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समस्या:पानी की सप्लाई देने में नगर निगम असमर्थ, कम बजट का दिया हवाला

पंचकूलाएक महीने पहले
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सेक्टर-एक में बना कजौली से आ रहे पानी का तालाब। - Dainik Bhaskar
सेक्टर-एक में बना कजौली से आ रहे पानी का तालाब।
  • सरकार के आदेश पर एचएसवीपी की ओर से दिसंबर में ट्रांसफर किया जाना था निगम को पानी सप्लाई का काम

हरियाणा सरकार के आदेश के अनुसार पंचकूला में पानी सप्लाई का काम हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) से नगर निगम पंचकूला को ट्रांसफर किया जाना है। लेकिन निगम पानी सप्लाई के खर्च और अपने बजट को देखकर अपने हाथ पीछे खींच रहा है।

ऐसे में अब शहर के पानी की सप्लाई एचएसवीपी ही करेगा, लिहाजा एचएसवीपी की ओर से शहर के लोगों पर एक साथ 18 करोड़ रुपए का बोझ डाल दिया गया है। वहीं सरकार कभी भी दखल देकर काम निगम को ट्रांसफर कर सकती है।

एचएसवीपी भेज रहा एक साथ 9 महीने का बिल
रिकॉर्ड के अनुसार शहर के 32,600 पानी के कनेक्शनों का पानी का बिल महीने के हिसाब से 2 करोड़ 25 लाख है। जिसे अभी तक आधे शहर का एक महीने तो आधे शहर का दूसरे महीने के हिसाब से जमा करवाया जाता था। लेकिन कोविड 19 के चलते मई-जून से लोगों काे पानी का बिल भेजा ही नहीं गया था।

ऐसे में अब एचएसवीपी की ओर से शहर के लोगों को इस बार एक साथ 9 महीने का पानी का बिल भेजा गया है। इससे पहले दो महीने का बिल जमा करवाने को कहा जाता था। वहीं, अभी तक बिलों के लिए एजेंंसी हायर की हुई थी, लेकिन अब एचएसवीपी की इंजीनिरिंग विंग खुद बिलों का काम देख रही है। ऐसे मेंं अब हर महीने लोगों को पानी बिल भेजे जाएंगे।

कई लेटर भेजे, लेकिन लिखित में नहीं आ रहा जवाब

एचएसवीपी की ओर से लिखित में कई बार निगम ऑफिस, अर्बन लोकल बॉडी को ऑर्डर की कॉपी के साथ पानी की सप्लाई, मेंटेनेंस का चार्ज संभालने काे कहा गया। लेकिन अभी तक भी निगम की ओर से कोई भी जवाब नहीं अाया है। सूत्रों के अनुसार एचएसवीपी के अधिकारियों को फोन पर कई बार जवाब मिला कि करोड़ों रुपए का बजट हर महीने पानी सप्लाई के लिए खर्च करना निगम के बस की बात नहीं है। निगम के पास इतना बजट ही नहीं है।

वाटर सप्लाई, मेंटेनेंस और सीवरेज के आए थे आदेश

24 नवंबर 2020 को हरियाणा सरकार की ओर से पंचकूला के साथ-साथ अंबाला, करनाल, जगाधरी, हिसार, पानीपत, रोहतक, सोनीपत के अर्बन इस्टेट एरिया के लिए ऑर्डर जारी हुए थे। जिसमें कहा गया कि पंचकूला के 28 सेक्टरों की वाटर सप्लाई, मेंटेनेंस, सीवरेज का काम निगम को दिया जाएगा। जिसमें सेक्टर-2, 4, 6 से सेक्टर-19, इंडस्ट्रियल एरिया फेज एक, दो, एमडीसी सेक्टर-4, 5, सेक्टर-20, 21, 23, 24, 25, 26, 27, 28 शामिल है।

हर महीने 4 करोड़ 75 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर लोगों को मिलता है पानी...

शहर में टयूबवेलों के पानी को प्रेशर किया जाता है, ताकि वो बिना मोटर के फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच सकें, इसके लिए अलग अलग सेक्टरों मेंं बूस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं। जबकि इन स्टेशन के साथ अंडरग्राउंड पानी के टैंक भी बनाए गए हैं, ट्यूबवेल 24 घंटे चलकर इस टैंक को भरते हैं और उसके बाद पानी बूस्टिंग स्टेशन से प्रेशर कर लोगों के घरों में पहुंचाया जाता है।

रोजाना बूस्टिंग स्टेशन चलाने, 180 के करीब टयूबवेलों को 18 से 22 घंटे चलाने, कजौली से आने वाले पानी को ट्रीट करने, बूस्टिंग करने के चलते 2 करोड़ 25 लाख रुपए से लेकर 2 करोड़ 31 लाख रुपए तक बिजली का बिल आता है। इस बिल को एचएसवीपी अपने खर्च से भरता है। जिसके लिए एडमिनिस्ट्रेटर ऑफिस की ओर से बजट पास किया जाता है।

वहीं पानी के काम के लिए अधिकारियों सहित 400 कर्मचारियों की सैलरी, बूस्टिंग स्टेशन की मेंटेेनेंस, ट्यूबवेलों की मेंटेनेंस पर हर महीने करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपए से लेकर 3 करोड़ तक खर्च आता है। यानी कुल मिलाकर एचएसवीपी का हर महीने पानी पर 4 करोड़ 75 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आता है।

मेरी निगम कमिश्नर से मीटिंग में चर्चा हुई थी..
इस संबंध में मेरी निगम कमिश्नर से मीटिंग में चर्चा हुई थी। असल में पानी की सप्लाई का काम और सीवरेज हमें ट्रांसफर होने हैं, जिनका खर्चा भी ज्यादा होगा। ऐसे में ये दोनों काम ट्रांसफर होने के साथ-साथ अगर सरकार की ओर से फंड्स भी जारी होते हैं तो हमें ये देखना होगा कि इतना खर्च पूरा कैसे हो सकता है, अभी इन सभी पहलुओं पर चर्चा चल रही है। जिसके बाद ही तय होगा कि कब तक पानी निगम के हवाले होगा। कुलभूषण गोयल, मेयर, पंचकूूला नगर निगम

एचएसवीपी ने मई-जून से पानी के बिल भेजे ही नहीं थे...
हमारी ओर से निगम को लेटर भेजे गए हैं, वहां से अभी तक टेकओवर करने के लिए कोई जवाब नहीं आया है। क्योंकि उन्हें या तो स्टॉफ हमारा ही लेना होगा नहीं तो अपना स्टॉफ भर्ती करना होगा, वहीं कुछ दिनों तक हमारे स्टॉफ से टेक्निकल पहलू जानने होंगे।

वहीं, लाइन की लोकेशन से लेकर उसकी चौड़ाई, गहराई सहित कई प्वाइंट्स हैं, जिसके बारे में अभी तक निगम की ओेर से कुछ पूछा ही नहीं गया है। हां, हमने शहर में 18 करोड़ रुपए के बिल भेजे हैं, क्योंकि लॉकडाउन के कारण एचएसवीपी ने मई-जून से पानी के बिल भेजे ही नहीं थे।
एनके पायल, एक्सईएन, वाटर सिस्टम इंचार्ज पंचकूला

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