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पहले कारोबारी:जब पंचकूला में कोई सामान नहीं मिलता था तब हमने यहां बिजनेस शुरू किया

पंचकूलाएक महीने पहले
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  • सेक्टर-7 में पहला बूथ खरीदा था हरबंस सिंह ने, सेक्टर-8 में पहला बूथ कुलदीप चितकारा ने खरीदा

बंटवारे से पहले परिवार लाहाैर के ऊटी मदान गांव में रहता था। 1947 में बंटवारा हुआ ताे परिवार पंजाब के खन्ना शहर आ गया। फिर पटियाला में रहने लगे। घर का खर्च चलाने के लिए दुकानों पर काम किया। चंडीगढ़ बना तो यहां सैटल हो गए। पंचकूला बनना शुरू हुआ तो साल 1978 में बिजनेस के लिए सेक्टर-7 में बूथ खरीद लिया। यह कहना है चंडीगढ़ सेक्टर-28डी में रहने वाले हरबंस सिंह का। पंचकूला में सबसे पहले बिजनेस स्टार्ट करने वाले वह गिने-चुने लोगों में से एक हैं। आज सिंह संस के नाम से उनकी सेक्टर 7 और 11 में मशहूर कंफेक्शनरी की दुकानें हैं।

वह कहते हैं- तब पंचकूला का यह एरिया जंगल था। अगर कोई इंसान यहां घूमता दिखे तो कुत्ते भौंकते थे। हमने 1978 में बूथ के लिए प्लॉट ऑक्शन में खरीदा था, 52 हजार रुपये में। हम नए डेवलप हो रहे पंचकूला को देखने आए थे। यहां कमर्शियल प्रॉपर्टी की ऑक्शन के बारे में पता चला तो हम भी ऑक्शन में बैठ गए और बूथ भी खरीद लिया। 1987 में एक और बूथ लिया, जो 2.50 लाख रुपये में मिला था। बिजनेस जमाने के लिए काफी स्ट्रगल किया। उन दिनों में अखबार भी बांटे और दूध भी बेचा। दूध सप्लाई करने के लिए रेहड़ी भी चलाई है। चाय बनाने का भी काम किया। पंचकूला में तब कोई सामान नहीं मिलता था, न ही यहां कोई सामान सप्लाई करने आता था। चंडीगढ़ से ही सारा सामान लाना पड़ता था। हमने तब अपना बिजनेस यहां शुरू किया था। उन दिनों सेक्टर-7 व आसपास अमरूद के बाग होते थे। पूरे पंचकूला में चार-पांच ही दुकानें थी।

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