राधिका मां:20 साल में 45 गरीब बच्चों को पढ़ाकर काबिल बनाया

बालोद13 दिन पहले
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राधिका गुप्ता - Dainik Bhaskar
राधिका गुप्ता

शहर में संचालित निजी स्कूल तक्षशीला एकेडमी की संचालिका व शिक्षिका राधिका गुप्ता (62) ने हर साल 2 के बजाय 3 से 5 बच्चों को गोद लेकर पढ़ाने का निर्णय लिया है। शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सामग्रियों की व्यवस्था भी फ्री में करेंगी। श्रीमती गुप्ता 2002 से अब तक 20 साल में 45 बच्चों को गोद ले चुकी हैं। राधिका गुप्ता ने कहा कि जब तक सांसें चलेंगी, हर साल जरूरतमंद बच्चों को फ्री में एडमिशन देकर पढ़ाएंगी। खास बात यह भी है कि स्कूल में काम करने वाली सभी महिलाएं हैं। इसमें 10 शिक्षिकाएं और 2 प्यून शामिल हैं।

टीचर नहीं मां और बड़ी मम्मी कहलाना पसंद: नि:शुल्क नर्सरी से 10वीं तक कुल 13 क्लास में खुद के अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने का जिम्मा उठाने वाली राधिका कहती हैं कि बच्चे मुझे टीचर नहीं बल्कि मां के रूप में देखें, मुझे टीचर नहीं मां और बड़ी मम्मी कहलाना पसंद है। ज्यादातर बच्चे मुझे बड़ी मम्मी कहकर पुकारते हैं।

मैं भी मां जैसा सभी को प्यार, दुलार देती हूं। 20 साल पहले जब 2002 में प्राइवेट स्कूल खोली थी, तब से निर्णय लिया था कि हर साल कोई न कोई जरूरतमंद बच्चे की मदद करूंगी। पिछले दो साल कोरोना की वजह से एक-दो बच्चे ही पहुंचे। बच्चों को स्वावलंबी बनाने का यह सफर जारी रहेगा।

बच्चों की जुबानी- बिना फीस के पढ़ रहे
गोद लिए 42 में से 17 बच्चे तक्षशीला एकेडमी से पढ़ाई पूरी कर कॉलेजों में एडमिशन लेकर आगे का कोर्स कर रहे हैं। बाकी 25 बच्चे अब भी यहां पढ़ाई कर रहे हैं। अभी गर्मी छुट्टी की वजह से सभी अपने घर पर हैं। बालोद की छात्रा कविता ने बताया कि पैसे की तंगी के कारण परिवार वालों ने सोचा नहीं था कि अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला हो पाएगा।

लेकिन यह सब बड़ी मम्मी (राधिका) के कारण ही संभव हो पाया। राहुल मंडावी, सागर कुमार, विवेक, जया ने स्कूल में पेन, कॉपी, किताब भी मिलता है। कई बच्चे इंजीनियरिंग, एमबीबीएस कोर्स कर रहे है। राधिका बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर काम कर रही हैं।

यहां हो चुकी सम्मानित
2016 से 2020 तक दिल्ली, सोनीपत, पानीपत हरियाणा, नागपुर, पुणे, मुंबई महाराष्ट्री, कुरूक्षेत्र, छत्तीसगढ़ में राधिका को 12 नेशनल और एक स्टेट अवाॅर्ड मिल चुका है। राधिका ने बताया कि हमारे स्कूल में पढ़े शेर बहादुर डीएसपी बन गया है। सागर देशमुख एयरफोर्स में है। रुद्रनारायण एक्साइज ऑफिसर है।

उद्देश्य: किसी की भी पढ़ाई न रुके
राधिका गुप्ता ने बताया कि ऐसे पालक जो फीस नहीं दे पाते, पैसे की तंगी के कारण बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं दे पाते। ऐसे बच्चों को आगे बढ़ाकर शिक्षा देना मुख्य उद्देश्य है। हर पालक या बच्चे का सपना होता है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाई करें। इसलिए बच्चों को आत्मनिर्भर बना रही हूं।

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