• Hindi News
  • Local
  • Chandigarh
  • Protest By Chandigarh Punjabi Forum Over Denial Of First Language Status To Punjabi Language In Chandigarh,Symbolically 100 People Gathered At Sector 25 Rally Ground.

पंजाबी भाषा को पहला दर्जा दिलाने के लिए रोष धरना:सेक्टर 25 रैली ग्राउंड में सांकेतिक तौर पर इकट्‌ठा हुए 100 लोग;प्रशासन नहीं जगा तो आने वाले दिनों में संघर्ष होगा और तेज

चंडीगढ़4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
रोष धरने को संबोधित करने वालों में लेखक, बुद्धिजीवी और पेंडु विकास के लोग शामिल थे। - Dainik Bhaskar
रोष धरने को संबोधित करने वालों में लेखक, बुद्धिजीवी और पेंडु विकास के लोग शामिल थे।

यूटी के तौर पर चंडीगढ़ का गठन एक नवंबर को हुआ था। तब बिना किसी नोटिफिकेशन या नियम के पंजाबी भाषा को चंडीगढ़ की भाषाओं से हटा दिया गया था। तभी से चंडीगढ़ पंजाबी मंच और अलग-अलग साहित्य संगठन इस भाषा को इसकी मूल पहचान दिलाने का संघर्ष कर रहा है।

शनिवार को सेक्टर 25 के रैली ग्राउंड में इसे लेकर सांकेतिक रोष धरना हुआ जिसमें 100 के करीब साहित्यकार और बुद्धीजीवि पहुंचे। उनका कहना था कि ये सब अफसरों का किया हुआ है। अपनी सहूलियत के लिए उन्होंने अंग्रेजी भाषा को नंबर एक पर रख लिया और पंजाबी भाषा का नामोनिशान मिटा दिया। जबकि चंडीगढ़ पंजाब का ही हिस्सा था और पंजाब की राजधानी भी है।

गुरप्रीत सिंह सोमल ने कहा कि देश के 29 राज्यों में कहीं भी अंग्रेजी को प्रशासनिक भाषा नहीं बनाया गया है, पर चंडीगढ़ के दफ्तरों में अंग्रेजी ही इस्तेमाल होती है। अंग्रेजी का इस्तेमाल तो संविधान की उल्लंघना है। वे बोले- पंजाबी बोली के साथ पिछले कई साल से धक्का किया जा रहा है। पंजाब का हिस्सा होने के बावजूद चंडीगढ़ से पंजाबी गांवों,पंजाबी लोगों को उजाड़ा गया। उनकी जमीनें ले ली गईं और पंजाबी भाषा को ही यहां से धक्का दे दिया गया।

उन्होंने कहा कि हम आज धरना इसलिए दे रहे हैं ताकि चंडीगढ़ के दफ्तरों में पंजाबी भाषा को पहली भाषा बनाया जाए। लोगों के साथ न्याय हो। वे बोले- अभी ये धरना सांकेतिक तौर पर दिया है। अगर प्रशासन ने कुछ नहीं किया तो आने वाले समय में संघर्ष और तेज होगा और शहर में एक बड़ा इकट्‌ठ होगा। हम ऐसी रणनीति तैयार करेंगे कि चंडीगढ़ प्रशासन को झुकना पड़े।

रोष धरने को संबोधित करने वालों में लेखक, बुद्धिजीवी और पेंडु विकास के लोग शामिल थे। उनका कहना था कि जिस दिन यूटी का गठन हुआ, उस दिन पंजाबी मातृभाषा का कत्ल हो गया।अफ्सरों के लिए ये बेशक खुशी का दिन होगा। लेकिन पंजाबी भाषा से जुड़े हर शख्स के लिए यह किसी काले दिवस से कम नहीं। इसलिए चंडीगढ़ पंजाबी मंच और करीब 8 समूह सहयोगी संगठन रोष कर रहे है।

खबरें और भी हैं...