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सिटी ब्यूटीफुल की सरकार:रविकांत बने मेयर, सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर पद भी भाजपाइयों के, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट लाने से मना किए जाने की बात पर कांग्रेस का बायकॉट

चंडीगढ़7 दिन पहले
मेयर सहित सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी भाजपा ने ही जीत हासिल की।
  • मेयर पद के लिए डाले गए 24 में से दो वोट रिजेक्ट हो गए, भाजपा उम्मीदवार रविकांत शर्मा को 17 तो कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला को 5 ही मिले
  • बायकॉट के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद में नहीं किया कांग्रेसी पार्षदों ने वोट, सभी वोट भाजपा को गए

(आरती एम अग्निहोत्री). चंडीगढ़ नगर निगम को शुक्रवार को नया मेयर मिल गया है। मेयर सहित सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर भी भाजपा ने ही जीत हासिल की। मेयर पद के लिए हुए मतदान में भाजपा के उम्मीदवार रविकांत ने कुल 27 में से 17 मत हासिल कर कांग्रेस के देवेंद्र बबला को भारी अंतर से शिकस्त दी। बबला को 5 वोट ही मिले।

सिटी ब्यूटीफुल के नए निर्वाचित मेयर रविकांत शर्मा।
सिटी ब्यूटीफुल के नए निर्वाचित मेयर रविकांत शर्मा।

बता दें कि मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव शुक्रवार को निश्चित हुए थे। इसके लिए सोमवार को नामांकन भरे गए थे। भाजपा से जहां मेयर पद के लिए रविकांत शर्मा, सीनियर मेयर पद के लिए महेशइंद्र सिंह सिद्धू और डिप्टी मेयर के लिए फर्मिला देवी दौड़ में थे, वहीं कांग्रेस की ओर से मेयर पद के लिए देवेंद्र सिंह बबला, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए रविंदर कौर गुजराल और डिप्टी मेयर पद के लिए सतीश कैंथ चुनाव लड़ रहे थे।

शुक्रवार को वोटिंग शुरू हुई तो हाथ सैनिटाइज करने के बाद ही पार्षद वोट डाल रहे थे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने के लिए मनाही थी। कुल 27 सदस्यों मेंं से अकाली दल के एक पार्षद हरदीप ने इस चुनाव का बायकॉट कर दिया। कांग्रेस के पास पांच पार्षद हैं और भाजपा के पास 25। सांसद किरण खेर मुंबई में होने के चलते वोट नहीं दे पाएंगी, वहीं पार्षद हीरा नेगी भी कोरोना के चलते अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में 24 लोगों ने वोट किया। इनमें से दो वोट रिजेक्ट हो गए। मेयर पद के भाजपा उम्मीदवार रविकांत शर्मा को 17 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला को 5 वोट ही मिले।

भाजपा के महेशइंद्र बने सीनियर डिप्टी मेयर, कांग्रेस नहीं बनी हिस्सा

इसी प्रकार सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए भाजपा के महेशइंद्र ने कांग्रेस की रविन्द्र कौर गुजराल को हराया है। इस चुनाव के लिए कांग्रेस पार्षदों ने वोट नहीं डाले और कुल 19 वोट ही पड़े। सभी महेश की झोली में गए। गुजराल के पक्ष में कोई भी खड़ा नजर नहीं आया। डिप्टी मेयर के लिए भाजपा की फर्मिला ने कांग्रेस के सतीश केंथ को हराया है। फर्मिला को भी पोल हुए कुल 19 वोट में से सभी 19 मिले।

दरअसल, मेयर डिक्लेयर होने के बाद कांग्रेस ने यह कहकर बाकी दो पोस्ट का बायकॉट कर दिया कि चुनाव पार दर्शी तरीके से नहीं हुआ है। हमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने के लिए मना किया था, लेकिन विरोधियों को मोबाइल ले जाने दिया गया।

भाजपा को था क्रॉस वोटिंग का डर, पर ऐसा हुआ नहीं

सोमवार को वार्ड-12 की भाजपा पार्षद चंद्रवती शुक्ला ने बागी होकर नामांकन भर दिया था, लेकिन मंगलवार को उनका नामांकन खारिज हो गया था। दूसरी ओर डिप्टी मेयर का नामांकन न भरने देने से SC मोर्चा के प्रदेश महामंत्री और पार्षद भरत कुमार भी भाजपा से नाराज़ हो गए थे और पार्टी के सभी पदों से रिजाइन करने की बात कहने लगे थे। इन दोनों के अलावा और भी कुछ भाजपा पार्षद पार्टी से नाराज़ हो गए थे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद और संगठन मंत्री दिनेश शर्मा ने बुधवार को एक मीटिंग के दौरान सभी को मना लिया था। हालांकि गुरुवार को मेयर की फेयरवेल पार्टी में चंद्रवती नहीं पहुंची। ऐसे में अब भाजपा को क्रॉस वोटिंग का डर भी सता रहा था। गनीमत रही कि क्रॉस वोटिंग नहीं हुई।

नए मेयर को मिलेंगी ये सुविधाएं

  • मेयर को सेक्टर-24 में सरकारी आलिशान घर के अलावा सरकारी गाड़ी मिलती है।
  • मेयर को दो सुरक्षाकर्मी के अलावा सरकारी चालक मिलता है।
  • घर पर काम करने के लिए दो सेवादार भी मिलते हैं।
  • नगर निगम में जो भी वित्त एवं अनुबंध कमेटी और सदन में प्रस्ताव पास होने के लिए आता है, वह मेयर के माध्यम से ही आता है।
  • मेयर किसी भी प्रस्ताव को रोक भी सकता है।
  • मेयर को हर साल दो करोड़ रुपये का फंड मिलता है, जो वह पूरे शहर के विकास में खर्च कर सकता है।
  • सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपए का फंड मिलता है।
  • मेयर को हर माह 45 हजार रुपये का मानदेय मिलता है।
  • सांसद के बाद मेयर का पद ही शहर में अहम है।
  • मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।
  • सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है।
  • सुविधा के नाम पर सिर्फ उन्हें नगर निगम में कमरा मिलता है, लेकिन उनके पास कोई फाइल नहीं आती है।
  • पार्षद कई बार सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी गाड़ी की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन यह मांग खारिज कर चुका है।

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