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वो रात एक नया उजाला लेकर आई:व्हीलचेयर पर स्टार पैरालंपियन दीपा मलिक के 21 साल पूरे, अपनी नई लाइफ को बताया यादगार

चंडीगढ़एक वर्ष पहले
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  • कहा व्हीलचेयर पर मुझे नया जन्म मिला और इससे मैं स्ट्रॉन्ग हो सकी, मुझे इससे मेरे जीव का उद्देश्य और दिशा मिली
  • 2016 रियो पैरालंपिक में दीपा ने देश को सिल्वर मेडल दिलाया, इस मेडल का इंतजार काफी सालों से हो रहा था

पैरालंपिक में देश को मेडल दिलाने वाली पहली एथलीट दीपा मलिक को व्हीलचेयर पर 21 साल पूरे हो गए हैं और वे आज भी उस दिन को याद करती हैं जब उनके स्पाइन कॉर्ड से ट्यूमर को निकाला गया था। दीपा ने कहा कि वो अंधेरी रात मेरे जीवन का सबसे अच्छा सूर्योदय लेकर आई, नया उजाला लेकर आई। उन्होंने याद करते हुए बताया कि 3 जून 1999 को उनके स्पाइनल कॉर्ड से ट्यूमर को रिमूव किया गया था। डॉक्टर्स ने उन्हें बताया था कि उनकी बचने की संभावनाएं काफी कम थीं और वे कमर के निचले हिस्से से पैराडाइज भी हो सकती थीं।  पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया की प्रेसिडेंट दीपा मलिक ने कहा कि वो रात मेरे लिए सबसे कठिन थी और सबसे अंधेरी भी। 21 साल पहले 3 जून 1999 को डॉक्टर्स ने मुझे बताया कि वे रीढ़ की हड्डी से ट्यूटर को हटाने के लिए मुझे लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं वहां पर अपनी जान गंवा सकती हूं और अगर जिंदा रही तो छाती के निचले हिस्से से पैराडाइज हो सकती हूं। दीपा की जगह पर कोई और शक्स होता तो वो उम्मीदों को खो देता लेकिन दीपा मलिक बेहद पॉजिटिव थीं।

उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा अपनी एबिलिटी पर फोकस किया न कि डिसएबिलिटी पर, मैंने अपनी लाइफ को पूरी तरह से एंजॉय किया। वो अंधेरी रात मेरे लिए लाइफ का सबसे अच्छा सूर्योदय लेकर आई। व्हीलचेयर पर मुझे नया जन्म मिला और इससे मैं स्ट्रॉन्ग हो सकी। मुझे इससे मेरे जीव का उद्देश्य और दिशा मिली। भारत की स्टार पैरा एथलीट दीपा मलिक ने अपनी नई लाइफ के 21 फोटो शेयर किए।

खेल रत्न भी मिला

2016 रियो पैरालंपिक में दीपा मलिक ने देश को सिल्वर मेडल दिलाया। इस मेडल का इंतजार काफी सालों से हो रहा था। मेडल के बाद उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दीपा देश के टॉप एथलीट्स में शामिल हैं। व्हीलचेयर पर रहने के बाद भी वे थकी नहीं और कई इंटरनेशनल मेडल उन्होंने जीते। 2011 आईपीसी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने एफ 52-53 कैटेगरी में शॉटपुट मेडल हासिल किया था। 

3 जून को जश्न मनाते हैं
दीपा ने कहा कि मैं 3 जून को हमेशा सेलिब्रेट करती हूं और उन लोगों के साथ जश्न मनाती हूं जिन्होंने इस सफर के दौरान मेरा साथ दिया। मैं इस दिन काे ‘डे ऑफ ग्रैटिट्यूड’ के रूप में मनाती हूं। 3 जून का दिन मेरा अपना दिन होता है। मेरे लिए ये 21 साल शानदार रहे और मैंने पूरी तरह से इस टाइम को एंजॉय किया है। अभी तक का सफर अच्छा रहा और अभी मुझे मीलों दूर जाना है, बिना सोए और बिना थके। 
पैरा एशियन में चार मेडल
दीपा एफ 52-53 कैटेगरी में खेली हैं। इसमें छाती से नीचे का हिस्सा काम नहीं करता है और सिर्फ हाथ ही यूज किए जा सकते हैं। उनका ट्रंक फंक्शन या तो नहीं होता या बेहद कम होता है। दीपा ने एशियन पैरा गेम्स में चार मेडल जीते हैं। 2010 में उन्होंने जैवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज जीता जबकि 2014 में उन्हें सिल्वर मिला। इसके बाद 2018 में उन्होंने जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में दो ब्रॉन्ज जीते। दीपा रेड द हिमालय मोटो-स्पोर्ट्स इवेंट में भी हिस्सा ले चुकी हैं और 2012 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 

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