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लापरवाही:पिता के अंतिम संस्कार का हक भी पीजीआई ने छीना, बदल दी लाश

चंडीगढ़18 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • हार्टअटैक से हुई थी व्यक्ति की मौत, कोरोना मरीज बताकर रेडक्रॉस से करवा दिया संस्कार
  • जांच में पाई पीजीआई कर्मियों की लापरवाही, केस दर्ज करने के लिए मांगी कानूनी राय

जान बचाने वाले पीजीआई के जूनियर कर्मियों की लापरवाही से एक पूरा परिवार सदमे में है और छवि पीजीआई की खराब हो रही है। कारण है न सिर्फ लाश बदलना, बल्कि उसका लावारिसों की तरह संस्कार तक करवा देना। पहले लगे इन आरोपों पर पहले पीजीआई पर्दा डालने पर लगा रहा।

खैर अब पुलिस की जांच में सब सामने आ चुका है, जिसके बाद अब पीजीआई के कर्मियों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करना चाह रही है। इसके लिए एसएसपी ऑफिस फाइल भेज कर कानूनी राय ली जा रही है,कि इस तरह की लापरवाही पर क्या क्रिमिनल कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। इसी हफ्ते इस पर एसएसपी अपनी कानूनी राय देंगे।

पुलिस जांच में पता चला कि पीजीआई के रिकाॅर्ड के मुताबिक भोला सिंह का संस्कार तो 17 अक्टूबर की शाम को रेडक्रास के कर्मियों ने कर भी दिया है। फिर पता चला कि भोला सिंह समझकर हरजिंदर के पिता बलविंदर सिंह का संस्कार कर दिया गया है। जिसके बाद हरजिंदर ने इसकी शिकायत पहले पीजीआई को दी। पीजीआई ने मामले पर पर्दा डाले रखा। जिसके बाद हरजिंदर ने इसकी जांच पुलिस को दी।

पुलिस ने जांच के बाद पाया कि पीजीआई के दो जूनियर टैक्नीशियन, मॉर्चरी इंचार्ज की लापरवाही से सारा मामला हुआ और अब उन पर केस दर्ज करने की तैयारी है।

2 जूनियर टैक्नीशियन, मॉर्चरी इंचार्ज की लापरवाही से हुआ यह सब

मेरे पिता का संस्कार तक करने का अधिकार मुझे नहीं दिया। मुझे कई दिन झूठ बोलते रहे कि पिता का शव मिसिंग है और तलाश रहे हैं। झूठी आस दी। फिर लापरवाही करके उनके पिता का शव बदलवा दिया और लावारिस समझ कर उसका संस्कार भी करवा दिया। इस पर मैंने पुलिस को शिकायत दी है।
-हरजिंदर सिंह, मृतक का बेटा

यह है मामला

मामला 17 अक्टूबर का है। उस वक्त कोविड पीक पर शहर में था और किसी में दहशत थी। बताया गया कि 17 अक्टूबर को पटियाला के बख्शीवाला मोहल्ला निवासी हरजिंदर सिंह अपने 65 साल के पिता बलविंदर सिंह को दिल का दौरा पड़ने के कारण पीजीआई लेकर आया। पीजीआई इमरजेंसी से उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में शिफ्ट कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बलविंदर सिंह का शव देने से पीजीआई ने इनकार कर दिया। कहा कि पहले उनके शव का कोरोना टेस्ट होगा, उसके बाद अगर कोरोना टेस्ट नेगेटिव होगा, तभी शव परिजनों को सौंपा जाएगा। अगले दिन 18 को बलविंदर शाम को शव लेने आ गया, उन्हें पीजीआई से फोन आया कि शव का कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया है, इसलिए अब आप शव घर ले जा सकते हैं।

जब पीजीआई की मॉर्चरी से शव ले जाने लगे, तो शव पूरी तरह पैक था। हरजिंदर ने अपने पिता का चेहरा देखना चाहा, तो पता चला कि लाश उसके पिता की नहीं बल्कि किसी भोला सिंह की थी। जो कोरोना पेशेंट था। इसके बाद उन्होंने अपने पिता की लाश मांगनी चाही। मॉर्चरी में तब 17 शव पड़े थे। सबकी चेकिंग की, लेकिन उनके पिता का शव नहीं मिला।

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