प्रशासन ने किया नजरअंदाज:पिंजौर में कई प्रोजेक्ट अधर में लटके, निर्माण सामग्री हो रही चोरी

पिंजौर2 महीने पहले
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पिंजौर मेन बाजार में 7 साल से अधर में लटका फाउंटेन का काम। - Dainik Bhaskar
पिंजौर मेन बाजार में 7 साल से अधर में लटका फाउंटेन का काम।
  • कुछ प्रोजेक्ट तो कोर्ट के आदेश पर शुरू हुए

सरकार की ओर से जनसुविधाओं के लिए करोड़ों का बजट बनाकर उसके प्रोजेक्ट लगा तो दिए जाते है परंतु सरकार के अपने ही विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण उन प्रोजेक्टों का लाभ जनता को तो मिल नहीं पाता उल्टा सरकार के पैसे ही बर्बादी जरूर होती है।

कुछ ऐसे ही प्रोजेक्टों का सरकार का करोड़ों रुपए पिंजौर क्षेत्र में लगा हुआ है जिसका आज तक लोगों को कोई लाभ नहीं हो पाया। उधर सरकार के जिन अधिकारियों की देखरेख में इन पर पैसा लगा था सरकार ने उनसे कोई जवाब तक नहीं मांगा।

इन पर करोड़ों रुपए लगने से कोई भी लाभ नहीं मिलने पर लोगों में भारी रोष भी है। इसमें कई प्रोजेक्ट पिंजौर में नगरपालिका तो कई नगर निगम ने अपने कार्यकाल में लगवाए व शुरू किए थे जिसकी आज तक दोबारा कोई भी सुध नहीं ली जा रही। हैरानी की बात तो यह है कि शहर में बंद पड़े व अधर में लटके इन प्रोजेक्टों की जानकारी नगर परिषद के अधिकारियों को भी नहीं है।

जनसुविधा के लिए इन प्रोजेक्टों पर लगा सरकार का करोड़ों रुपए

नगर पालिका के कार्यकाल में करीब 18 वर्ष पूर्व कोर्ट के आदेश पर नगरपालिका ने पिंजौर कालका में जानवर काटने के लिए दो अलग-अलग स्लाटर हाऊस बनवाए थे जिसमें पिंजौर के लिए करीब 14 लाख रुपए की लागत से कौशल्या नदी के पास स्लाटर हाऊस बनवाया गया था। जो करीब 6 माह चला होगा उसके बाद से वे बंद ही पड़ा है। कई वर्षों से जिसका इस्तेमाल नगर परिषद पिंजौर के कर्मचारी की ओर से किया जा रहा है।

पिंजौर में ट्रैफिक समस्या व सड़क हादसों के चलते हाईकोर्ट की ओर से 2007 में नगरपालिका को पिंजौर थाने के सामने टी पॉइंट पर ट्रैफिक लाइट लगवाने के आदेश दिए थे जिस पर उस समय नगरपालिका ने अप्रैल 2007 को टी पॉइंट पर लाखों रुपए की लागत से ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए ट्रैफिक लाइट लगवा दी गई। लगभग चार महीने मुश्किल से ट्रैफिक लाइट चालू रही उसके बाद बंद हो गई जो आज तक दोबारा चालू ही नहीं करवाई गई।

पिंजौर-कालका मेन रोड बाजार के बीच सड़क किनारे प्राचीन तालाब के सौंदर्यीकरण का काम नगर निगम ने जनवरी 2014 में शुरू करवाया था, इस पर 3 माह में लाखों रुपए खर्च करके काम बीच में ही छोड़ दिया, जो सामान लगा था कुछ चोरी हो गया तो कुछ टूट गया।

पिंजौर पीरमसाला काॅलोनी में केंद्र की आवासीय योजना के अंतर्गत 2012 में आवास एवं शहरी उन्मूलन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिक सवर्धन परिषद के तहत गरीबों के लिए कम लागत तकनीकों पर आधारित 24 मकान तैयार हुए थे परंतु 9 वर्ष होने के बाद भी अलाॅट नहीं हुए, निगम ने इसकी मरम्मत पर लाखों खर्च भी कर दिया।

हिमशिखा काॅलोनी में धर्मशाला पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुमारी सैलजा 11 लाख रुपए लगवाए थे, परन्तु उसके बाद नगर निगम एक भी ईंट तक नहीं लगवाई। अब अधूरी धर्मशाला को लोग इस्तेमाल नहीं कर सकते है, आगे काम पूरा न होने के कारण जो काम हुआ है उसकी भी अब हालत जर्जर होने लगी है। शहर में इन प्रोजेक्टों के बारे में बात करने के लिए नप ईओ निशा शर्मा को फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, मैसेज करके इसके बारे में पूछा गया तो उसका भी जवाब नहीं दिया।

जनता के पैसे की हुई बर्बादी

जनता पहले नगर निगम तो अब नगर परिषद में प्रॉपर्टी टैक्स व डेवल्पमेंट चार्ज जमा करवा रही है परन्तु उसके बदले में जनता को आधी-अधूरी भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही। सरकार का जो करोड़ों रुपए की बर्बादी हो रही है जो जनता ने ही टैक्स के रूप में जमा करवाया है, नए प्रोजेक्ट तो लगाना दूर की बात है जो पुराने लगे है उन्हें ही जनता के लिए दुबारा से ठीक करके शुरू करवाया जाए।

-पवन कुमारी शर्मा, महासचिव प्रदेश महिला कांग्रेस।

पूरी डिटेल भेजो, इन्हें चेक करवाते हैं : एक्सईएन

​​​​​​​​​​पिंजौर में जो प्रोजेक्ट बंद पड़े या फिर अधर में लटके है उनकी पूरी डिटेल वटसएप कर दो उन्हें चेक करवाकर आगे की कार्यवाई करेंगे।

- हरीश कुमार, एक्सईएन नगर परिषद।

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