एजुकेशन डिपार्टमेंट को शिकायत / टीचर ने स्कूल को दिया लीगल नोटिस, डायरेक्टर ने कहा- यह हमें बदनाम करने की साजिश

नीरू ने अपनी  शिकायत में लिखा है कि यह स्कूल असलीयत में एक लैबोरेटरी स्कूल है और इसमें भावी टीचर्स की ट्रेनिंग हो सकती है लेकिन स्कूल कमर्शियली चलाया जा रहा है यानी कि स्कूल में स्टूडेंट्स को नहीं पढ़ाया जा सकता। यह शिकायत नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन नई दिल्ली को भी की है। नीरू ने अपनी शिकायत में लिखा है कि यह स्कूल असलीयत में एक लैबोरेटरी स्कूल है और इसमें भावी टीचर्स की ट्रेनिंग हो सकती है लेकिन स्कूल कमर्शियली चलाया जा रहा है यानी कि स्कूल में स्टूडेंट्स को नहीं पढ़ाया जा सकता। यह शिकायत नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन नई दिल्ली को भी की है।
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नीरू ने अपनी  शिकायत में लिखा है कि यह स्कूल असलीयत में एक लैबोरेटरी स्कूल है और इसमें भावी टीचर्स की ट्रेनिंग हो सकती है लेकिन स्कूल कमर्शियली चलाया जा रहा है यानी कि स्कूल में स्टूडेंट्स को नहीं पढ़ाया जा सकता। यह शिकायत नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन नई दिल्ली को भी की है।नीरू ने अपनी शिकायत में लिखा है कि यह स्कूल असलीयत में एक लैबोरेटरी स्कूल है और इसमें भावी टीचर्स की ट्रेनिंग हो सकती है लेकिन स्कूल कमर्शियली चलाया जा रहा है यानी कि स्कूल में स्टूडेंट्स को नहीं पढ़ाया जा सकता। यह शिकायत नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन नई दिल्ली को भी की है।

  • टीचर नीरू मलिक 8 साल से स्कूल में कॉर्डिनेटर का काम कर रही थीं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 01:00 PM IST

चंडीगढ़. (गौरव भाटिया). टीचर्स को सैलरी देने के नाम पर शहर के प्राइवेट स्कूल पेरेंट्स से दो महीनों की फीस मांग रहे हैं। दूसरी तरफ टीचर्स को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। ऐसे में कई टीचर्स को अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ रही है। यह मामला रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-27 में सामने आया है। स्कूल टीचर नीरू मलिक ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट और चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी है। टीचर ने स्कूल को लीगल नोटिस दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 30 दिनों के अंदर अगर उनके सर्विस बेनिफिट उन्हें नहीं दिए गए तो वह स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी।

कॉर्डिनेटर के तौर पर कर रही थी काम

टीचर नीरू मलिक ने अपनी शिकायत मे कहा, वह पिछले 8 साल से स्कूल में लगातार काम कर रही थीं और उनके पास स्कूल कॉर्डिनेटर का काम था। लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद हुए तो स्कूल प्रशासन ने उनसे काम वापस लेना शुरू कर दिया और ऐसी कंडीशंस लगाई, जिसे कि कानूनों को तोड़ने पर ही पूरा किया जा सकता है। स्कूल ने 3-4 महीने की सैलरी बचाने के लिए ऐसा कर दिया। शिकायत में लिखा कि नीरू ने कई बार स्कूल प्रशासन को कॉल लगाया, लेकिन उनकी कॉल्स व मैसेजेस का जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में उन्हें मजबूरी में स्कूल से रिजाइन देना पड़ा।

कोट्स

स्कूल ने मुझे मेंटली और साइकोलॉजिकली हैरास किया और मजबूरी में मुझे रिजाइन देना पड़ा। स्कूल गैर कानूनी ढंग से चल रहा है, क्योंकि यहां पर सिर्फ भावी टीचर्स को ट्रेनिंग दी जा सकती है, लेकिन यहां स्टूडेंट्स भी पढ़ रहे हैं। मैंने इसकी शिकायत चंडीगढ़ प्रशासन व केंद्र सरकार के ऑफिसर में भी की है।
नीरू मलिक, टीचर, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-27

नीरू मलिक जो आरोप लगा रही हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं और हमें बदनाम करने की साजिश है। हमने तो ऐसा कुछ नहीं किया और लॉकडाउन में स्कूल बंद है। हमारी उनसे कोई बात नहीं हुई और उन्हें कुछ नहीं कहा गया न ही नौकरी छोड़ने को बोला। हमें उनकी ओर से कोई शिकायत तक नहीं मिली है।
लखविंदर सिंह, डायरेक्टर, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-27

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