA) के आदेशों पर इसकी जांच NIA को सौंपी गई थी। जिसके आधार पर IPC की धारा 120 और UA(PA) एक्ट की धारा 18, 18बी और 20 के तहत 26 अगस्त, 2022 में केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई थी। दिल्ली में NIA पुलिस स्टेशन ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में ACP कैलाश सिंह बिष्ट की शिकायत पर यह केस दर्ज किया था।

डा. शैली शर्मा के सेक्टर 27 स्थित घर पर रेड की गई थी।
डा. शैली शर्मा के सेक्टर 27 स्थित घर पर रेड की गई थी।

इस केस में मिले इनपुट के आधार पर NIA ने गैंगस्टर्स के घरों व अन्य जगहों पर रेड की थी। वहीं चंडीगढ़ में डा. शैली शर्मा समेत बठिंडा, गुरुग्राम और दिल्ली में कुल 4 एडवोकेट्स के घरों और ऑफिसों में रेड की थी। यह वकील गैंगस्टर्स के केस लड़ रहे थे। चंडीगढ़ में डा. शैली शर्मा ए प्लस कैटेगरी के गैंगस्टर्स जग्गू भगवानपुरिया समेत कई बड़े गैंगस्टर्स की तरफ से पैरवी कर रही हैं।

डा. शर्मा के मोबाइल फोन 18 अक्तूबर की रेड के बाद NIA कोर्ट, दिल्ली में पेश कर कोर्ट ऑर्डर पर उनका डेटा रिकवर किया गया था। चंडीगढ़ में वकीलों ने इसे एविडेंस एक्ट और वकीलों की ड्यूटी में बाधा पहुंचाना बताया था। कई दिनों तक वर्क सस्पेंड भी रखा गया।

इन गैंगस्टर्स पर आतंकी हमलों का शक
दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को अहम जानकारी मिली थी भारत और विदेशों में बैठे क्रिमिनल सिंडिकेट/गैंग के मेंबर्स ने दिल्ली समेत देश के अलग हिस्सों में आतंकी हमलों की साजिश रची है। गौरव पटियाल उर्फ सौरव ठाकुर, सुखदुल सिंह उर्फ सुख दुन्नेके, गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा डलिया, कौशल उर्फ नरेश, नीरज सेहरावत उर्फ नीरज बवाना, सुनील मान उर्फ सुनील बलियां, अमित डागर, भूपिंदर सिंह उर्फ भूप्पी राणा युवाओं को भर्ती कर रहे हैं ताकि देश में आतंकी हमले कर लोगों में दहशत पैदा कर सकें।

गैंगस्टर पटियाल का नाम मिड्डूखेड़ा हत्या में आ चुका
गैंगस्टर गौरव पटियाल का नाम पिछले वर्ष अगस्त में हुई यूथ अकाली नेता विक्की मिड्‌डूखेड़ा हत्याकांड में सामने आ चुका है। पटियाल लारेंस बिश्नोई गैंग के एंटी ग्रुप का मेंबर है। लारेंस ने कथित रुप से मिड्‌डूखेड़ा की हत्या का बदला लेते हुए इसी वर्ष 29 मई को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या करवाई थी। पटयाल अर्मानिया ने दंविंदर बंबीहा गैंग को ऑपरेट कर रहा है।

पिछले साल अगस्त में विक्की मिड्‌डूखेड़ा की मोहाली में हत्या की गई थी।(फाइल)
पिछले साल अगस्त में विक्की मिड्‌डूखेड़ा की मोहाली में हत्या की गई थी।(फाइल)

गैंगस्टर्स के यह एड्रेस मिले थे
NIA ने देश के कई हिस्सों में गैंगस्टर्स के घरों में बीते दिनों रेड की थी। जानकारी के मुताबिक गैंगस्टर गौरव पटियाल के न्यू कॉलोनी, खुड्डा लौहारा चंडीगढ़, सुखदुल सिंह सिंह के दुन्नेके, मोगा, गुरपिंदर सिंह के लुधियाना सिटी, कौशल के नाहरपुर रुपा, गुरुग्राम, नीरज भवाना के गांव भवाना, दिल्ली, सुनील मान के ताजपुर कलां, दिल्ली, अमित डागर के नाहरपुर रुपा, गुरुग्राम और भूपिंदर सिंह के डेराबस्सी (मोहाली) में रेड की गई थी।

टेरर फंडिंग कर यूथ को जोड़ना मकसद
7 अगस्त को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज केस के मुताबिक गैंग मेंबर्स वसूली, धमका कर, ड्रग स्मगलिंग, गैरकानूनी हथियारों को बेच कर फंड जुटा सकते हैं। इस फंड का आतंकी गतिविधियों में प्रयोग किए जाने समेत युवाओं की गैंग में भर्ती के लिए रकम का इस्तेमाल हो सकता है। इससे इनकी आतंकी गतिविधियां बढ़ेंगी।

केंद्र ने पाया था कि इस प्रकार का क्राइम NIA एक्ट, 2008 के तहत आता है। क्राइम की गंभीरता को देखते हुए और इसके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय तार जुड़ते देख केस की जांच NIA को सौंप दी गई थी। संतोष कुमार मीना, IPC को केस के चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर(CIO) जिम्मा सौंपा गया था।