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दलीलें नामंजूर:तलाक में गुजारा भत्ता मांगने पर महिला को बतानी होगी अपनी वित्तीय स्थिति, अगर छुपाई तो कार्रवाई

चंडीगढ़7 महीने पहलेलेखक: ललित कुमार
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हाईकोर्ट ने दलीलों को नामंजूर किया। - Dainik Bhaskar
हाईकोर्ट ने दलीलों को नामंजूर किया।

पति के साथ तलाक की मांग को लेकर याचिका के विचाराधीन रहते मेंटेनेंस अथवा गुजारा करने के लिए खर्च दिए जाने की मांग संबंधी महिला प्रोफेसर की याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने किसी भी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया है।

जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने फैसले में कहा कि मेंटेनेंस का दावा कर रहे हैं तो फाइनेंशियल स्टेटस भी बताना होगा। कोर्ट से यदि इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया जाएगा तो फिर आपराधिक कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

अंबाला की फैमिली कोर्ट ने इंक्वायरी के आदेश दिए
अंबाला की फैमिली कोर्ट ने इस मामले में जानकारी छिपाने पर महिला प्रोफेसर के खिलाफ इंक्वायरी के आदेश दिए थे। फैमिली कोर्ट ने इस मामले में चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में अलग से शिकायत देने के भी आदेश दिए थे। फैमिली कोर्ट के 13 अक्टूबर 2021 के आदेशों के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इन्हें खारिज किए जाने की मांग की थी।

यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर होने की जानकारी नहीं दी
याचिका में कहा गया कि उसकी शादी 24 मार्च 2010 को अंबाला में हुई थी। शादी से एक लड़की भी पैदा हुई। जून 2017 में याची महिला ने अपने पति व उसके परिवार के खिलाफ दहेज की मांग को लेकर पुलिस में शिकायत भी दी थी। दोनों ने अलग रहने के चलते तलाक की मांग की। याचिका के विचाराधीन रहते महिला ने आय का कोई साधन ना होने का हवाला देते हुए मेंटेनेंस राशि दिए जाने की मांग की। फैमिली कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान यह बात सामने आई कि महिला एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम कर रही है और उसे 28 हजार रुपए मासिक वेतन मिल रहा है।

हाईकोर्ट ने दलीलों को नामंजूर किया
महिला की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि फैमिली कोर्ट में केस दायर करने से पहले वह असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत नहीं थी। ऐसे में फैमिली कोर्ट द्वारा इंक्वायरी संबंधी आदेश खारिज किए जाएं। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को नामंजूर करते हुए कहा कि महिला चाहती तो केस के दौरान यह जानकारी दे सकती थी लेकिन इसे जानबूझकर छुपाया गया। क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान इस बात का खुलासा हुआ। ऐसे में हाईकोर्ट इस मामले में कोई राहत नहीं देगा।

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