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धोखाधडी:एचएसवीपी ने डेढ़ महीने बाद सस्ता रेट बता 4 प्लॉटों के पैसे वापस किए

पंचकूला6 दिन पहले
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  • 25 अगस्त की ऑक्शन में एचएसवीपी ने एमडीसी सेक्टर-6 पंचकूला के चार प्लॉट बेचे थे

(अमित शर्मा) पिछले कई महीनों से लगातार कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की ऑक्शन करवा रहे अब एचएसवीपी की पाॅलिसी काे लेकर अधिकारियों पर भी सवाल खड़ा हो गया है। एचएसवीपी ने 25 अगस्त को एमडीसी सेक्टर-6 के प्लॉट्स की ऑक्शन करवाई थी, जिसमें 5 प्लॉट्स में से चार बेसिक प्राइस से ऊंचे दाम पर बिके थे।

जिसके बाद अलॉटियों से 10 प्रतिशत अमाउंट भी जमा करवा दी गई थी, लेकिन जब अलॉटी पोजेशन लेटर लेकर अलॉटमेंट लेटर का इंतजार कर रहे थे अाैर मकान का नक्शा बनवाने में लगे हुए थे तब उन्हें बिना कुछ बताए उनकी जमा अमाउंट वापस भेज दी गई। यानी एचएसवीपी की ओर से यहां एमडीसी के प्लॉट्स की ऑक्शन को ही कैंसिल कर दिया गया है। वहीं, 2011 के बाद इस तरह की कार्रवाई की गई है। 2011 में कमर्शियल प्रॉपर्टी की ऑक्शन को सेक्टर 6 इस्टेट ऑफिस में मौके पर ही बोली के दौरान कैंसिल कर दिया गया था। खास बात यह है कि एमडीसी एरिया के प्लॉट 2 करोड़ 72 लाख रुपए में अलॉट होने पर एडमिनिस्ट्रेटर को फीड बैक दिया गया कि ये सस्ते रेट पर गए हैं। ऐसे में एडमिनिस्ट्रेटर के पास पावर है कि वह एक सप्ताह में किसी भी ऑक्शन को कैंसिल कर सकता था।

खुली बोली में ये पावर 24 घंटे के लिए होती थी। लेकिन खास बात ये है कि ये कैंसिलेशन डेढ़ महीने के दौरान की गई। जबकि कार्रवाई सिर्फ 7 दिनों में हो सकती है। उस दौरान तो एचएसवीपी की ओर से अलॉटमेंट लेटर बनाने की तैयारी की जा रही थी। ऐसे में एचएसवीपी की ओर से लापरवाही बरती गई। इस बार हो रही ऑक्शन में ही एचएसवीपी को रिस्पांस आया है, जबकि पहले तो लगातार ऑक्शन फेल होती रही है।

अलॉटी बोले- एमडीसी सेक्टर-6 के प्लॉट्स की ऑक्शन के नाम पर एचएसवीपी ने किया धोखा

1. एमडीसी सेक्टर-6 में प्लॉट नंबर 583 के लिए बोली लगाने वाले नवनीत ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से रजिस्ट्रेशन करवाया था। 2 करोड़ 47 लाख रुपए के बेसिक प्राइज को क्रॉस करने के बाद 2 करोड़ 69 लाख रुपए में हमें ये प्लॉट मिला था। हमने पॉलिसी के अनुसार 24 घंटे में 10 प्रतिशत अमाउंट 27 लाख रुपए भर दिए थे।

अब डेढ़ महीने के बाद हमारे पैसे वापस आ गए हैं। जब इस्टेट ऑफिस, एडमिनिस्ट्रेटर ऑफिस में पता किया ताे कोविड के कारण मिलने से इंकार दिया। इसके बाद नक्शा पास करवाने के लिए काम किया जा रहा था। मै कई बार एचएसवीपी के ऑफिस में गया। लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया, बल्कि बोला कि कुछ दिन में एलओए आ जाएगा। लेकिन यहां तो प्राइवेट बिल्डर वाला काम ही कर दिया।

2. प्लॉट नंबर 585 के लिए 2 करोड़ 72 लाख की बोली लगाने वाली किरण भाटिया ने बताया कि उनके साथ एचएसवीपी ने धोखा किया है। कलेक्टर रेट के हिसाब से डेढ़ करोड़ का प्लॉट बनेगा, लेकिन बेसिक प्राइज के चक्कर में इन्होंने 2 करोड़ 47 लाख रुपए की अमाउंट रखी थी।

उसके बाद हमने बोली लगाकर 10 प्रतिशत के हिसाब से 27 लाख रुपए अगले दिन ही जमा करवा दिए थे। लेकिन डेढ़ महीने बाद हमारी पेमेंट वापस कर दी गई। जिसके बारे में कोई स्पष्ट जवाब ही नहीं है। यह तो धक्के शाही है।

3. प्लॉट नंबर 584 के लिए बोली लगाने वाले कुनाल सेकरी ने बताया कि उनके भाई सौरभ तायल के नाम से रजिस्ट्रेशन किया गया था।2 करोड़ 73 लाख में इस प्लॉट को लिया गया, अब हम अलॉटमेंट लेटर का इंतजार कर रहे थे। लेकिन रुपए ही वापिस आ गए। हमारे सपनों को एचएसवीपी ने तोड़ दिया। हमने रुपए जमा करवा दिए थे, अगला प्रोसेस शुरू कर दिया था, लेकिन डेढ़ महीने बाद हमारे साथ ऐसा किया गया है। जो गलत है।

एक्सपर्ट्स कमेंट

इस सारे मामले में तो लोगों का एचएसवीपी से विश्वास ही उठ जाएगा। एचएसवीपी ने खुद अब तो नई पॉलिसी के हिसाब से अलॉटमेंट करना, ऊंची बोली लगाने वाले को प्लॉट का ऑप्शन देना शुरू किया है। बेसिक प्राइज तो पहले खोला ही नहीं जाता है। ऐसे में अब अगर एचएसवीपी ने खुद ही कहीं किसी प्वाइंट पर गलती की है तो ऐसे लोगों से धोखा नहीं करना चाहिए।

ऐसे में एचएसवीपी को अपनी गलती सुधारना चाहिए। अब इन लोगों की ओर से एचएसवीपी में एडमिनिस्ट्रेटर के पास अपील डाली जाएगी। उसके बाद कोर्ट का भी रूख किया जा सकता है। क्योंकि पॉलिसी के अनुसार काम 24 घंटे से 7 दिनों में किया जाना चाहिए था, लेकिन डेढ़ महीने बाद अपनी मर्जी चलाना गलत है।

रिजर्व प्राइस से कम रेट पर बोली रही: ईओ
इस्टेट ऑफिसर एके दून ने बताया कि एचएसवीपी ने पॉलिसी के हिसाब से इस ऑक्शन को कैंसिल किया है। असल में ऑक्शन होने के बाद पूरी रिपोर्ट एचएसवीपी के चेयरमैन तक जाती है। जब रिपोर्ट ऊपर तक भेजी गई तो सामने आया कि बेसिक प्राइस तो क्रॉस हो गया। लेकिन रिजर्व प्राइस से कम रेट पर बोली रही है।

इसलिए इस ऑक्शन को कैंसिल किया है। अब दोबारा से ऑक्शन को रखा जाएगा। वही देरी होने का कारण है कि रिजर्व रेट सामने आने के बाद कमेटी निश्चित करती है कि इस मामले में क्या किया जाए। जिसकी रिपोर्ट एफसी तक भेजी जाती है। उसके बाद ही कोई एक्शन लिया जा सकता है।

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