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पंजाब की यूनिवर्सिटीज का सिलेबस होगा एक समान:प्राइवेट और सरकारी में एक से होंगे कोर्स, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को 30-40% तक फैसले लेने की परमिशन

चंडीगढ़एक महीने पहलेलेखक: ननु जोगिंदर सिंह
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पंजाब की सभी यूनिवर्सिटीज का सिलेबस अब आने वाले समय में बराबर होगा। एक समान गाइडलाइंस के साथ प्राइवेट और सरकारी यूनिवर्सिटी के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड लागू करने के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है। पंजाब के एजुकेशन मिनिस्टर प्रगट सिंह और एजुकेशन सेक्रेटरी कृष्ण कुमार ने इस बारे में सभी वाइस चांसलर्स के साथ मीटिंग भी की। इस बारे में उन्होंने एक कमेटी का गठन भी किया है, जिसमें चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. आरएस बावा और रेयात एंड बाहरा यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. परविंदर सिंह भी शामिल हैं।

हालांकि इसके अनुसार प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को 30 से 40 परसेंट तक अपने फैसले की परमिशन रहेगी। इस संबंध में हुई मीटिंग में मिनिस्टर सहित सभी यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर भी थे। इस कमेटी में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी प्रो. एसपी सिंह भी शामिल हैं। प्रो. सिंह ने इससे पहले पंजाब के लिए एजुकेशन पॉलिसी का ड्राफ्ट भी बनाया था कि लेकिन ये ड्राफ्ट आगे डिस्कस भी नहीं हुआ। करीब 15 साल पहले भी इसी तरह की कोशिश हुई थी, जिसमें पंजाब यूनिवर्सिटी भी हिस्सा थी लेकिन उस समय ये योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

मीटिंग के दौरान सातवां वेतन आयोग लागू करने को लेकर भी डिस्कशन हुआ। इस मांग को लेकर पीफैक्टो पिछले 39 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर है। इसके साथ ही भर्ती के दौरान वेतन डी-लिंक करने के मसले पर भी बात हुई। मेंबर्स का मानना था कि इस निर्णय की वजह से पंजाब ही नहीं चंडीगढ़ की एजुकेशन भी पीछे जाएगी। अच्छे टीचर्स यहां पर रुकना नहीं चाहेंगे और अच्छी एजुकेशन अच्छे टीचर्स के बिना संभव नहीं है।

सिलेबस को लेकर 15 साल पहले भी कोशिश की गई थी
पीटीए फंड की वजह से टीचरों के शोषण, भर्ती को लेकर बात हुई। फंड के नाम पर टीचरों को बेसिक वेतन भी नहीं मिल रहा है। सिलेबस को लेकर करीब 15 साल पहले भी एक कोशिश की गई थी लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ स्टडीज की सख्ती के कारण सभी यूनिवर्सिटी की सहमति नहीं बन सकी। उस समय भी यह प्रस्ताव रखा गया था कि तीनों स्टेट यूनिवर्सिटी यानी जीएनडीयू, पीयू पटियाला और पीयू के सब्जेक्ट और कोर्स समान रहें। ताकि स्टूडेंट्स को माइग्रेशन और एडमिशन के समय नुकसान न झेलें।

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