पहलवान / तब दारा सिंह के लिए दूध या लस्सी मंगवाई थी

Then milk or lassi was ordered for Dara Singh.
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Then milk or lassi was ordered for Dara Singh.

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

चंडीगढ़. अनेक व्यक्ति अपने शरीर की बनावट से ही पहचान लिए जाते हैं। इनमें से एक थे दारा सिंह रंधावा उर्फ दारा सिंह। बात 1979 की है। वे उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से मिलने आए थे, लेकिन मुख्यमंत्री किसी बैठक में व्यस्त थे तो वे हमारे कमरे में आ गए। मैं उन दिनों मुख्यमंत्री के साथ तैनात था। प्रसिद्ध पहलवान अभिनेता, राजनीतिक नेता इन सबसे बढ़कर रामायण धारावाहिक के प्रसिद्ध हनुमान जी को हमने उनके कद और पहलवानी शरीर से पहचान लिया था। 
हमने उनसे खाने-पीने के बारे में पूछा ताे पहलवानी के अंदाज में कहा- दूध या लस्सी मिल सकती है। उनकी पसंद के अनुसार चीज मंगवाई गई। इससे पूर्व मैं जालंधर में पहलवानी करते उनसे मिला था। तब वे बहुत गुस्से में रहते थे। पहलवानी में भी उन्होंने विश्व स्तर पर नाम कमाया था। इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिर हिंदी फिल्मों में भी काम किया। रामायण का जिक्र आते ही उनकी आंखों में चमक आ गई। सोचते हुए उन्हाेंने बताया कि जब मुझे रामानंद सागर जी से मिलने का संदेश मिला तो मुझे विश्वास ही नहीं आ रहा था। मैंने हिंदी फिल्मों में काम तो अवश्य किया था, लेकिन रामायण के संवादों में अवधि और संस्कृत भाग समावेश था। मैंने रामानंद जी से उस कठिनाई का जिक्र किया तो उन्होंने मुस्कराकर कहा चिंता मत करो। 
हनुमान के किरदार को याद करते हुए दारा सिंह ने बताया कि इसके मेकअप पर काफी समय लगता था। मुंह पर वैसे ही वानर की बनावट बनाई जाती फिर पूंछ को भी संभालना पड़ता। इस अवस्था में बोलने में कठिनाई होती थी, लेकिन सागर साहिब ने कहीं मेरी आवाज ली ताे कहीं डबिंग की। रामायण की शूटिंग को याद करते हुए दारा सिंह ने कहा कि सेट पर पूरी तरह से आध्यात्मिक माहौल होता था। शूटिंग कई वर्षों तक चलती। उन्होंने कहा कि वे शूटिंग में अनेक बार भावुक हो गए थे। लक्ष्मण के बेहोश होने के समय जब भगवान राम विलाप करते थे तो उनकी आंखें भी नम हो गई थी।
रामायण कार्यक्रम इतना लोकप्रिय हो गया था कि जब यह दूरदर्शन पर आता था तो रेलगाड़ी से लेकर बारातें तक रुक जाती थी। हम सभी कलाकार इतने लोकप्रिय हो गए थे कि विश्वभर में हमें सम्मानित किया गया। हनुमान के किरदार के पश्चात मेरा स्वभाव शांत हो गया। पहलवानी के समय एक-दूसरे को ललकारने से गुस्सा भी आ जाता था। लेकिन इसके बाद मैं शांत और आध्यात्मिक बन गया। मैं सुख-दुख, खुशी-गम को बराबर समझने लगा। रामायण धारावाहिक ने मेरा जीवन पूरी तरह से बदल दिया।- दारा सिंह और रामायण से जुड़ी याद काे साझा किया प्रेम विज ने

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