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करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू नहीं:तारों को अंडरग्राउंड करने का काम बिजली निजीकरण ने रोका

चंडीगढ़2 महीने पहलेलेखक: राजबीर सिंह राणा
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पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेक्टर 8 की बिजली वायर 30 अप्रैल तक अंडर ग्राउंड हो जाएंगी। लेकिन पूरे शहर की बिजली वायर अंडर ग्राउंड और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने का 2773 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सकेगा। कारण प्रशासन ने 100 फीसदी बिजली डिस्ट्रिब्यूशन प्राइवेटाइज करने का टेंडर लगाया हुआ है।

टेंडर प्रोसेस में है। अब शहर की बिजली की तारें अंडर ग्राउंड करने का काम इस टेंडर में आने वाली कंपनी ही करवाएगी। इस काम को करवाने की एवज में कंपनी शहर वासियों पर अतिरिक्त खर्च भी डाल सकती है। प्रशासन ने शहर के हर सेक्टर की बिजली वायर अंडरग्राउंड करवाने और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने के लिए गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की आईपीडीएस स्कीम के तहत 2773 करोड़ की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई थी। तीन साल पहले प्रशासन ने इस प्रपोजल को मिनिस्टरी ऑफ पावर को भेजा था। वहां से अप्रूव भी हो चुकी थी। इस प्रोजेक्ट पर प्रशासन को अपना शेयर 70 फीसदी देना था जबकि बाकी शेयर मिनिस्टरी ऑफ पावर की आईपीडीएस स्कीम के तहत मिलना था।

इसकी फंडिंग प्रशासन को सेक्टर के हिसाब से किस्त वाइज होनी थी जिससे उतने ही एरिया में प्रशासन द्वारा टेंडर लगाकर अंडर ग्राउंड वायर का काम करवाया जाता । साथ ही उस सेक्टर या एरिया का बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करवाया जाता । बिजली प्राइवेटाइज होने पर शहर की बिजली सप्लाई लाइनें ऐसे ही ओवर हेड लटकती रहेंगी।पीक आवर्स में ओवर लोड होकर टूटती रहेंगी। प्रशासन बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड करवाने पर 2773 करोड़ खर्च नहीं करेगा। इस काम को प्राइवेट कंपनी अपने स्तर पर करवाने के लिए कंज्यूमर पर अतिरिक्त खर्चा भी डाल सकती हैं। इसके लिए शहर वासियों को तैयार रहना होगा। सेक्टर 8 में बिजली तार अंडर ग्राउंड और इंफ्रस्ट्रक्चर अपग्रेड करने का काम 30 अप्रैल तक होगा कंप्लीट: सेक्टर 8 की बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड करने का काम भनवारिया इंफ्रा कंपनी द्वारा 17 करोड़ 54 लाख से करवाया जा रहा है।

सेक्टर की बिजली की तारों को 70 किलोमीटर अंडर ग्राउंड किया जा चुका है। अब सेक्टर में कोई भी बिजली की तार बाहर नजर नहीं आएगी। दो पोल पर लगे ट्रांसफार्मर की जगह कॉम्पेक्ट ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 11 केवीए सब स्टेशन का इंफ्रास्ट्रक्चर भी अपग्रेड किया जा रहा है। स्ट्रीट लाइट के पोल पर स्टील के लगेंगे।

लगाया जा चुका है टेंडर
प्रशासन के चीफ इंजीनियर कम स्पेशल सेक्रेटरी सीबी ओझा का कहना है कि शहर की बिजली की तारों को अंडर ग्राउंड करने का मिनिस्टरी ऑफ पावर का आईडीपीएस के तहत प्रोजेक्ट था। उसके तहत प्रशासन का मिनिस्टरी से 30 फीसदी फंड मिलता जबकि बाकी का प्रशासन द्वारा खर्च किया जाता। अब बिजली को निजीकरण करने का टेंडर लगाया जा चुका है। अब बिजली तारों को अंडर ग्राउंड करवाने का काम प्राइवेट कंपनी ही करवाएगी।

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