रियलटी चेक / तीस मिनट में 21 टिपर निकले, एक के भी पीछे रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं

21 tippers came out in thirty minutes, no registration number behind one
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21 tippers came out in thirty minutes, no registration number behind one

  • नारायणगढ़ से सैकड़ों की तादाद में रायपुररानी से गुजरने वाले टिपर लोगों के लिए सिरदर्द बने, हादसा होने का भी डर

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

रायपुररानी. नारायाणगढ़ से सैकड़ों की तादाद में रायपुररानी से गुजरने वाले टिपर लोगों के लिए सिरदर्द बने हुए है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इन पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रही है। स्थिति की जायजा लेने के लिए जब 
सोमवार शाम को दैनिक भास्कर ने इनका रियलटी चेक किया तो दंग रहने वाली तस्वीरें सामने आई। तीस मिनट के अंदर रायपुररानी पुलिस स्टेशन के सामने से 21 टिपर गुजरे और जिनमें से किसी के भी टिपर की बैक साइड कोई नंबर नहीं था। एक-दो के पीछे नंबर थे, जो मिटाएं हुए थे।
हालांकि पुलिस ने मास्क चैक करने के लिए नाका लगाया हुआ था। लेकिन पुलिस की परवाह किए बना ये टिपर दौड़ते रहे। जानकारी यहां तक है कि नारायणगढ़ से सैकड़ों टिपर रायपुररानी से गुजर रहे है और जिनमें 90 फीसदी टिपरों की बैक साइड नंबर नहीं है। यदि कोई हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। पुलिस को इस पर सख्ती बरतनी होगी। 
ट्रैफिक नियमों का भी नहीं करते हैं पालन: नारायाणगढ़ से रायपुररानी की तरफ आने वाले टिपरों के लिए ट्रैफिक रुल कोई एहतियात नहीं रखते। तभी तो इन्हें टिपर के पीछे नंबर शो करना भी अच्छा नहीं लगता। चूंकि 30 मिनट देखा गया तो रायपुररानी से 21 टिपर गुजरे, जिनमें अधिकतर ओवरलोड थे। लेकिन किसी के भी पीछे रजिस्ट्रेशन नंबर नजर नहीं आया।

कइयों ने तो नंबर न नंबर प्लेट लगाई हुई थी। कइयों ने खानापूर्ति के लिए राइट-लैफट साइड नंबर लगाएं हुए थे। ऐसे में यदि कोई हादसा हो जाए तो नंबर नोट करना मुश्किल हो जाएगा और दुर्घटना को अंजाम देने वाले ये टिपर चालक आसानी से भाग जाएंगें। 
नियम तोड़ने वाले टिपर चालकों पर कार्रवाई कब?: टिपर चालकों को देखकर लगता है कि इन्हें ट्रैफिक रुल्स की पालना करना कतई बर्दाश्त नहीं है। तभी तो किसी भी ट्रैफिक रूल की ये पालना नहीं करते। टिपर चालक कहीं पुलिस के नरमी का फायदा तो नहीं उठा रहे। तभी बेरोकटोक ओवरलोड, बिना सीट बेल्ट, बैक साइड रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं, मास्क नहीं डाले हुए और यहां तक चालकों के पास लाइसेंस तक नहीं। ऐसी अनेकों खामियों के साथ सड़कों पर दौड़ रहे टिपर राहगीरों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे है। टैफिक पुलिस तो यहां जांच करने के लिए आती ही नहीं, यदि आती है तो सिर्फ आम लोगों को जांचने के लिए कि वो ट्रैफिक रुल्स की पालना कर रहे या नहीं?
टिपरों से कब-कब हुए हादसे और गई लोगों की जान : 12 दिसंबर 2016 को गढ़ी-कोटाहा गांव के पास मोरनी के टिक्कर ताल के युवक रविदत्त शर्मा (19) की मौत हो गई थी। 25 दिसंबर 2018 को भूरेवाला के पास बागवाली के बाइक सवार इकबाल और देबड़ के मुनीष को चपेट में लिया था, बागवाली के इकबाल की मौत हो गई थी। 19 मई  2019 को प्यारेवाला के पास टिपर की चपेट में आने से दो लोग जख्मी हुए थे। वहीं 17 अक्तूबर 2019 को पैक्स बैंक मैनेजर राममूर्ति को टिपर ने कुचल दिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी। जिसके बाद लोगों में रोष बढ़ गया था। तब पुलिस ने सुबह 7 बजे से 7 बजे तक हैवी व्हीकल्स की एंट्री बंद कर दी थी। लेकिन अब फिर बेरोकटोक टिपर यमराज बनकर दौड़ रहे है। 

  • ट्रैफिक रूल्स की पालना करना सभी के लिए जरूरी है, जो भी रोड पर गाड़ी ड्राइव करते है। यदि नारायणगढ़ की तरफ से बिना नंबर और ओवरलोड टिपर गुजर रहे है। ट्रैफिक पुलिस जल्द से जल्द उन पर कार्रवाई करेगी। ट्रैफिक नियम तोड़ने का किसी को अधिकार नहीं है। -सुभाष चंद्र, इंस्पेक्टर ट्रैफिक। 

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