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बड़े सरकारी हॉस्पिटल की तैयारी:डिस्पेंसरीज में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या, जीरकपुर में बने बड़ा सरकारी हॉस्पिटल, ताकि लोगों को परेशानी न हो

जीरकपुर10 दिन पहले
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लोगांे ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर मांग की है कि जीरकपुर में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं। उनकी मांग है कि यहां एक सरकारी हॉस्पिटल बनना चाहिए ताकि लोगों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
  • शहर की 3 लाख से अधिक आबादी के लिए ढकोली के सीएचसी को अपग्रेड कर 100 बेड का हॉस्पिटल बनाने की जरूरत...

जीरकपुर शहर में एक बड़े सरकारी हॉस्पिटल की जरूरत है। शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। जिसके चलते यहां की डिस्पेंसरीज पर दबाव बढ़ रहा है। यहां की डिस्पेंसरीज में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर की 3 लाख से अधिक आबादी के लिए ढकोली की सीएचसी को अब अपग्रेड कर यहां करीब 100 बेड का हॉस्पिटल बनाने की जरूरत है।

इसको लेकर शहर के अलग-अलग कॉलोनियों के लोगों ने बड़े हॉस्पिटल की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। लोगों का कहना है कि ढकोली की सीएचसी के अलावा शहर मंे कुछ डिस्पेंसरीज भी हैं जिनकी हालत ठीक नहीं है। सरकारी डिस्पेंसरीज में भी सिर्फ काम ही चलाया जा रहा है। इनकी बिल्डिंग्स पुरानी होने की वजह से सुरक्षित नहीं रही हैं।

इसके अलावा िडस्पेंसरीज में मशीनों और दवाइयों को सही ढंग से रखने के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाएं नहीं हैं। कई डिस्पेंसरीज मेंटेनेंस के अभाव में खस्ताहाल बनी हुई हैं। लोगों को छोटी-बड़ी बीमारियों के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है।

बहुत से लोग मोहाली, पंचकूला के सेक्टर 6 स्थित सिविल हॉस्पिटल या चंडीगढ़ के हॉस्पिटल्स का भी रुख करते हैं, लेकिन वहां पहले से ही मरीजों की भीड़ लगी रहती है। ढकौली स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के के अलावा बलटाना, लोहगढ़, प्रीत कॉलोनी में डिस्पेंसरीज हैं, लेकिन इनमें न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही जरूरी सुविधाएं हैं।

जीरकपुर में डिस्पेंसरीज हैं लेकिन यहां बड़ा हॉस्पिटल बनना चाहिए। यहां की डिस्पेंसरी में भी बहुत सी जरूरी सुविधाएं भी नहीं हैं। शाम होने के बाद डिस्पेंसरी में जाने का कोई फायदा नहीं। शाम को इन्हें जल्दी बंद कर दिया जाता है। ऐसे लोग जो अपने कामकाम की वजह से दिन में समय नहीं निकल पाते, वे शाम को डिस्पेंसरी जाना चाहें तो ओपीडी बंद मिलती है। ऐसे में कामकाजी मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। संजीव कुमार

जीरकपुर में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं होनी चाहिए। यहां हर फील्ड में डेवलपमेंट तेजी से हुई है। शहर में जगह-जगह हाईराइज बिल्डिंग्स बन चुकी हैं। आबादी भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में डिस्पेंसरीज पर बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधाओं मुहैया करवाने के लिए दबाव बढ़ गया है। लेकिन डिस्पेंसरीज में वह सुविधाएं नहीं हैं, जो आज के समय की जरूरत को देखते हुए होनी चाहिए। आए दिन बड़े हादसे भी होते रहते हैं जिसके चलते गंभीर जख्मी लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। विनय भारद्वाज

ऐसे कई केस सामने आते हैं जिनमें मरीज को समय पर इलाज न मिलने के चलते काफी मुश्किल झेलनी पड़ी। शहर की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही, उस तेजी से यहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। चंडीगढ़ के नजदीक और गेट वे ऑफ पंजाब के नाम से पहचान रखने वाला जीरकपुर हेल्थ सर्विसेज के मामले में बहुत निचले स्तर पर है। इससे शहर की इमेज पर भी असर पड़ता है। यहां के बाशिंदों को मूलभूत जरूरतों के लिए भी अन्य शहरों के लिए भागना पड़ता है। राजेश

