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आंगनबाड़ी वर्कर का हल्ला बोल:मंत्री के साथ मीटिंग के बाद धरना समाप्त, घरों को लौटीं आंगनबाड़ी वर्कर, एक महीने में CM का हस्ताक्षरयुक्त पत्र मिलेगा

चंडीगढ़5 दिन पहले
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पंचकूला सेक्टर-5 में चल रहा आंगनबाड़ी वर्कर का धरना समाप्त हो गया। मंत्री कमलेश ढांडा के साथ मीटिंग के बाद धरना समाप्त करने की घोषणा हुई। यूनियन की महासचिव अनुपमा ने बताया कि धरना समाप्त हो गया। राज्य प्रधान कमला को 4 महीने पहले बर्खास्त किया था, अब उसे जॉइन करवाने का आश्वासन दिया है। कैथल का धरना जारी रहेगा। आंगनबाडी विभाग को एनजीओ के अधीन नहीं किया जाएगा, मांगों को पूरी करवाने की बात मंत्री ने मानी। हालांकि अभी लिखित में नहीं दिया। इसी महीने सीएम मनोहर लाल के हस्ताक्षर करवाकर दिया जाएगा।

इससे पहले आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार पूरी रात हाउसिंग बोर्ड चौक पर प्रदर्शन किया। वर्करों ने रात भी वहीं पर ही गुजारी। सुबह 9:00 बजे पुलिस ने वर्कर को बसों में बैठाकर सेक्टर-5 के धरनास्थल पर पहुंचाया।आंगनबाड़ी वर्करों को मंत्री के साथ मीटिंग करवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद कुछ आंगनबाड़ी वर्कर पैदल भी धरनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने हाउसिंग बोर्ड चौक से बैरिकेड्स हटाकर रास्ता चालू करने की प्रकिया शुरू कर दी है। बता दे कि मांगों को लेकर प्रदेश की आंगनबाडी कार्यकर्ता और हेल्परों ने पूरा दिन बुधवार को पंचकूला में सड़कों पर प्रदर्शन किया।

पंचकूला में धरने पर बैठीं आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर।
पंचकूला में धरने पर बैठीं आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर।

मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं उठीं

बुधवार रात 10 बजे महिला बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने वर्कर यूनियन के प्रधान से बातचीत में कहा कि वीरवार को सीएम के साथ मीटिंग करवा दी जाएगी। इसलिए मंत्री ने कैंट में रहने की व्यवस्था की है। परंतु आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों ने इनकार कर दिया। वर्करों ने कहा कि वे सड़क पर ही रात गुजारेंगी। मंत्री ने कहा कि बीमार हो जाएंगी, उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। इस पर वर्करों ने सड़क पर ही रात गुजारने का फैसला लिया। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

बुधवार को दिन भर का घटनाक्रम

सुबह प्रदेश से हजारों वर्कर और हेल्पर ने पहले शालीमार माल ग्रांउड पर इकट्ठे होकर हाउसिंग बोर्ड चौक की ओर कूच किया। चंडीगढ़ मुख्यमंत्री के निवास पर कूच करने से पहले ही पुलिस ने चौक पर आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों को रोक लिया। प्रशासन का एक प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए आया और मांगों पर विचार करने के लिए 15 दिन का समय मांगा। आंगनबाड़ी वर्कर ने 15 दिन का समय देने से मना कर दिया। इसके बाद वर्करों ने पंचकूला और चंडीगढ़ की बाउंड्री पर हाउसिंग बोर्ड चौक पर जाम लगा दिया। रात को धरने से पंचकूला में सेक्टर 17 और 18 की लाइट से ट्रेफिक रूट डायवर्ट किया गया। इससे कि पंचकूला से चंडीगढ़ जाने और आने वाले वाहन चालकों को जाम की समस्या झेलनी पड़ी।

आंगनबाड़ी वर्करों को बस में पंचकूला धरने पर पहुंचाया गया।
आंगनबाड़ी वर्करों को बस में पंचकूला धरने पर पहुंचाया गया।

सरकार ने जो जिम्मेदारी दी, उसे निभाया

आंगनबाड़ी वर्करों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 02 अक्तूबर 1975 को सरकार ने समेकित बाल विकास विभाग का गठन किया और इस नींव को मजबूत करते हुए आंगनबाड़ी का नाम दिया। इन महिलाओं ने 46 साल में सरकार ने जो भी जिम्मेदारी सौंपी, उसे बड़े उत्साह से करके सरकार को दिखाया। गर्भवती महिलाओं व छोटे बच्चों, आप की बेटी हमारी बेटी के फार्म हड़ताल के कारण अधूरे पड़े हैं। सरकार वैसे तो महिलाओं का आदर करती है, लेकिन सरकार वर्कर व हेल्पर महिलाओं को महिला नहीं मानती। मांग पूरी तो दूर की बात सरकार बातचीत करने में भी गुरेज कर रही है। धरने के दौरान एक वर्कर व एक हेल्पर का निधन हो गया। उनकी भी कोई सुनवाई नहीं हुई ।