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रणजीत ब्रह्मपुरा की घर वापसी:अकाली दल में हुए शामिल, सुखबीर ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया; BJP से गठजोड़ करने पर ढींढसा का साथ छोड़ा

चंडीगढ़9 महीने पहले
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अकाली दल में शामिल होने पर ब्रह्मपुरा का आशीर्वाद लेते सुखबीर बादल। - Dainik Bhaskar
अकाली दल में शामिल होने पर ब्रह्मपुरा का आशीर्वाद लेते सुखबीर बादल।

अकाली दिग्गज रहे रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने आज घर वापसी कर ली है। चंडीगढ़ में पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल की मौजूदगी में वह शिअद(संयुक्त) छोड़ अकाली दल में शामिल हो गए। इस मौके ब्रह्मपुरा ने प्रकाश सिंह बादल के साथ बिताए समय को भी याद किया। सुखबीर ने भी ब्रह्मपुरा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के साथ बिताए पलों को याद करते ब्रह्मपुरा
पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के साथ बिताए पलों को याद करते ब्रह्मपुरा

गौरतलब है कि रणजीत ब्रह्मपुरा ने सुखबीर के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए ही अकाली दल छोड़ी थी। जिसमें कई आरोप भी लगाए थे। जिसके बाद ढींढसा के साथ मिलकर शिअद संयुक्त बनाई थी। हालांकि अब ढींढसा के भाजपा के साथ गठजोड़ के विरोध में वह अकाली दल में लौट रहे हैं।

ब्रह्मपुरा का जाना कैप्टन और भाजपा के लिए भी झटका साबित होगा।
ब्रह्मपुरा का जाना कैप्टन और भाजपा के लिए भी झटका साबित होगा।

प्रकाश सिंह बादल के साथी थे दिग्गज ब्रह्मपुरा

पंजाब में जब तक अकाली दल को पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल चलाते रहे तो कई वरिष्ठ नेता उनके साथ डटे रहे। हालांकि जैसे ही अकाली दल में सुखबीर बादल का दबदबा बढ़ता गया तो वरिष्ठ अकाली नेता नाराज होने लगे। प्रकाश सिंह बादल के साथ रणजीत ब्रह्मपुरा और सुखदेव ढींढसा भी दिग्गज अकाली नेता था। हालांकि सुखबीर से नाराज होकर वह बागी हो गए। जिसके बाद उन्होंने अलग पार्टी बना ली थी।

पहले ही जता दी थी नाराजगी

रणजीत ब्रह्मपुरा ने कुछ दिन पहले ही शिअद (संयुक्त) के प्रधान सुखदेव ढींढसा के भाजपा से गठजोड़ को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि पंजाब में भाजपा के खिलाफ माहौल बना हुआ है। किसान आंदोलन भले खत्म हो गया हो, लेकिन उसमें हुई मौतों को लेकर नाराजगी फैली हुई है। इसलिए भाजपा से गठजोड़ करना उचित नहीं। इसके बावजूद ढींढसा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। जिस पर ब्रह्मपुरा ने सवाल उठाए थे।

भाजपा और कैप्टन के लिए झटका

इसे भाजपा और कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए भी झटका माना जा रहा है। वह अकाली दल के टूटे ग्रुप ढींढसा और ब्रह्मपुरा के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहते थे। हालांकि अब उनके हिस्से सिर्फ ढींढसा ही आएंगे क्योंकि ब्रह्मपुरा अकाली दल में जा रहे हैं। वहीं, भाजपा के लिए यह निराशाजनक रहेगा क्योंकि उनके साथ कांग्रेस के दिग्गज आ रहे हैं, लेकिन एक अकाली दिग्गज ने गठबंधन न कर अपनी ही पार्टी का साथ छोड़ दिया।

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