इंटरनल मेमो से PM की सुरक्षा में चूक का खुलासा:ADGP ने 3 बार डायवर्जन प्लान बनाने को कहा, चन्नी सरकार की पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया

चंडीगढ़5 महीने पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे में सुरक्षा में चूक को लेकर चन्नी सरकार अब इंटरनल सिक्योरिटी मेमो से ही घिर गई है। पंजाब के ADGP लॉ एंड ऑर्डर ने तीन बार चन्नी सरकार को किसानों के धरने से रोड ब्लॉक होने के बारे में चेताया था। पुलिस को डायवर्जन प्लान बनाने के लिए कहा गया था। 1, 3 और 4 जनवरी को यह निर्देश भेजे गए थे, लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

पहला मेमो: एडवांस रूट अरेंजमेंट्स प्लानिंग करें
1 जनवरी को भेजे इंटरनल मेमो में कहा गया था कि 5 जनवरी को बारिश की संभावना की वजह से CM और दूसरे VIPs सड़क मार्ग से आ सकते हैं। खासकर चंडीगढ़ से फिरोजपुर सेक्टर का इस्तेमाल हो सकता है। इसके लिए एडवांस में रूट अरेंजमेंट्स की प्लानिंग करने को कहा गया था।

दूसरा मेमो: प्रदर्शनकारी रूट ब्लॉक न करें, एडवांस में वैकल्पिक रूट बनाएं
इसके बाद 3 जनवरी को एक और इंटरनल मेमो भेजा गया था। जिसमें कहा गया कि फिरोजपुर में गन्ने के खेत, नहर और ट्यूबवैल हैं। यहां पर भी पुलिस फोर्स की तैनाती के बारे में विचार किया जाए। इसमें यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया था कि प्रदर्शनकारी रैली का रूट ब्लॉक न करें।

एडवांस में वैकल्पिक रूट बनाएं। इसके अलावा राष्ट्रविरोधी तत्वों, टिफिन बम, ग्रेनेड, IED की फोटो भी गजेटेड अफसरों को देने को कहा गया था, ताकि वे अपने कर्मचारियों को इसे दिखा सकें। रूट पर पुलिसकर्मियों के ग्रुप और मोबाइल टीमों के रूप में तैनाती के लिए कहा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर वह जाम को हटा सकें।

तीसरा मेमो: रोड ब्लॉक हो सकता है, डायवर्जन प्लान तैयार रखें
PM की विजिट से 24 घंटे पहले 4 जनवरी के इंटरनल मेमो में ADGP ने निर्देश दिया था कि किसानों की मूवमेंट पर पूरी नजर रखें। उन्हें किसी भी तरह से फिरोजपुर रैली को बाधित न करने दिया जाए। इसमें यह भी कहा गया था कि धरने की वजह से रोड ब्लॉक हो सकता है। इसलिए एडवांस में जरूरी ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार करें।

CM चन्नी बोले- PM ने अचानक रूट बदला, लेकिन अपने अफसरों के निर्देश नहीं माने
इस मामले में CM चरणजीत चन्नी कहते रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को हवाई मार्ग से जाना था। अचानक उन्होंने रोड से जाने का प्लान बना लिया। हालांकि, सवाल यह है कि उनके ही अफसर की तरफ से 3 बार वैकल्पिक रूट बनाने की वॉर्निंग को क्यों नजरअंदाज किया गया। यह चेतावनी खराब मौसम और रैली में एक लाख की भीड़ होने के तर्क के आधार पर जारी की गई थी। इसके बावजूद न तो अफसरों ने ट्रैफिक के निर्देश माने और न ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की।

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