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बैंक के लिए कैश लेकर जा रहे कैंटर टकराए:आगे बैठी लेडी काॅन्स्टेबल सवा घंटे तक फंसी रही, क्रेन की मदद से बाहर निकाला

चंडीगढ़16 दिन पहलेलेखक: अभिषेक धीमान
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इस तरह आपस में भिड़े कैंटर। - Dainik Bhaskar
इस तरह आपस में भिड़े कैंटर।

सोमवार दोपहर करीब 2 बजे रुपयों से भरे हुए पांच कैंटर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से सेक्टर-17 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए जा रहे थे। सेक्टर-28/26 डिवाइडिंग रोड पर सेक्टर-28 की तरफ आगे जा रहे एक कैंटर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दी। इससे पीछे आ रहे कैंटर की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कैंटर का कंडक्टर साइड का हिस्सा बुरी तरह से पिचक गया।

इसमें बैठी लेडी काॅन्स्टेबल की दोनों टांगें इसमें फंस गई। लेडी काॅन्स्टेबल करीब सवा घंटे तक फंसी रही। पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्राइवेट क्रेन की मदद से बुरी तरह से घायल महिला पुलिसकर्मी को बाहर निकाला गया। इसके बाद इलाज के लिए उन्हें पीजीआई में दाखिल करवाया गया।

पीजीआई में देर रात सर्जरी की गई। खून ज्यादा बहने के कारण किडनी पर भी असर हुआ है। डॉक्टर्स के मुताबिक कॉन्स्टेबल की हालत स्थिर है। सेक्टर-26 थाना पुलिस ने दोनों कैंटर चालकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे की वजह से ट्रैफिक जाम हो गया था। तुरंत ट्रैफिक पुलिस ने एक साइड से ट्रैफिक को रोक दिया, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी किया गया।

लोगों ने पहले हाथों से खींचने की कोशिश की, नाकाम रहे, फिर कैबिन के मुड़े हुए लोहे को सीधा करने की कोशिश की, फिर भी नाकाम रहे तो क्रेन बुलाई।
लोगों ने पहले हाथों से खींचने की कोशिश की, नाकाम रहे, फिर कैबिन के मुड़े हुए लोहे को सीधा करने की कोशिश की, फिर भी नाकाम रहे तो क्रेन बुलाई।

चौथे नंबर के कैंटर में बैठी थी
पांचों कैंटर रेलवे स्टेशन से सेक्टर-17 आरबीआई ऑफिस के लिए जा रहे थे। महिला काॅन्स्टेबल पुपीता चौथे नंबर के कैंटर में बैठी थी, जिसे गुरभेज चला रहा था। इनके आगे जा रहे कैंटर में काॅन्स्टेबल राम सिंह और ड्राइवर तेजिंदर सिंह थे। तेजिंदर सिंह के आगे वाले यानी दो नंबर पर चल रहे कैंटर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दी। इस पर तेजिंदर सिंह ने भी एकाएक कैंटर को ब्रेक लगाई और नंबर दो के कैंटर से भिड़ गया। उनके पीछे आ रहे गुरभेज सिंह के कैंटर की तेजिंदर के कैंटर से पीछे से जबरदस्त टक्कर हो गई। हादसे के बाद गुरभेज, तेजिंदर और राम सिंह को इलाज के लिए सेक्टर-16 अस्पताल लेकर जाया गया, जबकि लेडी काॅन्स्टेबल अंदर ही फंस गईं।

राहगीर, पुलिसकर्मी सब जुट गए बचाने में
हादसा देखकर पहले आम लोग रुके। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। पीसीआर की गाड़ी भी आ गई। ट्रांसपोर्ट लाइट पॉइंट पर तैनात ट्रैफिक कर्मी पहुंचे। थाना पुलिस भी पहुंच गई। सभी हाथ से लेडी कॉन्स्टेबल को बाहर निकलाने में जुट गए। दोनों कैंटर एक-दूसरे के साथ जुड़े हुए थे और बीच में लेडी काॅन्स्टेबल फंसी हुई थी। लोगों ने उन्हें खींचने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। हाथों से कैबिन के मुड़े हुए लोहे को सीधा करने की कोशिश की, लेकिन वह भी नहीं हो सका।
इसके बाद ट्रांसपोर्ट एरिया से एक कटर मंगवाया गया। कटर से भी कैबिन सीधा नहीं हुआ। तब तक महिला काॅन्स्टेबल अंदर ही फंसी रहीं। इसके बाद क्रेन बुलाई गई। क्रेन से सबसे पहले आगे वाले कैंटर को हटाया गया। इसके बाद पीछे वाले कैंटर के कैबिन में क्रेन की चेन फंसाकर उसे थोड़ा आगे खिंचवाया गया। चार मुलाजिम कैंटर के सामने शीशे की तरफ से चढ़े। फ्रंट शीशे से लेडी काॅन्स्टेबल को बाहर निकाला गया।

डॉक्टर ने कहा- इंफेक्शन कम हुआ तो पैर काटने की नाैबत नहीं आएगी
सड़क हादसे में घायल लेडी काॅन्स्टेबल का पीजीआई के ट्राॅमा सेंटर में सोमवार रात को ऑपरेशन चल रहा था। हड्डी राेग विशेषज्ञ और पीजीआई के ट्राॅमा सेंटर के इंचार्ज प्राे. समीर अग्रवाल ने बताया कि काॅन्स्टेबल के घुटने के नीचे की हड्डी क्रैश हाे गई हैं। खून कर रिसाव भी ज्यादा हाे चुका है। पैराें में घाव हुए हैं। पीजीआई के डाॅ. हिमांशु के नेतृत्व में 8 डाॅक्टर्स की टीम उसका ऑपरेशन कर रही है।
जाे हड्डियां क्रैश हुई हैं, उन्हें टेंपरेरी ताैर पर फिक्सेटर (शिकंजा) लगाया जा रहा है। करीब चार घंटे सर्जरी चली है। हादसे में लेडी काॅन्स्टेबल का खून का रिसाव भी काफी हाे गया है। उसकी किडनी पर भी उसका असर पड़ा है। अगर इंफेक्शन नहीं हुआ और सबकुछ ठीक-ठाक रहा ताे पैर काटने की नाैबत नहीं आएगी। डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि अगर दाे-तीन दिन इंफेक्शन नहीं हुआ तो राॅड डालकर हड्डियाें काे फिक्स करेंगे। इसके कुछ दिन बाद उसके पैराें की प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी।

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