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बाल मन:छात्र का बाल संरक्षण आयोग को पत्र...बाल नहीं कटवाना चाहता हूं, स्कूल तंग कर रहा

चंडीगढ़3 महीने पहलेलेखक: मनोज कुमार
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दाे महीने की मेहनत के बाद बढ़े बालाें काे कटवाने के लिए जब स्कूल ने जाेर डाला ताे गुड़गांव के निजी स्कूल के एक छात्र ने राज्य बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिख दिया। आयाेग से अपने बालों की हिफाजत के लिए गुहार लगा बच्चे ने कहा कि स्कूल मैनेजमेंट उस पर दबाव बना रहा है लेकिन वह बाल नहीं कटवाना चाहता।

उसने आयोग को लिखा है कि अब 12वीं की बोर्ड परीक्षा है और मैनेजमेंट के दबाव की वजह से वह निराश है और पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसलिए उसकी मदद की जाए। गुड़गांव के 12वीं कक्षा के छात्र की ओर से मंगलवार को मेल के जरिए यह पत्र मिलने के बाद आयोग भी पूरे मसले को देखने में जुट गया है।

विद्यार्थी ने पत्र में लिखा है-मुझे बाल बड़े करने में 2 वर्ष का समय लगा है। मैं अपनी 2 साल की मेहनत से बढ़ाए बालों को क्यों काटूं। मैंने मैनेजमेंट को भी बता दिया कि मैं बाल क्यों नहीं कटाना चाहता हूं। बाल कटवाऊं या नहीं, यह मेरा मानवाधिकार है। मैं हेयर बैंड का इस्तेमाल कर सकता हूं।

बालों में रबड़ लगा सकता हूं। मैंने मैनेजमेंट को बताया तो मुझे अनुशासनहीन बताया गया। मेरे अभिभावकों को बुलाना शुरू किया गया। छात्र ने लिखा है कि बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया तब भी अभिभावकों को कहा गया कि इसके लिए दूसरा स्कूल देखें।

तर्क-नाखून काटने को बोलें तो समझ सकता हूं

छात्र ने लिखा है कि यदि नाखून काटने के लिए बोले तो मैं समझ सकता हूं कि इससे किसी को लग सकती है। लेकिन लड़कों के छोटे बाल रखने का कोई कारण नहीं है। समाज भी ऐसा मानता है कि लड़कों के छोटे और लड़कियों के बड़े बाल होने चाहिए। लेकिन यह सब जेंडर भेद करना है। कुछ माह बाद उसकी स्कूल की पढ़ाई पूरी हो जाएगी, कुछ समय के लिए इतनी मेहनत से बढ़ाए बाल क्यों कटवाऊं।

अभी इस मामले को देखा जा रहा है। स्कूल के नियम क्या है। कहीं कोई आस्था का मामला तो नहीं है। -ज्योति बैंदा, चेयरपर्सन, राज्य बाल संरक्षण आयोग

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