हाय वे:सुखबीर बादल ने प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन अमरिंदर सिंह को बताया किसानों का विरोधी

न्यू चंडीगढ़2 वर्ष पहले
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अकालीदल की ओर से किसान विधेयक के खिलाफ रोष मार्च निकाला गया, लेकिन यह प्रदर्शन आम जनता के लिए मुसीबत बन गया। अंबाला हाईवे पर हजारों गाड़ियां पूरा दिन जाम में फंसी रही। - Dainik Bhaskar
अकालीदल की ओर से किसान विधेयक के खिलाफ रोष मार्च निकाला गया, लेकिन यह प्रदर्शन आम जनता के लिए मुसीबत बन गया। अंबाला हाईवे पर हजारों गाड़ियां पूरा दिन जाम में फंसी रही।
  • किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करने पहुंचे शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर
  • चंडीगढ़-अंबाला हाईवे दोपहर से रात 10 बजे तक रहा ब्लॉक, लोग कई घंटे जाम में फंसे रहे

अकालीदल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की ओर से किसान विधेयक के खिलाफ रोष मार्च निकाला। लेकिन यह प्रदर्शन आम जनता के लिए मुसीबत बन गया। मुल्लांपुर और जीरकुपर से लेकर डेराबस्सी तक लंबा जाम लग गया। इससे हजारों लोग परेशान हुए। जो वैकल्पिक रास्ते थे, वहां भी जाम लग गया। पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर को चंडीगढ़ आकर राजभवन में ज्ञापन देने के लिए मार्च निकाला गया। ट्रैक्टर तथा गाड़ियों के काफिले का यह मार्च वीरवार रात 9 बजकर 20 मिनट पर चंडीगढ़ की सीमा पर स्थित मुल्लांपुर पहंुचा। यहां पर चंडीगढ़ पुलिस द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। सुखबीर बादल एक कैंटर पर बने मंच पर खड़े होकर आए और उन्होंने कुछ देर संबोधन किया।

इसी दौरान उनके साथ आए अकाली वर्कर उग्र होने लगे। भाषण के बाद सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया, बीबी जगीर कौर, प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा, मंजिदर सिंह सिरसा, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, गुलजार सिंह रणीके, हरजीत इंद्र सिंह ग्रेवाल, रणजीत सिंह गिल धरने पर बैठ गए और वर्करों को भी बैठने के लिए कहा।

इसी दौरान पुलिस पार्टी सुखबीर बादल को धरने से उठाकर ले गई, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड तोड़ने शुरू कर दिए। पुलिस ने रोकने के लिए पहले पानी की बौछारें की और फिर हल्का लाठीचार्ज कर सब को भगा दिया। चंडीगढ़ पुलिस सुखबीर बादल और अन्य नेताओं को पकड़कर थाने ले गई, जहां से देर रात उन्हें छोड़ दिया गया।

वहीं, दूसरी तरफ जीरकपुर में चंडीगढ़ बाॅर्डर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत काैर बादल ने धरना दिया। उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया। अकाली नेताओं को चंडीगढ़ सेक्टर-17 पुलिस स्टेशन में लाया गया था।

मोदी किसान विरोधी
सुखबीर ने कहा कि यह कानून किसान विरोधी है। वे राज्यपाल को चंडीगढ़ जाकर ज्ञापन देना चाहते हैं लेकिन उन्हें पंजाब की राजधानी में घुसने नहीं दिया जा रहा। कैप्टन अमरिंदर और पीएम किसान विरोधी हैं।

हफ्ते में दूसरी बार रोका हाईवे, हजारों लोगों को किया परेशान
अकालीदल की ओर से किसान विधेयक के खिलाफ रोष मार्च निकाला गया, लेकिन यह प्रदर्शन आम जनता के लिए मुसीबत बन गया। अंबाला हाईवे पर हजारों गाड़ियां पूरा दिन जाम में फंसी रही। इससे पहले 25 सितंबर को भी हाईवे पर ऐसा ही जाम लगाया गया था। उस समय किसान जत्थेबंदियों, अकाली वर्कर्स न प्रदर्शन कर रोड जाम कर दिया था।

नहीं बनाया गया था कोई वैकल्पिक रूट
जीरकपुर के रहने वाले संजीव शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन को पता था कि रैली के कारण ट्रैफिक जाम हो सकता है। इसके बाद भी नेशनल हाईवे के ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक रूट तय नहीं किए। हजारों लोगों को इस बात का गुस्सा रहा कि रैली करने वाले और प्रशासन में बैठे अधिकारियों के कारण पब्लिक परेशान हुई। चंडीगढ़ के हॉस्पिटल में तैनात व जीरकपुर में रहने वाले कुछ डाॅक्टर्स की बैरियर पर चंडीगढ़ और पंजाब पुलिस के बहस भी हुई।

प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा भीड़ के बीच जमीन पर गिरे, खालीस्तान के नारे लगे
मुल्लांपुर में सुखबीर बादल संबोधन के बाद अपने साथी नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे तो उन्होंने उसी समय पुलिस वाले वहां से उठाकर अपने साथ ले गए। इसके पीछे-पीछे अन्य नेताओं को ले जाया गया। जब चंदूमाजरा को ले जाया जा रहा था तो उनके साथ वर्कर भी जाने लगे। पुलिस ने वर्कर को रोकने का प्रयास किया तो वे चंदूमाजरा की तरफ बढ़े और चंदूमाजरा जमीन पर गिर गए।

उनके ऊपर कई वर्कर गिर गए। पुलिस ने चंदूमाजरा को संभाला। वहीं, बादल और अकाली नेताओं की गिरफ्तारी के बाद वर्कर काफी उग्र थे। एक फार्मा ट्रैक्टर पर चारा रखकर आए कुछ युवकों ने चंडीगढ़ पुलिस के सैकड़ों जवानों के सामने खालीस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। इसके साथ ही अन्य युवकों भी यही नारा लगाने लगे।

पंजाब पुलिस सीएम हाउस की सुरक्षा में लगी रही
पंजाब पुलिस के कुराली से लेकर चंडीगढ़ सीमा तक करीब 500 जवान तैनात थे। सिसवां टी-प्वाइंट पर जिले के सारे अधिकारी बैठे हुए थे। सिसवां से बद‌दी की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब 20 बैरिकेड्स लगाकर मार्ग को बंद किया हुआ था।, ताकि सिसवां स्थित सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की कोठी की ओर कोई न जा सके।

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