पंचकूला:अब प्रॉपर्टी टैक्स का रिकॉर्ड देने और रेजिडेंट को बिल भेजने के लिए तैयार हुई एजेंसी

पंचकूलाएक वर्ष पहले
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  • एमसी कमिश्नर ने एजेंसी के खिलाफ लीगल कार्रवाई करने की दी थी चेतावनी

आखिरकार साईं कंस्ट्रक्शन एजेंसी शहर में प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड तैयार करने और इसे एमसी को ट्रांसफर करने के लिए राजी हो गई है। पंचकूला नगर निगम ने एजेंसी को मई माह में नोटिस जारी किया था।   एक माह पहले एमसी में कमिश्नर का पदभार संभालने वाले महावीर सिंह ने भी चेतावनी दी थी कि अगर एजेंसी ने काम शुरू न किया तो उसके खिलाफ लीगल कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद एजेंसी शहर में दोबारा काम शुरू करने के लिए राजी हो गई है। एजेंसी ने शहर में हर प्रॉपर्टी का बकाया टैक्स का बिल तैयार कर इसे भेजना भी शुरू कर दिया है।

कंपनी को अप्रैल, 2016 में शहर में प्रॉपर्टी टैक्स का सर्वे करने का जिम्मा सौंपा गया था। इसमें एजेंसी को डोर-टू-डोर सर्वे कर एमसी एरिया में पड़ने वाली हर रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल प्रॉपर्टी के मालिक, प्रॉपर्टी के साइज, एरिया के हिसाब से टैक्स का रिकॉर्ड तैयार करना था। रेजिडेंट्स की आेर से 2010 से 2016 तक जमा कराए गए प्रॉपर्टी टैक्स का रिकॉर्ड भी तैयार करना था। कॉन्ट्रेक्ट के मुताबिक एजेंसी को छह माह में यह काम पूरा करना था।

यह काम छह माह में पूरा न होने के बाद एजेंसी ने कुछ समय बढ़ाने की मांग की। एजेंसी को पूरा रिकॉर्ड तैयार करने के लिए कुछ समय दे दिया गया। एजेंसी को एमसी एरिया की हर प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड तैयार कर इसे पंचकूला नगर निगम को ट्रांसफर करना था। इस काम के लिए पंचकूला नगर निगम ने एजेंसी को 17 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से पेमेंट देनी थी। एमसी के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में कुल 1.57 लाख रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और इंस्टीट्यूशनल प्रॉपर्टी हैं।

बाद में एमसी और एजेंसी में पेमेंट को लेकर विवाद होने पर एजेंसी ने काम बंद कर दिया और तैयार रिकॉर्ड एमसी को ट्रांसफर नहीं किया। साल 2010 से 2016 तक जमा हुए प्रॉपर्टी टैक्स को पंचकूला नगर निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं था। एमसी को उम्मीद थी कि एजेंसी की मदद से रिकॉर्ड तैयार कर लेंगे जिससे आने वाले समय में इसमें नया रिकॉर्ड मेंटेन होता रहेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभी भी पंचकूला नगर निगम के पास हर साल प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने वाले लोगों का प्रॉपर रिकाॅर्ड तक नहीं है। एमसी को अभी तक शहर में ऐसी कई प्राॅपर्टी हैं जिनका यह नहीं पता कि इनकी ओर से आज तक टैक्स जमा कराया गया हैं या नहीं? इनकी तरफ से जमा टैक्स सही भी हैं या नहीं?

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