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परियोजना:जीरकपुर में नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 18 महीने में बनकर होगा तैयार

अनूप अंजुमन | जीरकपुरएक महीने पहले
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गाजीपुर, ढकौली और पीरमुछल्ला के एरिया के लिए बन रहा है नया एसटीपी। यहां अभी सीवरेज जाम की समस्या से लोग तंग हैं। नए एसटीपी से लोगों की यह समस्या दूर हो जाएगी। - Dainik Bhaskar
गाजीपुर, ढकौली और पीरमुछल्ला के एरिया के लिए बन रहा है नया एसटीपी। यहां अभी सीवरेज जाम की समस्या से लोग तंग हैं। नए एसटीपी से लोगों की यह समस्या दूर हो जाएगी।
  • पंजाब वाॅटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड ने बनाना है यह एसटीपी, टेंडर कॉल हुए, 28 को खुलेंगे

जीरकपुर शहर में बनने वाला नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट करीब दो साल में बनकर तैयार होगा। इसके लिए पंजाब वाॅटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड ने टेंडर कॉल कर दिए हैं। 28 जनवरी को टेंडर खुलेंगे। टेंडर खुलने के 18 महीने बाद इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय तय किया गया है। यानी इस पर करीब दो साल का समय लग जाएगा।

सिंगपुरा में बने शहर के पहले एसटीपी जितनी क्षमता का नया प्लांट बनाने के लिए 27.30 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी गई है। पंजाब वाॅटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड की एक्सईएन लता चौहान ने बताया कि यह गाजीपुर एरिया में बनेगा। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे के एक तरफ सिंगपुरा में एसटीपी बना है। यह ट्रीटमेंट प्लांट हाईवे की दूसरी ओर गाजीपुर का एरिया कवर करेगा। इससे करीब आधे शहर का सीवरेज ट्रीट किया जाएगा।

इसलिए बनाया जा रहा दूसरा एसटीपी

जीरकपुर के सीवरेज को ट्रीट करने के लिए सिंगपुरा में बने ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता कम पड़ने से यहां पूरा शहर ही प्रदूषण की चपेट में है। वजह यह है कि शहर के रोजाना के सीवरेज का आधा हिस्सा यहां प्लांट में पहुंचाने से पहले ही नालों में छोड़ा जा रहा है। यहां लगातार बन रहे मकानाें, अपार्टमेंट्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स का सीवर इसी ट्रीटमेंट प्लांट में जाता है।

ढकौली, गाजीपुर, पीरमुछल्ला और इसके आसपास एरिया के लिए एक नया प्लांट बनाने की जरूरत थी। इसलिए यह एसटीपी यहां गाजीपुर एरिया में बनाया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट को ओवरफ्लो करने के पीछे यहां के कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स भी हैं, जिनमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगे हैं। एमसी के अधिकारी इनकी चेकिंग भी नहीं कर रहे हैं।

पंजाब अपार्टमेंट एक्ट में यह जरूरी है कि हरेक अपार्टमेंट में एसटीपी लगा हो और चालू हालत में हो। जीरकपुर में इस समय दर्जनों मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स हैं। पंजाब अपार्टमेंट एक्ट के तहत सभी अपार्टमेंट्स में एसटीपी अनिवार्य हैं। यानि कि अपार्टमेंट्स के हरेक फ्लैट के अंदर से निकलने वाला सीवरेज बाहर लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में जाएगा।

वहां फिल्टर होकर ही इसका साफ पानी नगर परिषद की सीवरेज लाइन में जाएगा। इससे सीवरेज लाइन ब्लाॅक नहीं होगी। इसके बाद यह शहर में बने मेन सीवरेज पंपिंग स्टेशन में जाकर बड़े एसटीपी में जाएगा। इससे प्रदूषण भी कम होगा और अपार्टमेंट्स का कचरा सीधे बाहर नहीं आएगा। लेकिन ऐसा सभी अपार्टमेंट्स में नहीं हो रहा है, क्योंकि कई अपार्टमेंट्स में एसटीपी काम नहीं कर रहे हैं।

जो अपार्टमेंट्स नालों के पास बने हैं, उनका गारबेज नालों में डाला जा रहा है। एसटीपी को चलाने का खर्चा आता है। बिजली का बिल और इसकी मेंटेनेंस पर हर महीने काफी खर्च आता है। कई बिल्डर्स और अपार्टमेंट्स में बनी रेजिडेंट्स की एसोसिएशंस इस खर्च को बचाने का काम कर रही हैं।

जो मल्टीस्टोरीज अपार्टमेंट्स नए बन रहे हैं, उनमें तो एसटीपी लगे हैं लेकिन जो पुराने हैं, उनमें से कई के एसटीपी बंद हो चुके हैं। इनको चेक नहीं किया गया, इसलिए इन्हें बनाने वाले बिल्डर और बाद में अपार्टमेंट्स की रेजिडेंट्स एसोसिएशंस ने भी इसको गंभीरता से नहीं लिया। इससे शहर की स्वच्छता खतरे में पड़ी हुई है।

28 जनवरी को टेंडर खोले जाएंगे। इसके बाद टेंडर अलॉट होने के बाद से 18 महीनों में इसे पूरा किया जाएगा। इसके बाद सीवरेज जाम की समस्या खत्म हो जाएगी।
-लता चौहान, एक्सईएन पंजाब वाॅटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड

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