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चंडीगढ़ में हरियाणा विधानभवन बनाने का विरोध:IIA ने प्रस्ताव को शहर के मास्टर प्लान का उल्लंघन बताया, कहा- चंडीगढ़ में हो जाएंगे 2 'सिर'

चंडीगढ़6 महीने पहले
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हरियाणा विधान सभा।   (फाइल) - Dainik Bhaskar
हरियाणा विधान सभा। (फाइल)

हरियाणा सरकार द्वारा चंडीगढ़ में विधान भवन बनाने की योजना को शहर के मास्टर प्लान की स्पष्ट उल्लंघना बताया गया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA) चंडीगढ़ चैप्टर ने इसका विरोध जताया है।

चंडीगढ़-पंजाब चैप्टर के पूर्व चेयरपर्सन सुरिंदर बाहगा ने कहा कि चंडीगढ़ की प्लानिंग करने वाले फ्रैंच आर्किटेक्ट ली कॉर्बूजिए ने चंडीगढ़ प्लान की तुलना मानव संरचना से की थी। इस प्लान के मुताबिक मोजूदा सचिवालय, हाईकोर्ट और असेंबली हॉल के साथ बना कैपिटल कॉम्प्लेक्स मानव शरीर का ‘सिर’ है। अगर हरियाणा नया असेंबली हॉल जोड़ देगा तो यह चंडीगढ़ में दो सिर होने के समान होगा।

बाहगा ने कहा कि शहर की सीमा के भीतर अलग-अलग स्थानों पर अलग विधानसभा बनाने का प्रस्ताव मूल ली कॉर्बूजिए प्लान और चंडीगढ़ के संशोधित मास्टर प्लान का पूर्ण तौर पर उल्लंघन है। गृह मंत्रालय, पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों समेत यूटी प्रशासक को पत्र लिख इस योजना को रोकने की मांग की गई है।

बाहगा ने कहा कि यह शहर नियोजन की कॉर्बूजिए की अवधारणा को नष्ट कर देगा। चंडीगढ़ का मास्टर प्लान मूल रूप से स्विटजरलैंड के फ्रैंच आर्किटेक्ट ली कॉर्बूजिए द्वारा तैयार किया गया था। जिसका तत्कालीन पंजाब सरकार ने पूरी तरह से पालन किया था। उसके बाद संशोधित चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 चंडीगढ़ के अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट द्वारा तैयार किया गया था।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर चंडीगढ़ में हरियाणा विधान भवन के लिए जगह देखते हुए। (फाइल)
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर चंडीगढ़ में हरियाणा विधान भवन के लिए जगह देखते हुए। (फाइल)

जारी पत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित इमारत शहर के मास्टर प्लान का स्पष्ट उल्लंघन है। वहीं इससे चंडीगढ़ की छवि भी प्रभावित होगी। आईआईए चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन एसडी सिंह ने कहा है कि प्रशासन को अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।

खट्टर दौरा कर चुके हैं, प्रशासन से बातचीत जारी

18 दिन पहले ही हरियाणा विधान भवन के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने चंडीगढ़ प्रशासन के अफसरों के साथ साइट्स का दौरा किया था। इस दौरान कलाग्राम के पास मनीमाजरा में खाली पड़ी 55 एकड़ की जमीन सरकार को विधानसभा भवन के लिए भाई थी। इसमें से सरकार को 10 एकड़ जमीन भवन के लिए चाहिए।

चंडीगढ़ के प्रशासक बीएल पुरोहित ने कहा है कि चंडीगढ़ से लगती पंचकूला (हरियाणा) की जमीन कीमत के हिसाब से एक्सचेंज की जा सकती है। ऐसे में हरियाणा सरकार को अलग से कुछ नहीं देना होगा। सुखना लेक या आईटी पार्क से लगती पंचकूला की कुछ जमीन चंडीगढ़ को मिल सकती है। दरअसल, हरियाणा सरकार की चंडीगढ़ प्रशासन के अफसरों के साथ तीन सप्ताह पूर्व एक बैठक हुई थी। इस दौरान तीन साइट्स पर सहमति बनी थी, जिनमें से एक में हरियाणा भवन बनाया जा सकता है।

जिन तीन साइट़्स पर गौर किया गया था, उनमें रेलवे चौक से आईटी पार्क की तरफ जाते वक्त मुख्य सड़क से दाएं तरफ की जमीन, मध्य मार्ग पर कलाग्राम के सामने मनीमाजरा की तरफ खाली जमीन और राजीव गांधी आईटी पार्क के पास खाली पड़ी जमीन शामिल है। केंद्र की दखल के बाद चंडीगढ़ प्रशासन हरियाणा को अलग विधानसभा बिल्डिंग के लिए जमीन देने को राजी हो गया था।

विधानसभा के बड़े हिस्से पर पंजाब का अवैध कब्जा!

हरियाणा ने लगभग 9 महीने पूर्व अपने नए विधान भवन के लिए केंद्र सरकार से 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री खट्‌टर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि वर्ष 2026 के प्रस्तावित परिसीमन में हरियाणा में विधायकों की संख्या 126 हो सकती है। हरियाणा के 55 साल में अभी तक उसे विधानसभा की इमारत के बंटवारे के अनुसार तय हिस्सा नहीं मिला है। हरियाणा विधानसभा के बड़े हिस्से पर पंजाब ने अवैध कब्जा किया हुआ है।

कमरों में कमरे निकाल बिठाने पड़ रहे कर्मी

वहीं कहा गया था कि हरियाणा विधानसभा सचिवालय में करीब 350 कर्मचारी सेवारत हैं, लेकिन इनके बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। विधानसभा में एक कमरे में तीन से चार शाखाओं को समायोजित किया गया है और कुछ कमरों में केबिन बनाकर 7-7 प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। हरियाणा विधानसभा के मौजूदा भवन के अलावा एक नई बिल्डिंग बनाने के लिए पर्याप्त जगह आवंटित करना जरूरी हो गया है। कम से कम 10 एकड़ भूमि नए हरियाणा विधान भवन के लिए उपलब्ध करवाए जाने की मांग की गई थी।