• Hindi News
  • Local
  • Chandigarh
  • Punjab DGP Should Issue Orders To All His District Police Chiefs, SCST Act Should Not Be Filed At The Behest Of Third Party – High Court

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:SCST एक्ट में तीसरे पक्ष के कहने पर दर्ज न किया जाए केस; पंजाब DGP सभी जिला प्रमुखों को आदेश दें

चंडीगढ़7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

पंजाब के डीजीपी को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने SCST एक्ट को लेकर एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत कहा गया है कि तीसरे पक्ष के कहने पर एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज न की जाए। क्योंकि इससे एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। साथ ही आदेश दिया है कि वे अपने सभी जिला पुलिस प्रमुखों को यह आदेश जारी करें कि एससी-एसटी एक्ट में तीसरे पक्ष के कहने पर मामला दर्ज न किया जाए।

पीड़ित पक्ष की शिकायत के बिना स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले तीसरे पक्ष की शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज होना ठीक नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा है कि कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस संबंध में पंजाब के डीजीपी को सभी जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से लगाई थी गुहार
मामला जालंधर के एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। इसमें माता-पिता ने अपने बेटे को बेदखल कर दिया था। क्योंकि बेटे ने इसी वर्ष अनुसूचित जाति की लड़की से विवाह कर लिया था। विवाह के बाद कथित रूप से बेटे ने एक ऑडियो वायरल की थी और बताया था कि उसके माता-पिता ने उसकी पत्नी की जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

इसके बाद खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले तीन लोगों की शिकायत पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। याची दंपति ने हाईकोर्ट को बताया कि यह तीनों किसी भी प्रकार से पीड़ित की परिभाषा में नहीं आते हैं। एससी-एसटी एक्ट के अनुसार, केवल पीड़ित व्यक्ति ही शिकायत दे सकता है। पीड़ित की परिभाषा में उसके रिश्तेदार, कानूनी अभिभावक और कानूनी उत्तराधिकारी शामिल हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता की बहू ने नहीं की थी कोई शिकायत
सुनवाई के दौरान जिस महिला के बारे में टिप्पणी का आरोप था और सरकारी वकील, दोनों ने माना कि याची की बहू ने इस बारे में शिकायत नहीं दी थी। तब हाईकोर्ट ने कहा कि तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसलिए हाईकोर्ट पंजाब के डीजीपी को आदेश देती कि वह सभी जिलों के एसएसपी को आदेश जारी करें कि तीसरे पक्ष के कहने पर एफआईआर दर्ज न की जाए। यदि आरोपों में सत्यता लगे तो पहले जिला अटॉर्नी से राय ली जाए कि क्या एससी-एसटी एक्ट का मामला बनता है या नहीं?

खबरें और भी हैं...