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जांच शुरू:‘क्या सरकारी अस्पताल में मेंटल और फिजिकल टॉर्चर हुए बिना बच्चा पैदा करना कोई जुर्म है

पंचकूला6 दिन पहलेलेखक: संदीप काैशिक
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  • गलत डिलीवरी के मामले में एक डाॅक्टर, दाे स्टाफ नर्स, एक स्वीपर, एक फोर्थ क्लास कर्मी समेत शिकायतकर्ता के भी हुए बयान दर्ज
  • जांच कमेटी के सामने पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज
  • ये मेरे साथ ही नहीं, सरकारी अस्पताल में एडमिट हर महिला के साथ हाे रहा है’

क्या सरकारी अस्पताल में बिना मेंटली और फिजिकली टॉर्चर हुए बच्चा पैदा करना जुर्म है। क्या सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला काे बिना किसी टॉर्चर के बच्चा पैदा करने का अधिकार नहीं है। यह मेरे साथ ही नहीं हुआ, वहां हर मरीज के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। क्या मेडिकल स्टाफ या सरकार गर्भवती महिला की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेती है।

ये सवाल पीड़ित पक्ष की ओर से मेडिकल जांच कमेटी से पूछा गया है। दरअसल, कालका अस्पताल में 28 मार्च काे हुई महिला की गलत डिलीवरी के मामले में बुधवार काे सीएमओ ऑफिस में कमेटी की ओर से जांच की गई। इस दाैरान पीड़ित पक्ष के भी बयान लिए गए और डिलीवरी के वक्त जिस डाॅक्टर, स्टाफ नर्स, फोर्थ क्लास और स्वीपर के भी बयान दर्ज किए गए।

अब दाेबारा से मंगलवार काे जांच कमेटी की ओर से सभी काे जांच में शामिल हाेने के लिए बुलाया गया है। वहीं, पीड़ित परिवार की ओर से अब पंचकूला पुलिस काे भी शिकायत दी जा सकती है, जिसमें परिवार ने डिलीवरी के दौरान हुई लापरवाही के मामले में जांच के लिए कहा जाएगा।

इलाज के लिए अब परिवार उठा रहा पड़ोसियाें से कर्ज

पीड़ित महिला के चाचा गुरभान सिंह ने बताया कि निशा अभी भी पीजीआई में ही एडमिट है। उसकी हालत अभी भी ठीक नहीं है। अब ताे इलाज का खर्च उठाने के लिए भी पड़ोसियाें से कर्ज लेना पड़ रहा है। पीजीआई में अभी तक करीब सवा लाख रुपए का खर्च आ चुका है। सीएमओ डाॅ. जसजीत काैर ने बताया कि इस मामले में तीन सीनियर डाॅक्टराें की टीम जांच कर रही है।

पहले दिन से ही इस मामले काे गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच कमेटी ने डाॅक्टर के साथ दाे स्टाफ नर्स, फोर्थ क्लास कर्मी और स्वीपर के भी बयान दर्ज किए है। पीड़ित पक्ष के भी बयान दर्ज किए गए है। अब दाेबारा से सभी काे बुलाया गया है, जिसके बाद जांच के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच कमेटी की ओर से पीड़ित पक्ष से पूछे गए 8 सवाल

क्या डिलीवरी से पहले मरीज रेगुलर चेकअप करवा रहा था? -हां, मरीज कालका सरकारी अस्पताल में ही रेगुलर चेकअप करवा रही थी।

27 मार्च काे किस समय और किसने मरीज काे दाखिल किया? -उस दिन पति कुलदीप ने 10 से 11 बजे के बीच दाखिल करवाया था, उस वक्त डाॅ. ज्योति की ड्यूटी थी।

दाखिले के वक्त हालत कैसी थी, किसी ने बताया कि ऑप्रेशन हाेगा? -दाखिले के वक्त मरीज बिल्कुल ठीक थी, किसी डाॅक्टर ने नहीं बताया कि ऑप्रेशन हाेगा।

कितना स्टाफ अवेलेबल था? 2 स्टाफ नर्स और एक सफाई कर्मचारी माैजूद थी।

27 मार्च काे क्या हुआ था, विस्तार में बताएं? -उस रात काे मैं राज रानी और मेरी ननद काैशल्या अपनी पुत्रवधू निशा के साथ सरकारी अस्पताल कालका में माैजूद थी। 28 मार्च काे सुबह 3 बजे निशा काे पेट में दर्द हुआ, मैं स्टाफ नर्स काे बुलाने के लिए गई ताे वहां काेई नहीं था। काफी देर तक ढूंढने के बाद अस्पताल की एक साइड में स्टाफ नर्साें काे देखा जाे साेई हुई थी।

जब उन्हें बताया ताे वे मिसबिहेव करने लगी और कहा कि तुम भी जाकर साे जाओ और हमें भी साेने दाे, दर्द ताे ऐसे ही हाेता रहता है। जब 7 बजे दाेबारा से हालत खराब हुई ताे वे गुस्से से उठकर मेरी पुत्रवधू काे देखने के लिए आई।

रात काे किस स्टाफ ने आपके साथ मिसबिहेव किया? - उस दिन किसी कर्मचारी ने नहीं किया, लेकिन 28 मार्च सुबह 3 बजे और 7 बजे मिसबिहेव किया गया।

28 की सुबह डिलीवरी के बाद दिक्कत के बारे में किसने बताया? -सुबह डिलीवरी के बाद दिक्कत के बारे में हमें नहीं बताया और न बाद में बताया। इतना बताया कि सेक्टर-6 पंचकूला में जाओ, हमें और भी डिलीवरी करनी है।

डिलीवरी के कितने समय बाद सेक्टर-6 रेफर किया गया? -15 से 20 मिनट बाद रेफर किया।

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