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मौत वाले दिन सिप्पी को लेने थे कैमरे:CCTV खरीदने के लिए 33 हजार रुपए लेकर निकला था, इसकी भी एक खास वजह थी

बृजेन्द्र गौड़/चंडीगढ़3 महीने पहले
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सीबीआई की जांच में सामने आया है कि सिप्पी सिद्धू अपने मोहाली स्थित घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाना चाहता था। सेक्टर 52 में एयर कंडीशनिंग मैकेनिक का काम करने वाला गुरमीत सिंह 2014 में सिप्पी से उसके फेज 8, इंडस्ट्रियल एरिया ऑफिस में मिला था। 18 से 20 सितंबर तक वह सिप्पी के संपर्क में था।

सिप्पी अपने घर में सीसीटीवी कैमरा लगवाना चाहता था, इसलिए सिप्पी 20 तारीख को गुरमीत के साथ मिल सीसीटीवी कैमरे खरीदना चाहता था। उसी दिन उसकी हत्या हो गई। इन्हीं कैमरों के लिए उसकी जेब में 33, 230 रुपए की रकम थी। इन तीन दिनों में कल्याणी से सिप्पी का सेक्टर 27 में मिलने का सीबीआई ने दावा किया था।

सिप्पी की हत्या से लगभग महीना भर पहले 17 अगस्त, 2015 को 3 से 4 संदिग्ध युवक सिप्पी के मोहाली स्थित घर के बाहर एक छोटी कार में आए थे। वह एक काले रंग का पाउच छोड़ गए थे, जिसमें एक स्पाइरल डायरी थी। इसमें सिप्पी समेत भूपिंदर सिंह उर्फ युवराज नामक व्यक्ति का नाम, पता और मोबाइल नंबर था।

इस डायरी में 7 जुलाई, 2015 की एक तारीख u/s 302 भिवानी, दिनेश और एक मोबाइल नंबर भी लिखा हुआ था। सीबीआई ने इस एंगल पर भी जांच बढ़ाई थी, मगर कुछ हाथ नहीं लगा। ऐसे में सिप्पी ने अपने घर के बाहर सुरक्षा और चौकसी के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरे लगवाने की सोची थी।

सिप्पी के इंसाफ के लिए शहर में कैंडल मार्च से लेकर पैदल मार्च तक हुआ था।
सिप्पी के इंसाफ के लिए शहर में कैंडल मार्च से लेकर पैदल मार्च तक हुआ था।

20 मिनट लग गए थे पुलिस जिप्सी को मौके पर आने में

सेक्टर 27 बी की कोठी नंबर 1001 के विक्रम नागपाल और विशाल नागपाल अपने घर में मौजूद थे। इसी घर के पास पार्क में सिप्पी पर गोलियां चली थीं। इन्होंने 20 सितंबर को रात करीब 9.30 बजे पहले दो गोलियों की आवाज सुनी और उसके चंद सेकेंड में दो और गोलियां चलती सुनीं। उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति पार्क में गिरा पड़ा है। उन्होंने पीसीआर को घटना की सूचना दी थी। लगभग 20 मिनट में पुलिस मौके पर पहुंची।

कातिल बचाव में एक और जान ले सकता था

कोठी नंबर 1015 के राजनबीर सिंह लाश से कुछ ही मीटर दूर अपनी कोठी में थे। उन्होंने अपने घर की बांउड्री की दीवार के पास पार्क में गोली चलने की आवाज सुनी। जब वह दीवार के पास पहुंचे तो दो और गोलियां चलने की आवाज सुनी। एक 5'7 हाइट का आदमी दीवार के पास से निकल रहा है। उसने वॉकिंग ट्रैक पर रुक कर पीछे राजनबीर की तरफ देखा। राजनबीर डर कर अपनी दीवार के पास आंगन में घुटनों के बल बैठ गए।

उनकी पत्नी अमृता सिंह उस समय फर्स्ट फ्लोर पर थी। उन्होंने भी गोलियों की आवाज और एक लड़की के चीखने की आवाज सुनी। करीब 26-27 साल की लड़की पार्क से निकल उनके घर के गेट के बाहर स्ट्रीट लाइट के नीचे खड़ी छोटी कार में ड्राइविंग सीट पर बैठकर पूर्व दिशा में चली गई। उस लड़की का कंप्यूटराइज्ड स्कैच भी बनाया गया था।

हाईकोर्ट जज की बेटी कल्याणी सिंह मामले में आरोपी बनाई गई है।
हाईकोर्ट जज की बेटी कल्याणी सिंह मामले में आरोपी बनाई गई है।

क्या सिर्फ धमकाने आए थे हमलावर

अनट्रेस रिपोर्ट में घटना के दो चश्मदीद हैं। वह दंपति हैं। एक ने आदमी और एक ने लड़की देखी। पत्नी ने गोलियां चलने के बाद लड़की के चीखने की आवाज भी सुनी। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई किसी की सुनियोजित तरीके से हत्या करने आएगा तो वह पक्का मन बना कर आएगा। लड़की की चीख मारना इशारा करता है कि हमलावार शायद सिप्पी को धमकाने आए हों और आपस में बहस के बाद तैश में आकर गोलियां मार सिप्पी की हत्या कर दी गई हो। ऐसे में लड़की घबरा गई हो और चीख मार भाग निकली हो।

यह है मामला

बता दें कि मोहाली फेज 3बी2 के सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी सिद्धू (35) की हत्या मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की महिला जज की बेटी कल्याणी सिंह को सीबीआई ने पकड़ा था। सेक्टर 26 थाने में दर्ज केस की जांच परिवार की मांग पर जनवरी 2016 में सीबीआई को दी गई थी। 13 अप्रैल, 2016 को केस दर्ज कर सीबीआई ने 6 साल बाद कल्याणी को 15 जून को गिरफ्तार किया।

इससे पहले सबूतों के अभाव में दिसंबर 2020 को अनट्रेस रिपोर्ट दायर की गई थी। सिप्पी राष्ट्रीय स्तर का शूटर और एडवोकेट था। कल्याणी और सिप्पी का परिवार पुराना जानकार था। दोनों का रिश्ता शादी तक जाने से पहले ही टूट गया। सिप्पी ने कल्याणी की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल कर दी थी। वहीं कल्याणी सिप्पी की गर्लफ्रेंड्स के चलते भी उससे परेशान थी। परिवारों में दूरियां आ गई।

6 दिन के रिमांड के बावजूद सीबीआई न तो कल्याणी का कबूलनामा करवा पाई है और न ही कोई रिकवरी हुई है। कल्याणी चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में है। वह सेक्टर 42 पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज में असिस्टेंट लेक्चरर थी।