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नॉन टीचिंग को नहीं इजाजत:ग्रेजुएट काॅन्स्टीट्यूएंसी से इस बार नॉन टीचिंग स्टाफ भी इलेक्शन के मैदान में

चंडीगढ़12 दिन पहले
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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट की ग्रेजुएट काॅन्स्टीट्यूएंसी में इस बार यूनिवर्सिटी से रिटायर नॉन टीचिंग स्टाफ ने भी इलेक्शन लड़ने का फैसला किया है। लंबे समय से आईसीएसएसआर में रीजनल सुपरवाइजर के तौर पर तैनात अवतार सिंह यूनिवर्सिटी के बजाय केंद्र सरकार के मुलाजिम हैं इसलिए वे इलेक्शन लड़ने के लिए कानूनी रूप से एलिजिबल हैं।

इलेक्शन लड़ रहे अवतार एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन हैं और अपना बड़ा मुद्दा प्यून से लेकर असिस्टेंट प्रोफेसर को रेगुलर कराना बताते हैं। कानूनी रूप से नॉन टीचिंग स्टाफ को इलेक्शन लड़ने की परमिशन नहीं है। इसकी वजह बताई जाती है कि नॉन टीचिंग स्टाफ ही इलेक्शन करवाता है। सीनेट में उनके प्रतिनिधित्व का एकमात्र जरिया पीयू स्टाफ एसोसिएशन का प्रेसिडेंट रहता है।

स्टाफ प्रेसिडेंट सीनेट का एक्स ऑफिशियो मेंबर रहता है जिसकी नियुक्ति वाइस चांसलर की सिफारिश पर चांसलर करते हैं। धनास निवासी अवतार सिंह का कहना है कि यूनिवर्सिटी की सीनेट में स्टूडेंट के प्रेसिडेंट को गैलरी में बैठने की परमिशन है और उनके कई प्रतिनिधि स्टूडेंट्स नेताओं के जरिए ग्रेजुएट काॅन्स्टीट्यूएंसी से आते हैं। टीचर से लेकर प्रिंसिपल तक हरेक वर्ग का प्रतिनिधित्व सीनेट में रहता है लेकिन नॉन टीचिंग के मुद्दों पर बात नहीं हो पाती। प्रेसिडेंट एकमात्र मेंबर होता है और उसकी बातचीत के दौरान कई बार आवाज को दबा दिया जाता। इसलिए इस बार उन्होंने इलेक्शन लड़ने का फैसला किया। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी में नियम अनुसार जिन लोगों को रेगुलराइज किया जाता है वह भी नहीं किया जा रहा और ना ही यह मुद्दा कोई गंभीरतापूर्वक उठाता है। महिलाओं की चाइल्ड केयर लीव समेत कई मुद्दे बकाया है।

कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन पूरा सहयोग करे: डायरेक्टर
पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट के 26 सितंबर को होने जा रहे इलेक्शन के लिए पंजाब के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर परमजीत सिंह ने सभी कॉलेजों को इसके लिए सहयोग करने को निर्देश दिए है। उन्होंने कॉलेजों को लेटर लिखा है कि जहां पर भी बूथ बनाए जाने हैं वहां पर कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन पूरा सहयोग करे।

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