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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला:शादी टूटना तय तो छह माह का इंतजार जरूरी नहीं: कोर्ट

चंडीगढ़7 दिन पहले
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6 माह का समय दोनों पक्षों के बीच यदि कोई सुलह की संभावना है तो उसके लिए है। - Dainik Bhaskar
6 माह का समय दोनों पक्षों के बीच यदि कोई सुलह की संभावना है तो उसके लिए है।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जहां शादी का टूटना तय है वहां 6 महीने का इंतजार करवाना जरूरी नहीं है। जस्टिस अरुण मूंगा ने फैसले में कहा कि फैमिली कोर्ट हर मामले में 6 महीने का इंतजार कराने के निर्देश ना दें।

6 माह का समय दोनों पक्षों के बीच यदि कोई सुलह की संभावना है तो उसके लिए है। तलाक के लिए याचिका दायर करने वाले पति-पत्नी ने हाईकोर्ट में कहा कि फतेहबाद फैमिली कोर्ट के 26 फरवरी 2021 के फैसले को खारिज किया जाएं, जिसमें उन्हें 6 माह इंतजार करने को कहा गया है।

वे दोनों दिसंबर 2015 से अलग रह रहे हैं। बेटे की मौत हो चुकी है जबकि बेटी की शादी हो चुकी है। दोनों के बीच शादी को बनाए रखने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में 6 माह इंतजार करना उनके लिए परेशानी का सबब होगा। हाईकोर्ट ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि इंतजार का मतलब परेशानी को बढ़ाना है।

हर किसी को अपने ढंग से जीवनयापन का अधिकार

हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में छह माह इंतजार करने का मतलब दोनों पक्षों के बीच परेशानी को बढ़ाना है। दोनों पक्ष तय कर चुके हैं कि अब साथ में नहीं रहना है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने ढंग से जीवनयापन का अधिकार है। ऐसे में बेवजह 6 माह का इंतजार करने के लिए नहीं कहा जा सकता।

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