प्रदर्शन / प्राइवेट स्कूल द्वारा दो महीने की फीस जमा करवाने के खिलाफ उतरे पेरेंट्स, बोले-‘फीस तब से-स्कूल जब से’

Parents descended against private school for depositing fee for two months
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Parents descended against private school for depositing fee for two months

  • एकेएसआईपीएस सेक्टर-45 के बाहर किया प्रदर्शन, पुलिस के समझाने पर भी नहीं बन सकी बात, दो गज दूरी भी भूल गए

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:49 AM IST

चंडीगढ़. ‘फीस तब से-स्कूल जब से’ यह स्लोगन पेरेंट्स का रहा। मौका था अजीत कर्म सिंह इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल (एकेएसआईपीएस) सेक्टर-45 के बाहर पेरेंट्स के प्रोटेस्ट का। दो महीने की फीस 31 मई तक जमा करवाने के खिलाफ शनिवार को पेरेंट्स स्कूल के बाहर एकत्र हुए। पेरेंट्स ने नारेबाजी की और कहा कि जब लॉकडाउन में स्कूल खुले ही नहीं तो फिर वह फीस किस बात की दें। जब स्कूल खुल जाएंगे और हमारे बच्चे स्कूलों में जाना शुरू कर देंगे तो हम फीस भी दे देंगे। मौके पर पुलिस भी आई और पेरेंट्स को समझाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी।

ऑनलाइन के नाम पर भेजते फोटो

पेरेंट्स ने कहा कि स्कूल प्रशासन ने ऑनलाइन टीचिंग के नाम पर पेरेंट्स के वॉट्सएप नंबर पर फोटोज़ भेजीं। यह फोटोज वह रही जो पिछले साल किसी स्टूडेंट ने काम किया होगा उसे फोटो खिंचकर भेज दिया क्योंकि बुक्स वही रहती हैं इसलिए वही मैटर हमें भेज दिया गया।
लॉकडाउन के बाद फीस लेने को तैयार

स्कूल प्रिंसिपल जैसमीन कालरा नेे कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में हम पेरेंट्स के साथ हैं। हमने आज उनसे मीटिंग की और यह ऑफर दे दी है कि अगर प्रॉब्लम है तो लाॅकडाउन के बाद अप्रैल के बाद के महीनों की फीस को किश्तों में दे सकते हैं या फिर अप्रैल और मई की फीस एक साथ न देकर एक-एक महीना करके दे दें। इसके उलट पेरेंट्स हमें यह कह रहे हैं कि वह लॉकडाउन की फीस देना ही नहीं चाहते और यह मुमकिन ही नहीं है।

स्कूल ने किया मेंटली हैरास ताकि सैलरी न देनी पड़े, टीचर ने की शिकायत

प्राइवेट स्कूल पेरेंट्स से दो महीनों की फीस मांग रहे हैं तो दूसरी ओर टीचर्स को मेंटली हैरास किया जा रहा है। हैरासमेंट इस कदर है कि टीचर को नौकरी तक छोड़नी पड़ रही है। यह मामला रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर 27 में सामने आया है। स्कूल टीचर नीरू मलिक ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी है। टीचर ने स्कूल को लीगल नोटिस दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि 30 दिनों के अंदर अगर उनके सर्विस बेनिफिट उन्हें नहीं दिए गए तो वह स्कूल के खिलाफ कार्रवाई करेंगी।

  • स्कूल ने मुझे मेंटली और साइकोलॉजिकली हैरास किया और मजबूरी में मुझै रिजाइन देना पड़ा। स्कूल गैर कानूनी ढंग से चल रहा है क्योंकि यहां पर सिर्फ भावी टीचर्स को ट्रेनिंग दी जा सकती है लेकिन यहां स्टूडेंट्स भी पढ़ रहे हैं। मैंने इसकी शिकायत चंडीगढ़ प्रशासन व केंद्र सरकार के ऑफिसर में भी की है। नीरू मलिक, टीचर, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-27
  • नीरू मलिक जो आरोप लगा रही हैं वह पूरी तरह से गलत हैं और हमें बदनाम करने की साजिश है। हमने तो ऐसा कुछ नहीं किया और लॉकडाउन में स्कूल बंद है। हमारी उनसे कोई बात नहीं हुई और उन्हें कुछ नहीं कहा गया न ही नौकरी छोड़ने को बोला। हमें उनकी ओर से कोई शिकायत तक नहीं मिली है। लखविंदर सिंह, डायरेक्टर, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-27

कॉर्डिनेटर के तौर पर कर रही थी काम

टीचर नीरू मलिक ने अपनी शिकायत मे कहा है कि वह पिछले 8 साल से स्कूल में लगातार काम कर रही थीं। नीरू के पास स्कूल कॉर्डिनेटर का काम था। शिकायत में लिखा गया है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद हुए तो स्कूल प्रशासन ने नीरू से काम वापस लेना शुरू कर दिया और ऐसी कंडीशंस लगाई जिसे कि कानूनों को तोड़ने पर ही पूरा किया जा सकता है। स्कूल ने 3-4 महीने की सैलरी बचाने के लिए ऐसा कर दिया। शिकायत में लिखा कि नीरू ने कई बार स्कूल प्रशासन को कॉल की लेकिन उनकी कॉल्स व मैसेजेस का जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में नीरू के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया और स्कूल की एरोगेंस और अनैतिक व्यवहार के चलते उन्हें मजबूरी में स्कूल से रिजाइन देना पड़ा।

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