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खेल-खेल में:सेनेटाइजर और अन्य एहतियातों के साथ प्रैक्टिस में जुटे खिलाड़ी, गलव्स पहन कर हो रही है प्रैक्टिस

चंडीगढ़4 महीने पहले
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  • अब बैडमिंटन में एक-दूसरे का रैकेट और वेटलिफ्टिंग आदि में रॉड, वेट काे एक्सचेंज नहीं कर रहे हैं खिलाड़ी

(गौरव भाटिया) स्पोटर्स स्टेडियम सेक्टर-42 में टेनिस और वेटलिफ्टिंग, सेक्टर 38 के स्पोटर्स कॉम्पलैक्स में बैडमिंटन, सीएलटीए सेक्टर-10 में टेनिस और सेक्टर 34 के स्पोटर्स कॉम्पलेक्स में टेबल टेनिस शुरू हो गया है। हालांकि ज्यादातर जगहों पर अभी उन प्लेयर्स को बुलाया जा रहा है जो स्टेट या फिर नेशनल लेवल पर खेल चुके हैं। कोरोना की वजह से प्लेयर्स को काफी एहतियात बरतने पड़ रहे हैं।
बैडमिंटन के कोच सुरेंद्र महाजन ने बताया कि प्लेयर्स से कहा गया है कि एक से ज्यादा बैडमिंटन साथ लेकर जाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि प्लेयर्स काे इंस्ट्रक्शंस दी हैं कि कोई एक-दूसरे का रैकेट एक्सचेंज नहीं करेगा। खेलते हुए अगर रैकेट की तारें टूट जाएं तो जो दूसरा रैकेट घर से लाए हैं उसका इस्तेमाल करें वरना प्रैक्टिस के बीच में ही घर जाना होगा। खेलने से पहले हर एक शटल को सेनेटाइज किया जाता है।

प्रैक्टिस के दौरान वेटलिफ्टिंग राॅड नहीं होती एक्सचेंज
वेटलिफ्टिंग कोच करणवीर सिंह बुट्टर ने बताया कि रॉड के हिसाब से ही वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस करवाई जाती है। इसका मतलब यह है कि एक रॉड और उसके साथ के वेट यानी पूरा सेट जब कोई एक प्लेयर इस्तेमाल करता है तो दूसरा नहीं लेता। सभी रॉड्स और वेट्स को सेनेटाइज किया जाता है। 

एक हाथ में ग्लव्स डालना कंप्लसरी..टेबल टेनिस के कोच गुरप्रीत सिंह ने बताया कि राइट हैंड प्लेयर्स के लिए कंपल्सरी है कि प्रैक्टिस के दौरान उन्हें अपने लेफ्ट हैंड में कॉटन के ग्लव्स डालकर रखने हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि बॉल को बार-बार टच करना पड़ता है और ग्लव्स रहेंगे तो सेफ्टी रहती है। इसके अलावा प्लेयर्स शूज का एक जोड़ा एक्सट्रा लेकर आते हैं। जो जूते डालकर आते हैं उससे ग्राउंड में फिटनेस में करते हैं और इसके बाद जो जूते साथ में लाते हैं उसे डालकर कॉम्पलैक्स के अंदर आकर प्रैक्टिस करते हैं।

लॉन टेनिस में सर्विस और रिसिविंग में तालमेल..लॉन टेनिस के कोच प्रवीण शर्मा और शुभम कंबोज ने कहा कि हम एक समय में एक कोर्ट में सिर्फ दो प्लेयर्स को ही प्रैक्टिस करवा रहे हैं। मैच नहीं लगवाते बल्कि कोर्ट में एक तरफ का प्लेयर सर्विस करता है और दूसरा रिसिविंग पर रहता है। यानी एक प्लेयर लगातार सर्विस ही करवाता जाएगा ताकि कोर्ट में मौजूद उसके सामने के प्लेयर को सिर्फ बॉल को रिसीव करना है और बॉल टच नहीं करनी। दूसरे दिन सर्विस वाला प्लेयर रिसिविंग पर आ जाएगा और रिसिविंग वाला सर्विस पर।

क्या कहते हैं अलग-अलग खेलों के पदक विजेता

  • मैं अपने गांव में चली गई थी लेकिन वहां पर ज्यादा फायदा नहीं मिल रहा था। कॉम्पलेक्स खुले तो मैं वापस आ गई क्योंकि मुझे लगा कि अब मैं अपने फिटनेस लेवल को दोबारा हासिल कर सकती हूं। वीरजीत कौर, गोल्ड मेडेलिस्ट, खेलो इंडिया यूथ गेम्स
  • पहले घर पर ऑनलाइन ट्रेनिंग हो रही थी लेकिन उसका कोई खास फायदा नहीं मिल पा रहा था। अब कॉम्पलेक्स में शुरू हुआ है तो बेहतर है। मॉर्निंग में रनिंग, स्ट्रेंथ को बढ़ाने का काम होता है और शाम को वेट की ट्रेनिंग। आदित्य नारंग, सिल्वर मेडेलिस्ट, सब जूनियर नेशनल
  • लाॅकडाउन में घर पर प्रेक्टिस करते थे लेकिन कोई खास फर्क नहीं पड़ता था लेकिन अब कॉम्पलेक्स में आ गए हैं ताकि जल्द अपने फिटनेस लेवल को अचीव करने का टारगेट तय किया है। आर्यन ठाकुर, ब्रॉन्ज मेडेलिस्ट, स्कूल नेशनल्स
  • पहले मैट पर एक्सरसाइज करता था और टैरेस पर प्रेक्टिस करता था लेकिन अब कॉम्पलेक्स में आकर वॉर्मअप कर रहे हैं ताकि बॉडी वापस रिदम में आ जाए। संयम मदान, ब्रॉन्ज मेडेलिस्ट, डीएवी नेशनल्स

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