बातचीत:नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी के लिए शहर के इंडस्ट्रियलिस्ट्स बोले, रियायत मिले

पंचकूला2 वर्ष पहले
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  • अभी दावा किया जा रहा है कि अगस्त, 2020 तक नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी बनकर तैयार हो जाएगी

हरियाणा गवर्नमेंट नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी बना रही है। इंडस्ट्रलिस्ट्स को पिछले तीन-चार साल से नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी का इंतजार है। विभिन्न कारणों से लगातार पॉलिसी लेट हो रही है। इस बार दावा किया जा रहा है कि अगस्त, 2020 तक नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी बनकर तैयार हो जाएगी। शहर के इंडस्ट्रलिस्ट यहां की इंडस्ट्री में जान फूंकने के लिए कई सुझाव सरकार को दे चुके हैं।

वे मानते हैं कि मोहाली में बने इंटरनैशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण पंचकूला को इसका फायदा मिल सकता है। शहर की इंडस्ट्री में तैयार क्वालिटी प्रॉडक्ट्स फॉरेन में सप्लाई कर सकते हैं। इंडस्ट्रलिस्ट्स से भास्कर ने उनकी जरूरतों के बारे में बातचीत की। पंचकूला की इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ से दिए गए सुझाव इस प्रकार हैं।

