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चंडीगढ़ सेक्टर-37 में कोठी पर कब्जे का मामला:मुख्य आरोपी और पूर्व थाना प्रभारी की जमानत याचिका खारिज; फरार बिजनेसमैन ने भी किया सरेंडर

चंडीगढ़3 दिन पहले
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चंडीगढ़ में कोठी कब्जाने के मामले में मुख्य आरोपी थाना प्रभारी राजदीप  सिंह। - Dainik Bhaskar
चंडीगढ़ में कोठी कब्जाने के मामले में मुख्य आरोपी थाना प्रभारी राजदीप सिंह।

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में कोठी कब्जाने के मामले में बुधवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने बुडैल जेल में बंद मामले के मुख्य आरोपी पूर्व पत्रकार संजीव महाजन और सेक्टर-39 के तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपियों की जमानत याचिका सेशंस कोर्ट द्वारा खारिज की गई है। साथ ही इससे पहले भी जिला अदालत में मुख्य आरोपी संजीव महाजन सहित चंडीगढ़ पुलिस के डीएसपी रामगोपाल के भाई सतपाल डागर की जमानत याचिका को खारिज किया जा चुका है।

बता दें कि 2 अपैल को पुलिस ने सेक्टर-37 की कोठी हड़पने के मामले में सबसे पहले मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया था जिसके बाद संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल के भाई सतपाल डागर और फिर सेक्टर-39 थाने के पूर्व एसएचओ इंस्पेक्टर राजदीप सिंह को गिरफ्तार किया। सिंगला और कादियान ने सरेंडर किया था। शेखर, दलजीत सिंह, और अशोक अरोड़ा फरार चल रहे हैं। हालांकि अशोक अरोड़ा पिछले सप्ताह शिमला में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के सुरक्षाकर्मी शेरा की जन्मदिन की पार्टी में भी शामिल हो चुका है और उसकी एक फोटो वायरल हो चुकी है।

इस मामले में मुख्य आरोपी संजीव महाजन की तरफ से लगाई गई याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा था कि दोनों आरोपी बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इस कारण उन्हें जमानत देना सही नहीं होगा। इसी आधार पर जज ने आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इससे पूर्व मामले में पिछली पेशी के दौरान कोर्ट में लंबी बहस भी हुई थी। इसके बाद अदालत ने 13 जुलाई के लिए फैसला सुरिक्षत रख लिया था।

महाजन के वकील राजेश शर्मा ने बताया कि बहस के दौरान कोर्ट रूम में उनके द्वारा कहा गया कि महाजन को फंसाने में पुलिस की पूरी साजिश है। वहीं दूसरी तरफ कोठी बेचने में जो राशि मिली थी, वह भी महाजन के अकाउंट में नहीं आई। पुलिस ने तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है। जबकि मामले में डीएसपी रामगोपाल के भाई आरोपी सतपाल डागर के वकील विशाल गर्ग नरवाणा ने कहा कि सतपाल को न तो इस डील के बारे में पता है और न ही उसे इससे कोई फायदा हुआ। लेकिन पुलिस ने सतपाल को भी मामले में आरोपी बना दिया है। उन्होंने कहा कि सतपाल के खिलाफ पुलिस को कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी सतपाल के खिलाफ पुलिस के पास कई सबूत हैं, जिन्हें कोर्ट में पहले ही पेश किया जा चुका है। सरकारी वकील ने कहा कि सतपाल डागर कोठी के सौदे में शुरुआत से अंत तक शामिल था और मामले से जुड़े जो लोग सरकारी गवाह बने हैं, उन्होंने इस बात का खुलासा किया है।

फरार बिजनेसमैन सौरव गुप्ता ने किया सरेंडर, 2 दिन के रिमांड पर

उधर इस केस में फरार चल रहे आरोपी बिजनेसमैन सौरव गुप्ता ने सरेंडर कर दिया है। जैसे ही सौरव के कोर्ट में सरेंडर की बात पता चली तो सेक्टर-31 थाना पुलिस कोर्ट पहुंच गई और उसका 5 दिन का रिमांड मांगा। पुलिस ने तर्क दिया कि कोठी खरीदने वाला मुख्य आरोपी सौरव गुप्ता ही है, जिसकी सुप्रीम कोर्ट से भी याचिका खारिज हो चुकी है। इससे पूछताछ करनी है और कोठी के दस्तावेज कब्जे में लेने हैं, इसलिए पांच दिन का रिमांड दिया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सौरव का दो दिन का पुलिस रिमांड लिया गया। असल में इस विवादित कोठी को गुप्ता ब्रदर्स ने ही खरीदा था और पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर उसकी जगह नई इमारत का निर्माण भी शुरू कर दिया था। जब निर्माण हो रहा था, तभी मामला खुल गया।

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