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परेशानी:फिक्स डिपोजिट में रखे 50 करोड़ रुपए से ज्यादा, पब्लिक बुनियादी सुविधाओं को तरसी

जीरकपुर16 दिन पहले
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  • सड़कें टूटी, स्ट्रीट लाइट्स खराब और लावारिस पशुओं से लोग परेशान

जीरकपुर नगर परिषद पंजाब की इकलौती ऐसी एमसी है, जिसे इस शहर की जनता करोड़ों रुपए का रेवेन्यू विभिन्न तरह के टैक्स और डेवलपमेंट चार्जेज के तौर पर देती है। करीब 100 करोड़ का रेवेन्यू जीरकपुर एमसी को हर साल मिलता है। दूसरी ओर, एमसी को मालामाल करने वाली पब्लिक का हाल बेहाल है।

मार्च 2020 में जीरकपुर एमसी हाउस की टर्म पूरी होने से पहले एक मीटिंग रखी थी। उस मीटिंग में पुराने पेंडिंग पड़े काम और नए कामों को करने के एजेंडे को पास किया गया था। हरेक वार्ड से सड़कों को बनाने, स्ट्रीट लाइट्स, स्ट्रे कैटल समेत डेवलपमेंट के सभी मुद्दों पर वर्क ऑर्डर जारी किए गए हैं। 50 करोड़ के कामों में आधे भी नहीं हो पाए हैं।

यहां एक ओर एमसी के पास कराेड़ाें का फंड है तो दूसरी ओर सड़कों, पार्कों और अन्य बुनियादी कामों को नहीं किया जा रहा है। जीरकपुर एमसी ने यहां गाजीपुर में करीब 30 करोड़ की लागत से एसटीपी बनवाना है। यह काम पंजाब वाटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड को कराना है।

इसके लिए एमसी ने 5 करोड़ रुपए सीवरेज बोर्ड को दे भी दिए लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। कुछ महीने पहले जीरकपुर एमसी ने एनएचएआई को करीब 20 करोड़ रुपए दिए। इस रकम से जीरकपुर से लेकर पंचकूला तक करीब 3 किलोमीटर नई रोड बनाई जानी है।

यह भी काम भी शुरू नहीं हो सका है। वहीं, एमसी हाउस में शहर के अलग-अलग एरिया में ट्यूबवेल लगने थे। इस काम पर भी करीब एक करोड़ रुपए का खर्च आना है। इनमें एक ट्यूबवेल लगाने का काम शुरू नहीं हो सका है।

जीरकपुर एमसी को इतना रेवेन्यू मिलता है

जीरकपुर नगर परिषद की आमदनी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां पंजाब की कई नगर परिषदें और काॅर्पोरेशंस अपने ही कर्मचारियों की सैलरी तक जेनरेट करने में नाकाम रही हैं, वहीं जीरकपुर एमसी की साल दर साल कमाई करोड़ों में रही। साल 2007 से अगर हम इसका आंकड़ा देखें तो यहां 2007-08 में 17 करोड़ से 21 लाख से ज्यादा का राजस्व नक्शा फीस व अन्य स्रोतों से हासिल हुआ।

इसी तरह हर साल करोड़ाें रुपए यहां डेवलपमेंट वर्क पर लगाने के लिए राज्य सरकार से पैसे की डिमांड तक नहीं करनी पड़ी। साल 2008-09 में 15 करोड़ से ज्यादा, 2009-10 में 17 करोड़, 2010-11 में 25 करोड़, 2011- 12 में 49 करोड़, 2012-13 में 51 करोड़, 2013-14 में 66 करोड़, 2014-15 में 49 करोड़, 2015-16 में 44 करोड़, 2016- 17 में 55 करोड़ व 2017-18 में 55 करोड़ की आमदनी जीरकपुर एमसी ने की।

साल 2018-19 में 65 करोड़ से ज्यादा इसी तरह 2019-20 में 75 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू एमसी को मिला। इसी तरह हर साल शहर की डेवलपमेंट पर खर्च भी किया गया। न तो उन खर्च किए रुपयों से शहर की हालत बदली और न अब बदली जा रही है।

सिर्फ एजेंडे ही होते हैं पास
जीरकपुर नगर परिषद अब तक ज्यादातर विकास कार्यों के एजेंडे बनाकर ही छोड़ देती है। एजेंडों पर 50 प्रतिशत भी काम नहीं होता है। पंजाब की कई काॅर्पोरेशंस की जनसंख्या 3 लाख से भी कम है। आमदनी के मामले में भी कम है, जबकि जीरकपुर इस समय पंजाब की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली नगर परिषद है। इसकी जनसंख्या तीन लाख से ज्यादा है। ऐसे में यहां कॉर्पोरेशन बनाई जा सकती है।

नगर निगम बनने से फायदा
नगर निगम का कमिश्नर के पास इतनी शक्तियां होती हैं कि वह एसडीओ स्तर तक के कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। जीरकपुर के लिए नगर निगम इसलिए भी बनाना जरूरी हो गया कि यहां एमसी ऑफिस का काम बेलगाम है। पहले तो सड़कें समय पर बनती नहीं हैं। अगर बनाने का काम शुरू होता है तो अधिकारी काम की जांच नहीं करते।

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