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आईडीबीआई बैंक के साथ फ्रॉड का मामला:बैंक के साथ 17 करोड़ की ठगी कर न्यूजीलैंड भागे पति-पत्नी; सीबीआई ने गृह मंत्रालय के जरिए कोर्ट ने भेजे नोटिस

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: रवि अटवाल
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तीन साल पहले आईडीबीआई बैंक के साथ 17 करोड़ 29 लाख रुपए की ठगी का केस दर्ज हुआ - Dainik Bhaskar
तीन साल पहले आईडीबीआई बैंक के साथ 17 करोड़ 29 लाख रुपए की ठगी का केस दर्ज हुआ
  • आरोपियों की कंपनी ने बैंक से कर्जा लेकर नहीं लौटाया, गिरवी रखी प्रॉपर्टी भी किसी और को बेच दी

तीन साल पहले आईडीबीआई बैंक के साथ 17 करोड़ 29 लाख रुपए की ठगी का केस दर्ज हुआ था। उस मामले की जांच सीबीआई कर रही है लेकिन अभी तक कोर्ट में इस केस का ट्रायल शुरू नहीं हो पा रहा है। वजह ये है कि इस केस में मुख्य आरोपी अंकुश सूद और उसकी पत्नी सलोनी सूद न्यूजीलैंड भाग गए हैं। इन्हें अब वापस इंडिया लाने और कोर्ट में पेश करने के लिए सीबीआई की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इन दोनों आरोपियों को उनके न्यूजीलैंड के एड्रेस पर नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय के जरिए न्यूजीलैंड में काउंसलेट ऑफ इंडिया को नोटिस भेजे हैं। हालांकि उसका कोई जवाब नहीं मिला है, इसलिए सीबीआई ने गृह मंत्रालय को रिमाइंडर भी भेजा है। अब मामले की सुनवाई 13 मई को होगी। अगर अब भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुए तो सीबीआई उन्हें भगौड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

सीबीआई ने 12 जुलाई 2018 को आईडीबीआई, सेक्टर-17 के डीजीएम जितेंद्र सिंह की शिकायत पर एसएस टेक्नो कंसल्ट प्राइवेट लिमिटेड, अनन्या पॉलीपैक्स प्राइवेट लिमिटेड, एएए, एडप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड, न्यूटाइम कॉन्ट्रैक्टर्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, अंकुश सूद, सलोनी सूद और संजीव भसीन के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज किया।

2009 में एसएस टेक्नो कंसल्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर अंकुश सूद और सलोनी सूद ने बैंक से 17 करोड़ की क्रेडिट फैसिलिटी ली थी। उन्होंने खरड़ और अमृतसर की प्रॉपर्टी को बैंक के पास मोर्टगेज(गिरवी) कर दिया था।

लेकिन बाद में कंपनी ने बैंक को उनका प्रिंसिपल अमाउंट और ब्याज देना बंद कर दिया। लिहाजा, बैंक ने 31 दिसंबर 2011 को कंपनी के लोन अकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया। इतना ही नहीं अंकुश सूद ने बैंक के पास गिरवी पड़ी प्रॉपर्टी को धोखे से किसी और बेच भी दिया था।

लोन के वक्त दिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स| अंकुश सूद ने 7 फरवरी 2009 को आईडीबीआई के डीजीएम के पास लोन के लिए अप्लाई किया था। ये लोन उन्होंने कंस्ट्रक्शन से संबंधित काम के लिए लिया था। जांच के दौरान पता चला कि अंकुश सूद ने लोन लेने के वक्त कंपनी के जो डॉक्यूमेंट्स जमा करवाए थे वे फर्जी निकले थे।

उन्होंने लोन के वक्त बैंक को सीए ज्ञानेंद्र कुमार का सर्टिफाई किया हुआ सीए सर्टिफिकेट दिया था, लेकिन जब ज्ञानेंद्र कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सर्टिफिकेट उन्होंने इश्यू नहीं किया था। कंपनी ने नेटवर्थ सर्टिफिकेट दिया था।

जिसमें अंकुश सूद की नेटवर्थ 1388.43 लाख रुपए और सलोनी सूद की नेटवर्थ 974.09 लाख रुपए दिखाई गई थी। लेकिन वह सर्टिफिकेट भी झूठा निकला। कंपनी ने एएमसी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के साथ एक एग्रीमेंट भी दिखाया था जिसमें लिखा था कि एएमसी कंपनी ने एसएस टेक्नो को 15 करोड़ रुपए की मशीनरी ट्रांसफर है, लेकिन जांच के दौरान ऐसी कोई मशीनरी नहीं मिली।

लोन का किया कहीं और इस्तेमाल

कंपनी को कुछ हाईवे की कंस्ट्रक्शन के लिए बैंक ने कर्जा दिया था। लेकिन इस लोन का अंकुश सूद ने गलत इस्तेमाल किया। उसने लोन अमाउंट में से 1 करोड़ 19 लाख रुपए तो अपने सेल्फ चेक से कैश निकलवा लिए थे। करीब 4.59 करोड़ रुपए अपनी अन्य कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए और उसका इस्तेमाल उन कंपनियों के पुराने लोन चुकाने में किया। 1.93 करोड़ रुपए का गबन अंकुश सूद ने न्यूटाइम कांट्रेक्टर्स कंपनी के डायरेक्टर संजीव भसीन के साथ मिलकर किया।

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