शहर में बड़ा हॉस्पिटल बनाया जाना चाहिए। डिस्पेंसरीज से काम नहीं चलने वाला। महंगाई के इस दौर में इलाज के लिए आम लोगों के पास सरकारी हॉस्पिटल एकमात्र ऑप्शन है। महंगे प्राइवेट हॉस्पिटल में एक बार चले जाने पर इतना भारी-भरकम बिल बनाया जाता है कि दूसरी बार जाने की हिम्मत नहीं होती। ऐसे में पैसा भी खर्च हो जाता है और इलाज भी पूरा नहीं हो पाता। बुजुर्गों और छोटे बच्चों अक्सर रात के समय अचानक गंभीर बीमार हो जाते हैं। ऐसे में उनके इलाज के लिए घर के नजदीक सरकारी हॉस्पिटल होना चाहिए। इंदर सेठी

शहर में बड़े हॉस्पिटल की जरूरत है। यहां आए दिन एक्सीडेंट होते रहते हैं। इसके लिए भी इलाज के लिए दूसरे शहरों के हॉस्पिटल में जाना पड़ता है। दिन के अलावा रात के समय भी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। यहां बड़ा हॉस्पिटल बनेगा तो मरीजों और गंभीर जख्मी लोगों को इमरजेंसी की सुविधा भी मिल सकेगी। यहां कई बार सड़क हादसे हुए हैं जिनमें कई लोगों को गंभीर जख्मी होने पर शहर से बाहर इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट हॉस्पिटल या दूसरे शहर के हॉस्पिटल में जाना पड़ा। विनय

जीरकपुर में बसे परिवारों में ज्यादातर इस स्थिति में नहीं हैं कि वे बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में महंगा इलाज करवा सकें। शहर में बड़ी आबादी ऐसे परिवारों की है जो इलाज के लिए गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लोगों को शहर में ही सस्ता इलाज मुहैया करवाने के लिए बड़ा सरकारी हॉस्पिटल बनाया जाना बहुत जरूरी है क्योंकि ये इलाज के लिए शहर से बाहर जाने की स्थिति में भी नहीं होते। शहर में बनी डिस्पेंसरीज भी इस हालत में नहीं हैं जहां मरीजों को प्राथमिक उपचार भी ढंग का मिल सके। सुखदेव चौधरी

जीरकपुर की आबादी काफी बढ़ चुकी है लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर वही सालों पुराना ढर्रा चला आ रहा है। सरकार को यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान देने की बेहद जरूरत है। हमें अपने इलाज के लिए पंचकूला या चंडीगढ़ के हॉस्पिटल्स में जाना पड़ता है। जीरकपुर में इस समय एक सीएचसी है। हमारी मांग है कि यहां 100 बेड का हॉस्पिटल बने। मरीजों का ठीक से इलाज करने के लिए कुछ डाॅक्टर्स तैनात किए जाने चाहिए। यहां ढकौली की डिस्पेंसरी पर भी मरीजों की संख्या का दबाव बना हुआ है। राजकुमार

जीरकपुर में सस्ता इलाज नहीं मिल रहा। ऐसे में हमें मामूली बीमारियों के लिए भी प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है। इतनी ज्यादा आमदनी भी नहीं है कि प्राइवेट डॉक्टरों की मुंहमांगी फीस और इलाज का खर्च उठा सकें। पंचकूला के सेक्टर 6 सिविल हॉस्पिटल जाओ तो वहां काफी संख्या में जीरकपुर के मरीज मिलते हैं। जबकि इस शहर की आबादी के हिसाब से यहां एक बड़ा हॉस्पिटल होना चाहिए। लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए यह काम जरूरी है। राजकुमार शर्मा

जीरकपुर में बड़ा हॉस्पिटल होना बहुत जरूरी है। सरकार ने हमें यहां की खस्ताहाल डिस्पेंसरीज के भरोसे छोड़ रखा है। शहर में लोकल लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले परिवारों की भी काफी आबादी है। ये लोग भी इलाज के लिए शहर के हॉस्पिटल्स पर ही निर्भर हैं। इलाज के लिए यहां की कुछ डिस्पेंसरीज में न तो पर्याप्त मशीनरी है और न ही डॉक्टर्स व अन्य स्टाफ। ऐसे में कई मरीज तो डिस्पेंसरी जाने में भी कोई फायदा नहीं समझते। रवि शर्मा

जीरकपुर में कम से कम 100 बेड का हॉस्पिटल तो होना ही चाहिए। इलाज भी मूलभूत जरूरतों में शामिल है। लेकिन सरकार यह भी लोगों को मुहैया नहीं करवा पा रही है। जीरकपुर के लोग इलाज के लिए चंडीगढ़, पंचकूला या मोहाली के हॉस्पिटल्स पर निर्भर हैं। किसी भी परिवार के लिए अपने बीमार परिजन को लेकर दूसरे शहर जाना मुश्किल काम होता है। खासकर ऐसे परिवार के लिए जिसमें कोई युवा मदद करने के लिए मौजूद नहीं होता। बुजुर्ग लोगों को शहर से बाहर जाकर इलाज करवाना परेशानी वाला काम है। राजेश अग्रवाल

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