पंजाब यूनिवर्सिटी / पीयू में बढ़ेगी 5 से 7.5 फीसदी तक फीस, सिंडिकेट में आ रहा प्रस्ताव

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  • प्रेसिडेंट और सीनेटर ने दिया था डायसेंट, इकोनॉमी की हालत देखते हुए फीस बढ़ाना ठीक नहीं

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस के विभिन्न डिपार्टमेंट में इस बार फीस पांच से लेकर 7.5 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है। ये प्रस्ताव 30 मई को होने जा रही सिंडिकेट की मीटिंग में आने वाला है। इस मुद्दे पर बनी कमेटी की मीटिंग ऑफिशिएटिंग वाइज चांसलर और डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. शंकर जी झा की अध्यक्षता में 20 फरवरी को हुई थी जिसके मिनट्स के साथ सिंडीकेट के सामने फीस बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखा जाने वाला है। इस सूचना के मिलते ही स्टूडेंट्स संगठन नाराज हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन के कारण इकोनॉमी की बुरी हालत है। कारोबार खत्म हैं और लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी को इस बढ़ौतरी के प्रस्ताव को रोक देना चाहिए।
मीटिंग के दौरान स्टूडेंट काउंसिल के प्रेसिडेंट चेतन चौधरी और सीनेटर प्रभजीत सिंह ने अपना विरोध जताया था। उन्होंने मीटिंग के दौरान अपना डायसेंट लिखवाया और फीस बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव का विरोध किया। सभी फाइनेंस कोर्सेज में 5 फीसदी और अन्य कोर्सेज में 7.5 फीसदी तक बढ़ोत्तरी किए जाने का प्रस्ताव है। न्यूनतम बढ़ोत्तरी 500 रूपये और अधिकतम बढ़ोत्तरी 75 सौ रुपए की होगी। ये बढ़ोत्तरी नए स्टूडेंट्स पर ही लागू होगी। पीयू ने पिछले साल से ही योजना शुरू की है कि वह कोर्स की ड्यूरेशन की पूरी फीस घोषित करते हैं।

पिछले कुछ सालों से यूनिवर्सिटी लगातार फीस बढ़ाती आ रही है। सीनेट ने सिर्फ़ 2 फीसदी फीस हर साल बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अब यह बढ़ोतरी 5 से 10 फीसदी के बीच हो रही है। एफडीओ विक्रम नैयर, प्रो रजत संधीर, डीएसडब्ल्यू प्रो इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो नीना कपिलाश और आईएएस ट्रेनिंग सेंटर से डॉ दिनेश कुमार वाली इस कमेटी की मीटिंग के दौरान ही काउंसिल प्रेसिडेंट चौधरी और सेक्रेटरी तेगबीर सिंह का सवाल था कि जब यूनिवर्सिटी पिछले 2 साल से फीस बढ़ाती आ रही है तो उस हिसाब से स्टूडेंट्स के लिए सुविधाएं कहां पर बढ़ाई गई हैं।

  • पीयू को इस प्रस्ताव को वापस लेना चाहिए। लॉकडाउन के कारण लोग इस स्थिति में नहीं हैं कि मौजूदा फीस ही दे सकें। बढ़ी हुई फीस देना तो और भी मुश्किल काम है। इसलिए ये प्रस्ताव वापिस लिया जाना चाहिए। निखिल नमरेता, एनएसयूआई

  • यूनिवर्सिटी का ये डिसिजन हैरान करने वाला है। एक ओर केंद्र सरकार राहत पैकेज दे रही है तो दूसरी ओर पीयू फीस बढ़ाने की कोशिश में है। ये डिसिजन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और स्टूडेंट्स एजिटेशन करेंगे। हरीश गुर्जर, एबीवीपी

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