बस्तर विश्वविद्यालय में:3 शोधार्थियों की पीएचडी की मौखिक परीक्षा हुई

जगदलपुर4 दिन पहले
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बस्तर विश्वविद्यालय में संचालित पीएचडी पाठ्यक्रम के अंतर्गत तीन शोधार्थियों करुणा देवांगन, पुष्पा खिलाड़ी और रविशंकर गुप्ता को सोमवार को आयोजित मौखिकी परीक्षा के बाद उपस्थित बाह्य परीक्षकों ने पीएचडी उपाधि प्रदान करने की अनुशंसा की है। डॉ. चेतन राम पटेल, प्राचार्य व शोध निर्देशक, शासकीय गुंडाधूर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोंडागांव के निर्देशन में करुणा देवांगन ने मराठाकालीन बस्तर रियासत का ऐतिहासिक अध्ययन (1778 से 1884 ई. तक) विषय में अपना शोध किया है।

करुणा के शोध में बस्तर अंचल में मराठाओं का आगमन 1741 से माना जाता है। डॉ. चेतन राम पटेल, शोध निर्देशक के निर्देशन में ही पुष्पा खिलाड़ी ने उत्तर बस्तर की गोंड जनजाति का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं लोकतांत्रिक विकास का ऐतिहासिक अध्ययन (1947 से 1998 ई.तक) अपना शोध किया है। पुष्पा के शोध में बस्तर संभाग के कांकेर जिले का क्षेत्र (1947 से 1998 तक) स्वाधीनता पूर्व बस्तर उपक्षेत्र की कांकेर सामंती रियासत का क्षेत्र था।

बाह्य परीक्षक डॉ. ऊषा अग्रवाल, प्राध्यापक इतिहास, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर (मध्यप्रदेश) ने करुणा देवांगन और पुष्पा खिलाड़ी की सुन्दरतम् अभिव्यक्ति, प्रस्तुति की सहज और सरल भाषा एवं विषय की पकड़ के आधार पर शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर, जगदलपुर से पीएचडी की उपाधि देने की अनुशंसा की।

रविशंकर गुप्ता ने ग्रामीणों के विकास में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की भूमिका (दंतेवाड़ा जिले के विशेष संदर्भ में) का शोध कार्य डॉ. एलआर सिन्हा, सहायक प्राध्यापक, भानुप्रतापदेव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के निर्देशन में पूर्ण किया।

रविशंकर गुप्ता के शोध में दंतेवाड़ा जिले के ग्रामीणों के विकास से संबंधित बाधाओं को रेखांकित करते हुए उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किया गया है, इसके लिए योजनाओं को अच्छी रीति से लागू करने पर जोर दिया गया है।

ग्रामीणों के विकास में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की भूमिका पर विशेष बल दिया गया है। सभी शोधार्थियों को मौखिकी परीक्षा समाप्ति के के बाद पीएचडी की अधिसूचना भी दी गई।

इस परीक्षा में शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव, कुलसचिव अभिषेक कुमार बाजपेई, सहायक कुलसचिव सीएल टंडन, देवचरण गावडे़, केजूराम ठाकुर, डॉ. शिखा सरकार, डॉ. पुरोहित कुमार सोरी, चन्द्रप्रकाश यादव, डॉ. सियालाल नाग, डॉ. पूर्णिमा चटर्जी, डॉ. सुकृता तिर्की, दुष्यंत मेश्राम, शोधार्थी एवं विश्वविद्यालय अध्ययनशाला के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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