स्ट्रे डॉग्स के डर से नहीं मिला छुटकारा:लोग बोले- स्टरलाइजेशन के लिए कुछ नहीं कर रही जीरकपुर एमसी

जीरकपुर2 महीने पहले
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जीरकपुर शहर में लोगों को स्ट्रे डॉग्स के डर से छुटकारा नहीं मिला है। हर रोज डॉग बाइट के केस हॉस्पिटल्स में पहुंच रहे हैं। गली-मोहल्लों में स्ट्रे डॉग्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वजह यह है कि स्ट्रे डॉग्स की संख्या को काबू करने के लिए जीरकपुर एमसी कोई कदम नहीं उठा रही है। लोगों का कहना है कि सुबह सैर करने के लिए घर से निकलते हैं तो स्ट्रे डॉग्स पीछे भागते हैं।

वीरवार की सुबह बलटाना मेन मार्केट में दुकानों के आसपास बैठे स्ट्रे डॉग्स इस रोड पर सैर के लिए निकले लोगों के पीछे पड़ गए। सड़क पर जा रहे कुछ युवाओं ने स्ट्रे डॉग्स को भगाया। लोगों ने कहा कि उनके साथ अक्सर ऐसा होता है। कभी हाथ में डंडा नहीं होता है तो स्ट्रे डॉग्स का झुंड पीछे पड़ जाता है। तड़के कुछ अंधेरा रहता है और सड़क पर ज्यादा लोग भी नहीं होते। ऐसे में स्ट्रे डॉग्स से ज्यादा खतरा रहता है।

इनसे बचने के लिए कुछ लाेग सैर पर निकलने से पहले साथ में डंडा लेकर चलते हैं। लोगों का कहना है कि एक साल पहले जिस गली में एक-दो स्ट्रे डॉग्स दिखाई देते थे, अब वहां स्ट्रे डॉग्स का झुंड नजर आता है। जीरकपुर एमसी स्ट्रे डॉग्स की स्टरलाइजेशन को लेकर अभी तक कोई काम नहीं कर पाई है। ऐसे में स्ट्रे डॉग्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब शहर में डॉग बाइट का केस न आता हो। ज्यादातर केस छोटे बच्चों को काटने के होते हैं। स्ट्रे डॉग्स के लिए छोटे बच्चों पर हमला करना ज्यादा आसान होता है। कुछ दिन पहले ही एक पांच साल के बच्चे को खेलते समय स्ट्रे डाॅग ने काट लिया था।

लोगों का कहना है कि डॉग बाइट के बाद भले ही घाव भर जाए लेकिन पेरेंट्स को हमेशा डर लगा रहता है कि बच्चे को भविष्य में रैबीज जैसी काेई बीमारी न हो जाए। स्ट्रे डॉग्स की समस्या से निपटने के लिए एमसी के पास कोई प्लानिंग नहीं है। एमसी की हाउस मीटिंग में स्ट्रे डॉग्स की बढ़ती संख्या पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव पास किया गया।

रुटीन के काम निपटाने तक के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं

वहीं, लोगों का कहना है कि सिर्फ प्रस्ताव पास कर लेने से कुछ नहीं होने वाला है। जीरकपुर एमसी के पास तो अपने रुटीन के काम निपटाने तक के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्ट्रे डॉग्स को पकड़ने के लिए अलग से प्रशिक्षित लोगों की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि प्रशिक्षित लोग ही डाॅग्स को सुरक्षित ढंग से पकड़ सकते हैं। इसके अलावा पंचकूला सहित आसपास के एरिया से जीरकपुर में डॉग्स लाकर न छोड़े जाएं इस पर भी नजर रखनी होगी।

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