  • पंजाब में एफएआर 3.0 है। पंचकूला में केवल 1.50 एफएआर की ही परमिशन है। पंजाब की तर्ज पर यह बढ़ना चाहिए। कोविड का इफेक्ट अभी चार-पांच साल रहेगा। इस वजह से कामकाज करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखना पड़ेगा। मशीनरी, वर्कर के काम के लिए स्पेस चाहिए होगा। इक्विपमेंट्स में दूरी होगी तो वर्कर्स भी दूर-दूर रहकर काम करेंगे। इस वजह से एफएआर बढ़ना जरूरी है। अभी 50 परसेंट ग्राउंड कवरेज एरिया की इजाजत है। इसे बढ़ाकर 60 से 70 परसेंट किया जाना चाहिए। विष्णु गोयल, प्रदेश अध्यक्ष, हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
  • गवर्नमेंट ने एक एकड़ से ज्यादा एरिया में 10 परसेंट एरिया पर लेबर हाउसिंग बनाने की इजाजत दी है। इससे कम एरिया के प्लॉटों में भी लेबर हाउसिंग बनाने की इजाजत मिलनी चाहिए। कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व में सभी देशों को आर्थिक नुकसान हुआ है। इंडस्ट्री को इससे बहुत नुकसान हुआ है। ऐसे में लेबर को अंदर रखना होगा। इसके लिए जरूरी है कि इंडस्ट्रियल प्लॉट में ही लेबर हाउसिंग की व्यवस्था हो। इसके लिए हर इंडस्ट्रियल प्लॉट में 20 परसेंट एरिया लेबर हाउसिंग के लिए इस्तेमाल की इजाजत होनी चाहिए। रजनीश गर्ग, उप प्रधान, हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
  • नई इंडस्ट्रियल पाॅलिसी में आने वाले उद्योगों को रियायतें मिलनी चाहिए। पहले से चल रही इंडस्ट्री को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इंडस्ट्री को टेक्निकली क्वालिफाइड वर्कर की जरूरत है। इसकी व्यवस्था सरकार की तरफ से होनी चाहिए। शहरों में महंगी जमीन और प्रदूषण बढ़ने के कारण छोटे उद्योग गांवों में लगने चाहिए। इसके लिए गांवों में सड़क, निरंतन बिजली व अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मिलना चाहिए। अभी बिजली 9 से 11 रुपये प्रति यूनिट मिल रही है जोकि 5-6 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सी.बी. गोयल, पूर्व अध्यक्ष, हरियाणा चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
  • गांवों में अगर कोई जिमींदार के पास ज्यादा जमीन हैं। वह इसे चार अलग अलग व्यक्तियों में बेचता है तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट कालोनाइजेशन मानते हुए रजिस्ट्री करने से मना कर देता है। इससे इंडस्ट्री लगाने में दिक्कत आती है। रायपुररानी रूरल एरिया में आता है। यहां कई जिमींदारों के पास काफी जमीन है लेकिन वह इसे टुकड़ों में नहीं बांट पा रहे हैं। नई पॉलिसी में इसमें बदलाव किया जाना चाहिए। जिमींदार को परमिशन होनी चाहिए कि वह अपनी जमीन मर्जी से ज्यादा लोगों में बेच सके। अशोक सिंगला, अध्यक्ष, ऑटो इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
  • पड़ोसी शहर मोहाली में एफएआर 3 है। बिल्डिंग की हाईट 100 फुट तक करने की इजाजत है। इंडस्ट्री में 10 परसेंट एरिया हाउसिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। कुल एरिया का 30 परसेंट कमर्शियल एक्टिविटीज के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इंडस्ट्री में होस्पिटेलिटी, अस्पताल, लोजिस्टिक से जुड़े कामधंधे करने की छूट हैं। हरियाणा गवर्नमेंट अगर इंडस्ट्री का हित चाहती हैं तो ज्यादा नहीं तो मोहाली के बराबर फैसिलिटी को पंचकूला को दें। -अरूण ग्रोवर, चेयरमैन, इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन
  • इंडस्ट्रियल एरिया में फ्री ट्रेड जोन बनना चाहिए। इसमें सर्विस सेक्टर को भी अनुमति हो। इंडस्ट्री में लेबर क्वार्टर बनाने की इजाजत होनी चाहिए। अभी लेबर झुग्गी-झोपड़ी में रह रही है। यह झुग्गियां कभी भी हट सकती है। लेबर के रहने के लिए उचित व्यवस्था करना जरूरी है। सेक्टर 28 में बनने वाले फ्लैटों का निर्माण जल्द होना चाहिए। शहर में अन्य जगह पर भी इनके रहने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए। -एएल अग्रवाल, इंडस्ट्रलिस्ट
  • मुख्यमंत्री ने करनाल में इंडस्ट्री को ज्यादा एफएआर देने की घोषणा की थी। इस बारे में नोटिफिकेशन करने के भी दावे किए गए हैं। अभी तक इंडस्ट्री को अतिरिक्त एफएआर नहीं मिल पाया है। स्टेट में एफएआर बढ़ना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया में सर्विस सेक्टर को अनुमति दी जानी चाहिए। यहां हैल्थ केयर, ऑफिस, लोजिस्टिक, होस्पिटेलिटी, एजुकेशन, बल्क ट्रेड की छूट मिलनी चाहिए। -ओपी चुग, राज्य कार्यकारिणी सदस्य, चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
  • यहां कोई इंडस्ट्री नहीं है। नई पॉलिसी में बड़ी इंडस्ट्री को लाने का प्रावधान होना चाहिए। इससे छोटी इंडस्ट्री को काम मिलेगा। साथ ही किसी भी प्लॉट में कुछ भी काम करने की छूट मिलनी चाहिए। हरियाणा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं है। कच्चा माह अन्य स्टेट से आता है और यहां तैयार होकर दूसरे राज्यों में जाता है। इससे कॉस्ट ऑफ प्रॉडक्शन बढ़ जाती है। यहां स्टील प्लांट, कपड़े तैयार करने के लिए धागा मिल जैसे कच्चा माल उपलब्ध कराने वाली इंडस्ट्री भी लगनी चाहिए। -विशाल जैन, उप प्रधान, इंडस्ट्रीज एसो. पंचकूला
  • स्टेट में हर एरिया की अपनी जरूरतें हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पॉलिसी बननी चाहिए। राज्य में विभिन्न इंडस्ट्री के अलग अलग जगह कलस्टर बने। पॉलिसी बनाते वक्त लोकल इंडस्ट्रलिस्ट्स की भागेदारी हो। इंडस्ट्री से सलाह-मशविरे के बाद ही पॉलिसी तय हो। वर्ना पॉलिसी बनती है और लोगों को कुछ समझ नहीं आता। इसका किसी को भी फायदा नहीं मिल पाता है। कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप कम होना चाहिए। स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलना चाहिए।-राकेश गर्ग, जनरल सेक्रेटरी, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन पंचकूला
  • एग्रो बेसड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का विस्तार हो। स्टेट में गेंहू की ब्रेड बने। सूरजमुखी या सरसों का तेल बने। कपास का धागा बने। इस क्षेत्र में इंडस्ट्री के लिए काफी स्कोप है। वेयरहाउस और गोदाम भी बनने चाहिए जहां खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सके। मेन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देने के लिए कई तरह की रियायतें मिलनी चाहिए। चंडीगढ़ की तर्ज पर पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में भी सर्विस सेक्टर की छुट होना चाहिए। वरिंद्र गर्ग, ज्वाइंट सेक्रेटरी, इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन
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