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MLA हॉस्टल में नेताजी की प्रतिमा अनावरित:हरियाणा विस अध्यक्ष ने सुभाष चंद्र बोस की मौत को पहले बताया सड़क दुर्घटना; फिर गलती दुरुस्त करके बोले हवाई हादसा

चंडीगढ़7 महीने पहले
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करते हुए सीएम मनोहर लाल। - Dainik Bhaskar
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण करते हुए सीएम मनोहर लाल।

23 जनवरी आज रविवार को पराक्रम दिवस पर हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बारिश में ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा एमएलए हॉस्टल के पार्क में लगाई गई है। अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मौत का कारण सड़क हादसा बता दिया। परंतु जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसे सुधारते हुए हवाई हादसा बताया। इसके बाद उनके जीवन का परिचय दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया।

नेताजी की मौत पर तीन कमीशन बने

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि नेताजी ने अपना जीवन देश की आजादी में लगा दिया। 1 दिसंबर 2021 को नेताजी पार्क का उदघाटन हुआ था। उसी दिन फैसला किया था कि नेताजी प्रतिमा लगाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ने नेता जी मौत सड़क दुघर्टना में होने की बात कही। परंतु जब उन्हें उनकी गलती के बारे में बताया गया तो हवाई हादसे का जिक्र किया। ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि उनकी मौत पर तीन कमीशन बने। दो कमीशन ने कहा कि ऐसा लगता है कि उनकी मौत हवाई हादसे में हुई। तीसरे कमीशन ने कहा कि इसमें सच्चाई नहीं है। इस रिपोर्ट पर प्रश्न लगाया जाता है।

विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता।

नेता जी का भाषण रोंगटे खड़े करने वाला होता था

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि आज सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती है और आजादी का 75वां वर्ष है। नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया। आजाद हिंद सरकार को जर्मन, जापान, इटली ने उनकी शेडो सरकार की मान्यता दी। बर्मा से बड़ा सहयोग मिला था। उनके भाषण लोगों के रोंगटे खड़े करने वाला होता था। उन्हीं क्रांतिकारी नेता के कारण अंग्रेजों को देश छोड़ना पड़ा। उनके मन में संत भाव भी था।

उनके मन में इतनी संवेदनशीलता थी कि जब वे 8वीं कक्षा में पढ़ते थे तो स्कूल के गेट पर हर दिन एक भिखारिन खड़ी होती थी। वे स्कूल जाकर उस भिखारिन को आधा खाना देते थे। पिता जी इच्छा मानकर आईएएस की परीक्षा 23 साल की उम्र में पास कर दी थी। उनकी 50000 फौज में बड़ी संख्या में हरियाणवी थे। हिसार के सातरोड में बड़ी रैली की थी। हमें इस बात का फर्ख है कि आज भी आजाद हिंद फौज में 20 से 35 लोग जीवित हैं, उनको सभी को नमन करता हूं।

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