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  • Till Now Only 3.02% Of The Test In Chandigarh, According To This It Will Take 6 Years To Test Half The Population.

न पर्याप्त लैब न पूरा स्टाफ:चंडीगढ़ में अब तक सिर्फ 3.02% का ही टेस्ट, इस हिसाब से आधी आबादी का टेस्ट करने में भी 6 साल लगेंगे

चंडीगढ़7 दिन पहले
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  • जब 33 टेस्ट रोज हो रहे थे तब 2 लैब में था 30 का ट्रेंड स्टाफ
  • अब सिर्फ 4 लैब में 47 के स्टाफ के भरोसे रोज हो रहे 1359 टेस्ट

ट्राईसिटी यानी चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अब रोजाना करीब 800 पॉजिटिव केस आ रहे हैं। लेकिन जिस रफ्तार से मरीजों में संक्रमण बढ़ रहा है, उस हिसाब से टेस्ट नहीं हो रहे हैं, क्योंकि हमारे पास न तो पर्याप्त टेस्टिंग लैब हैं और न ही उचित संख्या में ट्रेंड स्टाफ। चंडीगढ़ में इस समय सिर्फ 4 लैब हैं, जिसमें 47 लोगों का ट्रेंड स्टाफ है।

अफसरों की गंभीरता देखिए कि वह उम्मीद के सहारे बैठे हैं कि सितंबर में केस कम हो सकते हैं (देखें भास्कर सवाल)। जबकि लोगों को राहत उम्मीद नहीं, प्रशासन की तैयारी से ही मिलेगी। मौजूदा समय में चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में टेस्टिंग के लिए तैयारी काफी नहीं है। इसमें चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि सरकारी लैब पर बोझ बहुत ज्यादा है और प्राइवेट लैब्स की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जरूरत है कि सरकारी लैब टेस्ट बढ़ाएं और प्राइवेट लैब अपनी विश्वसनीयता।
टेस्ट की स्थिति और बढ़ते हुए मामलों के मद्देनजर तैयारियों पर भास्कर रिपोर्ट >
178 दिन: जांच की धीमी रफ्तार बढ़ा देगी संक्रमण

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस संक्रमण को ज्यादा से ज्यादा फैलने से तभी रोका जा सकता है जब पॉजिटिव मरीजों का पता चले और उन्हें आइसोलेट किया जाए। वहीं, चंडीगढ़ के अफसर सबका टेस्ट करना जरूरी नहीं समझते। यह हालात तब हैं जब ट्राईसिटी में जांच की रफ्तार में चंडीगढ़ ही सबसे पीछे है।

भास्कर का सवाल: टेस्ट कैसे बढ़ेंगे?

चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार का जवाब: मैं मानता हूं ज्यादा टेस्ट होने चाहिए, लेकिन दो महीने में लैब नहीं बनती

शहर में अभी कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है। करीब 50 हजार टेस्ट किए जा चुके हैं। इसके मुताबिक हम शहर के हर 24वें शख्स का टेस्ट कर रहे हैं। टेस्ट ज्यादा से ज्यादा होने चाहिए, मैं खुद इसको मानता हूं। लेकिन यह भी असलियत है कि टेस्टिंग लैब तुरंत शुरू नहीं किए जा सकते। एक-दो महीने में भी लैब नहीं बनती। वायरोलॉजी विभाग के परामर्श से कुछ और स्टाफ को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जल्द टेस्ट और बढ़ जाएंगे। शहर के हर एक शख्स का टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। कोविड-19 टेस्ट में ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके लिए अभी और लैब की जरूरत हो। सितंबर में पेशेंट पीक में होने का अनुमान है, आगे वायरस की गति कम भी हो सकती है।''

स्वास्थ्य मंत्री पंजाब का जवाब: मोहाली में हाल ही में दो टेस्टिंग लैब खोली गई हैं...

जितने लोग आ रहे हैं उन सबके टेस्ट हो रहे हैं। पंजाब में रोज 30 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। नई लैब खोलने में भी कोई अड़चन नहीं है, लेकिन लैब के नियम सख्त हैं, क्योंकि लैब डिस्पोजल से भी संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है, इसलिए बहुत सी लैब इसके लिए अप्लाई नहीं करती हैं। सरकार द्वारा कंटेनमेंट जोन में घर घर जाकर मास टेस्टिंग की जा रही है। अब प्राइवेट लैब्स को भी 250 रुपए में रैपिड टेस्ट किट्स मुहैया करवाई हैं। पिछले दिनों में ही मोहाली में दो टेस्टिंग लैब खोली गई हैं जो फेज-4 के फोरेंसिक लैब तथा फेज-5 के बॉयोटेक्नॉलाजी इंक्यूबेटर सेंटर में चल रही है।''
बैकअप के लिए स्टाफ को ट्रेनिंग दे रहे हैं...
अगर जरूरत पड़ेगी,तो बैकअप के लिए स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है। हमने दो माह में टेस्ट की संख्या करीब दोगुनी कर दी है। कोई नहीं कह सकता, कि जो सरकारी अस्पताल में टेस्ट करवाना चाहता हो, उसका न हो। हां टर्नवाइज टेस्ट होते हैं, इसलिए कुछ समय का इंतजार जरूर करना होता है। चंडीगढ़ के पास न पेशेंट के बेड की कमी है और न ही टेस्टिंग की। हमने कई कम्युनिटी सेंटर, होटल और धर्मशाला पहले से चिन्हित कर रखी है जिससे जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। -अरुण कुमार गुप्ता, हेल्थ सेक्रेटरी, चंडीगढ़

उम्मीद की किरण...

पीजीआई में दो हफ्ते में शुरू होगी दो
नई लैब... पीजीआई प्रवक्ता के मुताबिक कुछ और स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। दो मशीन बढ़ाकर पीजीआई के अंदर ही दो नई लैब स्थापित की जा रही है। यह दो हफ्ते में शुरू हो जाएगी। यहां आरसीपीसीआर टेस्ट होगा।
रैंडम एंटीबॉडी टेस्ट शुरू होंगे
सोमवार से... चंडीगढ़ प्रशासन सेक्टर-32 और 16 अस्पताल में सोमवार से रैंडम एंटीबॉडी टेस्ट भी शुरू करने जा रहा है। जिन्हें कोरोना हो चुका है, उन्हें दोबारा खतरा तो नहीं है इसकी जांच की जाएगी।
वायरस फैलने से रोकने के लिए टेस्टिंग बढ़ाना जरूरी...

कोई पॉजिटिव आए तो उसके परिवार सदस्यों, मित्रों व ऑफिस में सहयोगियों के तुरंत टेस्ट होने चाहिए न कि बीमारी के लक्षण दिखने का इंतजार करना चाहिए। पंचकूला में अब तक केवल 7 फीसदी लोगों के ही टेस्ट होना चिंतनीय है। इस शहर की जितनी जनसंख्या है, उस हिसाब से टेस्टिंग लैब बढ़नी चाहिए। शहर की सभी डिस्पेंसरी, हेल्थ सेंटरों में कोरोना के टेस्ट होने चाहिए। प्राइवेट लैब भी इसके लिए बढ़ाई जा सकती है।'' -डॉ. सतवीर चौधरी, रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल हैल्थ

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