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परेशानी:रेट बढ़ने के बाद आम लोगों के लिए मकान बनाना मुश्किल, सीएम को बताएंगे समस्या

कालका6 दिन पहले
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डीटीपी विभाग द्वारा क्षेत्र की अवैध काॅलोनियों में तोड़-फोड़ की कार्रवाई हो रही है।
  • हुड्डा, डीएलएफ में रेट महंगे और जहां सस्ते वहां अवैध काॅलोनी के नाम पर हो रही तोड़-फोड़
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जीवन में हर किसी इंसान का अपने घर में रहने का सपना होता है, जिसके लिए वो सारी जिंदगी संघर्ष करने में लगा रहता है। परंतु पिंजौर, कालका क्षेत्र में अब लोगों को अपने घर बनाने के सपने पर पानी फिरता नजर आ रहा है क्योंकि यहां पर आम आदमी के लिए घर बनाना बेहद मुश्किल हो चुका है, आए दिन सरकार के डीटीपी विभाग द्वारा क्षेत्र की अवैध काॅलोनियों में तोड़-फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। पुराने पिंजौर-कालका शहर के क्षेत्र में अब कोई भी खाली जगह नहीं है जहां पर लोग छोटा प्लाॅट लेकर मकान बना सकें।

पिछले करीब 15 वर्ष से ज्यादा हो गए अब लोग पुराने शहर के बाहर आसपास खाली जगह पर प्लाॅट लेकर मकान बना रहे थे। देखते ही देखते दोनों शहरों के आसपास नई काॅलोनियां विकसित होने लगी। इसमें प्राॅपर्टी डीलरों द्वारा कई एकड़ में जगह लेकर उसमें प्लाॅट काटकर बेचने शुरू कर दिए। आम लोगों ने अपने बजट की पहुंच के मुताबिक उनमें प्लाॅट लेने भी शुरू कर दिए जिसमें बहुत से लोगों ने मकान भी बना लिए, अब उन मकानों को सरकार द्वारा बिजली पानी व गलियों आदि की सुविधा भी दी जाने लगी। परंतु पिछले कुछ वर्षों से जिला नगर योजनाकार विभाग पंचकूला द्वारा विनियमन अधिनियम 1975 एक्ट के तहत नई विकसित हो रही काॅलोनियों में तोड़-फोड़ करते हुए प्लाॅटों पर हो रहे निर्माण को गिराया जा रहा है।

आम जनता के लिए हुई मुश्किल

स्थानीय पूर्व पार्षद जगमोहन धीमान, आरएस यादव, महिंद्र वाल्मीकि और अरुण शर्मा ने कहा कि इस सारी कार्रवाई में आम जनता पीस रही है, सरकार ने क्षेत्र की जनता के लिए कुछ भी नहीं सोचा जो कि वो अपने बजट में एक छोटा सा प्लाॅट लेकर मकान बना सके। क्षेत्र में सरकार द्वारा हुड्डा के सेक्टर बनाए गए है और डीएलएफ और अमरावती आदि को काॅलोनी विकसित करने की अनुमति दी हुई है परंतु वहां पर जमीन के इतने महंगे दाम है कि आम जनता अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर भी छोटा प्लाॅट नहीं ले सकती। ऊपर से सरकार द्वारा क्षेत्र में नई विकसित हो रही काॅलोनियों को भी नियमित नहीं कर रही।

कहा कि सरकार द्वारा अपने करीब 6 वर्ष के कार्यकाल में क्षेत्र की केवल 6 काॅलोनियों को ही नियमित किया गया जबकि क्षेत्र वासियों की पिछले करीब 15 वर्षों से दर्जनों काॅलोनियों को नियमित करने की मांग चली आ रही थी। लोगों ने कहा कि हर जगह आबादी बढ़ रही है जिस कारण काॅलोनियां भी तेजी से विकसित हो रही है। कहा कि जनता सरकार को चुनकर अपने हकों के लिए सत्ता की चाबी सौंपती है इसलिए सरकार को भी चाहिए कि आम जनता को सिर ढकने के लिए उन्हें छत डालने में मदद करें न कि उन्हें इससे वंचित रखा जाए।

कहा क्या रेट है

क्षेत्र में हुड्डा के सेक्टर में 18 हजार रुपए से लेकर 21 हजार रुपए प्रति गज रेट है, अमरावती एन्क्लेव में 30 हजार रुपए से लेकर 35 हजार रुपए प्रति गज, डीएलएफ में 40 हजार रुपए से लेकर 42 हजार रुपए प्रति गज रेट और पिंजौर-कालका निगम क्षेत्र में 4 हजार रुपए से लेकर 18 हजार रुपए प्रति गज जमीन के रेट है। इसमें 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग निगम क्षेत्र में ही अपनी पहुंच के मुताबिक प्लाट लेते है।

निगम, परिषद व पालिका क्षेत्र में सभी काॅलोनियों को नियमित के लिए कहेगें: इस बारे में बात करने पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजीव कौशल ने कहा कि वो सरकार से मांग करेंगें कि हरियाणा में जहां पर भी नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका है, उसके अर्तंगत पड़ने वाली काॅलोनियों व क्षेत्र को नियमित करके वहां पर मकान बनाने की अनुमति दी जाए। ताकि हर कोई अपना मकान बना सके। जल्द ही एक मांग पत्र लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलेंगे। उधर डीटीपी पंचकूला लता हुड्डा ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 3 के अनुसार कोई व्यक्ति, प्रापर्टी डीलर इस अर्बन एरिया में निदेशक नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग हरियाणा से बिना लाइसेंस लिए किसी भी तहत की काॅलोनी विकसित करता है तो वो गैर कानूनी है, ऐसी जगह पर प्लाॅट लेने, काॅलोनी काटने वालों के विरुद्ध हरियाणा शहरी क्षेत्र अधिनियम 1975 की धारा 10(2) के तहत कार्रवाई की जाती है।

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