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'वन टिकट-वन फैमिली' पर कांग्रेस में घमासान:दो सांसदों के बेटों पर सवाल; पंजाब CM के भाई समेत 2 सीटों पर रिश्तेदार निर्दलीय कूदे

चंडीगढ़7 महीने पहलेलेखक: मनीष शर्मा
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कांग्रेस की 'वन टिकट-वन फैमिली' पर घमासान मच गया है। कांग्रेस ने विधायकों के रिश्तेदारों को इस पॉलिसी में फंसा लिया। अब वही सवाल उठा रहे हैं कि कांग्रेस ने 2 सांसदों के बेटों को टिकट क्यों दी? इसका असर यह हुआ कि 3 विधानसभा क्षेत्रों के रिश्तेदार निर्दलीय लड़ने के लिए खड़े हो गए हैं। जिनमें 2 ने तो ऐलान कर दिया है। इनमें सबसे बड़ा नाम कांग्रेसी CM चरणजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह का है। अब बटाला सीट पर भी बगावत के आसार हैं। कांग्रेस ने 86 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। जिसके बाद से ही बगावत हो रही है।

सिद्धू ने सांसद के बेटे को टिकट दिलवाई, चन्नी भाई को नहीं दिला सके
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इन सांसदों के बेटों को दी टिकट

  • चौधरी संतोख सिंह: चौधरी जालंधर लोकसभा सीट से कांग्रेसी सांसद हैं। कांग्रेस ने उनके बेटे विक्रम चौधरी को फिल्लौर विधानसभा क्षेत्र से टिकट दे दी है।
  • डॉ. अमर सिंह : पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से सांसद हैं। कांग्रेस ने उनके बेटे कामिल अमर सिंह को रायकोट से टिकट दी है।
सांसद पिता चौधरी संतोख सिंह के साथ फिल्लौर से टिकट पाने वाले विक्रम चौधरी।
सांसद पिता चौधरी संतोख सिंह के साथ फिल्लौर से टिकट पाने वाले विक्रम चौधरी।

अब पढ़िए.. किन सीटों पर मचा घमासान

  • बस्सी पठाना : यहां से सीएम चरणजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह ने दावा ठोका था। उन्होंने सीनियर मेडिकल अफसर की नौकरी तक छोड़ दी। अब कांग्रेस ने वहां से सिटिंग MLA गुरप्रीत जीपी को टिकट दे दी। अब डॉ. मनोहर निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।
  • सुल्तानपुर लोधी : कांग्रेस सरकार में मंत्री राणा गुरजीत सिंह यहां से अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे। कांग्रेस ने राणा को कपूरथला से टिकट दे दी और सुल्तानपुर लोधी से सिटिंग एमएलए नवतेज चीमा को टिकट दे दी। अब राणा के बेटे राणा इंद्रप्रताप ने आजाद लड़ने का ऐलान कर दिया है।
  • बटाला : यहां से मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा लड़ने के इच्छुक थे लेकिन कांग्रेस ने उन्हें फतेहगढ़ चूड़ियां से टिकट दी है। बाजवा यहीं से विधायक हैं। अब वह बटाला के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। जहां से नवजोत सिद्धू अश्वनी शेखड़ी के हक में डटे हुए हैं। बाजवा का कहना है कि समर्थक कह रहे हैं कि वह बटाला से खुद लड़ें या परिवार के किसी सदस्य को लड़ाएं।

पारिवारिक सदस्यों की वजह से नेता भी मुश्किल में
चुनाव लड़ने की जिद को लेकर पारिवारिक सदस्यों की वजह से नेता भी मुश्किल में हैं। सबसे बड़ा सवाल CM चरणजीत चन्नी पर है। जिन्हें कांग्रेस ने इतनी बड़ी कुर्सी पर बिठाया। टिकट बंटवारे में भी वह शामिल हैं। ऐसे में उनका भाई ही बागी होकर लड़ा तो मुश्किल हो जाएगी। इसी तरह मंत्री राणा गुरजीत के बेटे के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उन पर आरोप लग रहे हैं। 4 कांग्रेसी विधायकों ने तो सोनिया गांधी को इसकी शिकायत तक भेज दी है।

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